फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Firozabad News ›   Patience success, role of positive thinking

सफलता में धैर्य, सकारात्मक सोच की अहम भूमिका

Sun, 03 Jul 2016 11:14 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Sun, 03 Jul 2016 11:14 PM IST
विज्ञापन
Patience success, role of positive thinking
प्रयास कार्यक्रम का आयोजन किया गया
सपने वही होते हैं, जो आपको सोने नहीं देते। पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय एपीजे अब्दुल कलाम की इसी सोच का जिक्र करते हुए मुख्य वक्ता नीलेश यादव और विशु राजा चौहान ने छात्र-छात्राओं को सिविल सर्विस की तैयारी के लिए प्रेरित किया। विशु राजा सिविल परीक्षा में चयनित होने के बाद अमर उजाला एवं सेंटर फॉर एंबिशन कोचिंग के ‘प्रयास’ में विद्यार्थियों से रूबरू होने फीरोजाबाद आए।
विज्ञापन

होटल तुलसी पैलेस में आयोजित प्रयास कार्यक्रम में सिविल परीक्षा में 12 वें नंबर पर चयितन हुए विशु राजा चौहान ने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, किताबों का चयन जैसे अनेक बिंदुओं पर चर्चा कर विद्यार्थियों को टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि धैर्य, सेल्फ मोटीवेशन, निरंतरता और सकारात्मक सोच सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब दिया। सफलता की कहानी को किस तरीके से लिखा, मुंह जुबानी बयां कर युवाओं को उत्साहित किया। डायरेक्टर अमित सिंह ने कहा कि किसी भी परीक्षा के लिए घंटे नहीं लगन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि डाक्टर, इंजीनियर और सीए से सरल है आईएएस और पीसीएस बनना। मगर लोग इसे उल्टा समझकर दूर भागते हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं को परीक्षा से जुडे़ तमाम सवालों का जवाब दिया।  कार्यक्रम में आयोजित क्विज प्रतियोगिता में पूछे गए सवालों का सही जवाब देने वाले छात्रों को पुरस्कृत किया। कार्यक्रम में सेंटर ऑफ एंबिशन के विमलेश मौजूद रहे।
विज्ञापन


छात्र गौरव ने सवाल करते हुए कहा कि क्या पेपर में कि ताब की तरह लिखा जाना चाहिए या फिर अपनी मौलिक भाषा के हिसाब से। जवाब में विशेषज्ञों ने कहा कि किताब की तरह लिखें। क्योंकि यह सरल होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


छात्रा अर्चना जैन ने कहा कि आईएएस बनने के लिए कितने घंटे पढ़ना चाहिए। किस तरह तैयारी करनी चाहिए। जवाब में विशेषज्ञों ने कहा कि कालेज के बाद आठ घंटे पढ़ना चाहिए। अखबार, करंट अफेयर्स, न्यूज दिन चर्या में शामिल करनी चाहिए।


मान्या मित्तल ने कहा कि बीएससी करने के बाद आईएएस बन सकते हैं। विशेषज्ञों ने जवाब दिया कि आईएएस के लिए 21 से 37 साल के बीच उम्र होनी चाहिए। बीएससी के साथ तैयारी करें। क्योंकि बाद में समय नहीं बचता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed