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नोटबंदी के 49 दिन: बाजार संभला पर रफ्तार नहीं पकड़ सका
अमर उजाला ब्यूूराे, फीराेजाबाद
Updated Wed, 28 Dec 2016 12:04 AM IST
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बैंक पर लगी लाइन।
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नोटबंदी के 49 दिन बाद बाजार कुछ संभला जरूर पर अब तक रफ्तार नहीं पकड़ सका है। बैंकों के बाहर अब भी कतारें लगी हुई हैं। शहर से लेकर गांव तक लोग नकदी संकट से जूझ रहे हैं।
आठ नवंबर की नोटबंदी के बाद बाजार भी थम गया। गांव में सबसे अधिक हानि आलू उत्पादक किसान को हुई। कुल उत्पादन का 12 प्रतिशत आलू किसान खुले आसमान के नीचे फेंकने को विवश हुए। खेतों में खड़ी गोभी, आलू, मिर्च की फसल बाहरी मंडी में नकदी संकट के कारण नहीं भेजी जा सकी। ऐसे में किसानों को सस्ते दामों में अपनी सब्जी बेचने को मजबूर होना पड़ा। वहीं व्यापाभी भी चैक अथवा ड्राफ्ट से सामान मंगा रहे हैं। रंग-बिरंगी चूड़ियों के बाजार में सन्नाटा है। कांच के विभिन्न उत्पादों के नए आर्डर नहीं मिल रहे है। लिहाजा उद्यमी हाथ पर हाथ रखने को विवश है। वहीं चूड़ी गोदामों, कांच फैक्ट्री में काम करने वाले श्रमिक भी काम न होने की आस से नहीं लौटे हैं।
व्यापारी बोले, 50 दिन में हालात नहीं सुधरे तो आंदोलन
- व्यापार मंडल महानगर अध्यक्ष रवींद्रलाल तिवारी ने कहा 50 दिन में सुधार नहीं हुआ तो व्यापार मंडल सड़क पर उतरेगा। बाजार के हालात नहीं सुधरने तक सर्वे-छापे बंद होने चाहिए। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष बीएस गुप्ता ने कहा नोटबंदी के 47 दिन बाद बाजार में कुछ सुधार अवश्य हुआ है लेकिन अबभी व्यापारियों को तंग नहीं किया जाना चाहिए। यदि व्यापारियों को परेशान किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
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किसान नेता बोले, अभी बैंकों में दिक्कत
- भारतीय किसान यूनियन भानु के जिलाध्यक्ष कायम सिंह हरीहर ने कहा नोटबंदी के 49 दिन बाद भी किसान उबर नहीं सका है। खाद बीज समय से नहीं मिले। अब सब्जियों व सामान के भाव बाजार में ठीक नहीं मिल रहे हैं। ग्रामीण अंचल बैकिंग व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। राष्ट्रीय किसान नौजवान संगठन के जिलाध्यक्ष राम निवास यादव ने कहा किसानों को खाद, बीज नहीं मिला। आलू की फसल कोल्ड में बर्बाद हो गई। मिर्च की फसल खेतों में खराब हो गई। गोभी, बैगन एवं टमाटर बाहर की मंडियों में बिक्री के लिए नहीं ले जा पा रहे हैं।
नई चुनौतियों के लिए भी तैयार बैंक अफसर
एसबीआई के मैनब्रांच के मुख्य प्रबंधक डीके वर्मा ने कहा कि नोटबंदी के कारण कार्य का समय बढ़ा। 11-12 घंटे तक लगातार बैंक में कार्य हुआ है लेकिन कैश की कमी के कारण लोगों को गुस्सा हमें झेलना पड़ा। कैश की समस्या दूर होने पर जनता में भी विश्वास बढ़ेगा। वर्ष 2017 की चुनौती के लिए भी हम तैयार हैं। केंद्र सरकार द्वारा दिए गए कार्य मेहनत और ईमानदारी से किया जाएगा। पीएनबी मैनब्रांच के मुख्य प्रबंधक मुकेश कुमार जैन ने कहा कि सबसे अधिक समस्या मांग के अनुरूप कैश न मिलने से हुई। कैश की कमी के कारण ही बैंक में अधिक भीड़भाड़ रही। आगे जो भी नया आदेश आएगा, हम उसके भी तैयार हैं।
