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136 साल में पहली बार रावण के पुतले का नहीं हुआ दहन

Mon, 26 Oct 2020 12:33 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 26 Oct 2020 12:33 AM IST
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ravan ka putla jalaya
फिरोजाबाद। 136 साल से सुहाग नगरी के रामलीला मेला महोत्सव में विजयादशमी के दिन रावण वध की लीला का मंचन होता रहा है। ऐसा पहली बार हुआ है कि दशहरा पर रामलीला मैदान खाली रहा। प्रतीकात्मक रूप से भी कोई आयोजन नहीं हुआ। कोरोना संक्रमण के कारण आयोजन की अनुमति प्रशासन ने नहीं दी। इससे लोग मायूस रहे। दुर्गा नवमी पर रविवार को गांव-कस्बों से काफी संख्या में लोग कैलादेवी मंदिर के पास स्थित रामलीला मैदान पहुंचे। लेकिन कोई आयोजन नहीं देख वापस चले गए।
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प्रशासन ने कोविड के कारण इस बार रामलीला महोत्सव के लिए अनुमति नहीं दी थी। पूर्व में आयोजन से जुडे़ रहे लोगों ने प्रशासन से प्रतीकात्मक रूप से आयोजन कराने के लिए भी कहा था। चूंकि कमेटी का विवाद था इस लिए प्रशासन को ही आयोजन के बारे में निर्णय लेना था लेकिन प्रशासन आयोजन के लिए कमेटी तय नहीं कर पाया।
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रामलीला मेला कमेटी के पूर्व सदस्य नितेश अग्रवाल ने बताया कि प्रशासन को कम से कम दशहरा पर तो प्रतीकात्मक रूप से आयोजन कराना था या कमेटी तय करने कराना था। रामलीला कमेटी के पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र यादव ने कहा कि 136 साल पुराने रामलीला महोत्सव में एक भी आयोजन न होने से पूरा शहर मायूस हुआ है। हजारों लोगों को इससे रोजगार मिलता था वह वंचित रहे।
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- मेला देखने के लिए बेटा काफी समय से जिद कर रहा था। लेकिन मेले का आयोजन न होने के कारण आने का मन भी नहीं कर रहा था। मेले का जो माहौल है। ऐसा कभी नहीं रहा। साल में एक बार मेला लगता है, सरकार को कोई रास्ता निकाल कर मेला कराने की अनुमति देनी चाहिए थी। - सीमा निवासी सत्यम नगर
- उम्मीद थी कि मेला नहीं हुआ तो कम से कम रावण का पुतला दहन तो होगा। इसी उम्मीद से रामलीला मैदान में साथियों के साथ मेला देखने के लिए आए थे। लेकिन यहां कुछ नहीं है। माता रानी के दर्शन करके घर जा रहे है। नरेंद्र सिंह राठौर, निवासी कबीरनगर

- परिवार के लोग काफी जिद कर रहे थे कि मेला दिखा लाओ। लेकिन इस बार मेला में देखने लायक कुछ नहीं है। दुकानें भी नहीं लगी, झूले लगे भी है, तो वह भी बंद पड़े है। बच्चों के मनोरंजन के लिए साल में एक यही मेला लगता था। जो इस बार नहीं है। दीपू, निवासी दुर्गानगर
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