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आठ नवंबर की नोटबंदी के बाद बाजार भी थम गया। गांव में सबसे अधिक हानि आलू उत्पादक किसान को हुई। कुल उत्पादन का 12 प्रतिशत आलू किसान खुले आसमान के नीचे फेंकने को विवश हुए। खेतों में खड़ी गोभी, आलू, मिर्च की फसल बाहरी मंडी में नकदी संकट के कारण नहीं भेजी जा सकी। ऐसे में किसानों को सस्ते दामों में अपनी सब्जी बेचने को मजबूर होना पड़ा। वहीं व्यापाभी भी चैक अथवा ड्राफ्ट से सामान मंगा रहे हैं। रंग-बिरंगी चूड़ियों के बाजार में सन्नाटा है। कांच के विभिन्न उत्पादों के नए आर्डर नहीं मिल रहे है। लिहाजा उद्यमी हाथ पर हाथ रखने को विवश है। वहीं चूड़ी गोदामों, कांच फैक्ट्री में काम करने वाले श्रमिक भी काम न होने की आस से नहीं लौटे हैं।
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व्यापारी बोले, 50 दिन में हालात नहीं सुधरे तो आंदोलन
- व्यापार मंडल महानगर अध्यक्ष रवींद्रलाल तिवारी ने कहा 50 दिन में सुधार नहीं हुआ तो व्यापार मंडल सड़क पर उतरेगा। बाजार के हालात नहीं सुधरने तक सर्वे-छापे बंद होने चाहिए। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष बीएस गुप्ता ने कहा नोटबंदी के 47 दिन बाद बाजार में कुछ सुधार अवश्य हुआ है लेकिन अबभी व्यापारियों को तंग नहीं किया जाना चाहिए। यदि व्यापारियों को परेशान किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
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किसान नेता बोले, अभी बैंकों में दिक्कत
- भारतीय किसान यूनियन भानु के जिलाध्यक्ष कायम सिंह हरीहर ने कहा नोटबंदी के 49 दिन बाद भी किसान उबर नहीं सका है। खाद बीज समय से नहीं मिले। अब सब्जियों व सामान के भाव बाजार में ठीक नहीं मिल रहे हैं। ग्रामीण अंचल बैकिंग व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। राष्ट्रीय किसान नौजवान संगठन के जिलाध्यक्ष राम निवास यादव ने कहा किसानों को खाद, बीज नहीं मिला। आलू की फसल कोल्ड में बर्बाद हो गई। मिर्च की फसल खेतों में खराब हो गई। गोभी, बैगन एवं टमाटर बाहर की मंडियों में बिक्री के लिए नहीं ले जा पा रहे हैं।
नई चुनौतियों के लिए भी तैयार बैंक अफसर
एसबीआई के मैनब्रांच के मुख्य प्रबंधक डीके वर्मा ने कहा कि नोटबंदी के कारण कार्य का समय बढ़ा। 11-12 घंटे तक लगातार बैंक में कार्य हुआ है लेकिन कैश की कमी के कारण लोगों को गुस्सा हमें झेलना पड़ा। कैश की समस्या दूर होने पर जनता में भी विश्वास बढ़ेगा। वर्ष 2017 की चुनौती के लिए भी हम तैयार हैं। केंद्र सरकार द्वारा दिए गए कार्य मेहनत और ईमानदारी से किया जाएगा। पीएनबी मैनब्रांच के मुख्य प्रबंधक मुकेश कुमार जैन ने कहा कि सबसे अधिक समस्या मांग के अनुरूप कैश न मिलने से हुई। कैश की कमी के कारण ही बैंक में अधिक भीड़भाड़ रही। आगे जो भी नया आदेश आएगा, हम उसके भी तैयार हैं।