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राष्ट्रीय लोक अदालत में 1638 वाद निस्तारित
Amar Ujala
Updated Sat, 13 Aug 2016 11:59 PM IST
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कोर्ट
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जिलाजज एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष पीके सिंह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जनपद न्यायालय प्रांगण में किया गया। इसमें 1638 वादों का निस्तारण किया गया। बैंकों के ऋण संबंधी 616 मामलों का निस्तारण करके दो करोड़ छह लाख 58 हजार ऋण वसूला गया। इससे वादकारियों को काफी लाभ हुआ है।
जनपद न्यायालय प्रांगण में आयोजित राष्ट्रीय मासिक लोक अदालत का शुभारंभ जिला जज पीके सिंह ने दीप प्रज्जवलित करके किया। उन्होंने लोक अदालत में विभिन्न बैंकों की ओर से लगाए गए काउंटरों का निरीक्षण किया। बैंकों की ओर से लोक अदालत के माध्यम से मामलों का निस्तारण करके बकाएदारों को ब्याज की राहत दी जा रही थी। लोक अदालत में बैंक ऋण, दूर संचार, वैवाहिक, राजस्व, दीवानी एवं फौजदारी के साथ ही अन्य मामलों का भी निस्तारण आपसी समझौते से कराया गया। 1638 वादों का निस्तारण किया गया।
टेलीफोन के 39 मामलों में 87 हजार रुपया वसूला गया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्म सिंह यादव ने जिला जज को अवगत कराया कि बैंक रिकवरी के मामलों में जो लोग बकाया धनराशि जमा करा रहे हैं उनसे तहसील रिकवरी चार्ज लिया जाना गलत है। जिला जज ने प्रशासन से बातचीत करके इसे कम कराने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से दोनों पक्षों के मतभेद को भुलाकर मामलों को खत्म किया जा रहा है। विभिन्न न्यायालयों ने अनेक वादों का निस्तारण किया। एडीजे रामपाल सिंह, राकेश कुमार, पीके जैन, रिजवान अहमद, प्राधिकरण सचिव अर्चना यादव अन्य न्यायिक अधिकारियों तथा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मसिंह यादव, संजीव जैन, लियाकत अली एडवोकेट के साथ अन्य अधिवक्ता मौजूद थे।
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जनपद न्यायालय प्रांगण में आयोजित राष्ट्रीय मासिक लोक अदालत का शुभारंभ जिला जज पीके सिंह ने दीप प्रज्जवलित करके किया। उन्होंने लोक अदालत में विभिन्न बैंकों की ओर से लगाए गए काउंटरों का निरीक्षण किया। बैंकों की ओर से लोक अदालत के माध्यम से मामलों का निस्तारण करके बकाएदारों को ब्याज की राहत दी जा रही थी। लोक अदालत में बैंक ऋण, दूर संचार, वैवाहिक, राजस्व, दीवानी एवं फौजदारी के साथ ही अन्य मामलों का भी निस्तारण आपसी समझौते से कराया गया। 1638 वादों का निस्तारण किया गया।
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टेलीफोन के 39 मामलों में 87 हजार रुपया वसूला गया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्म सिंह यादव ने जिला जज को अवगत कराया कि बैंक रिकवरी के मामलों में जो लोग बकाया धनराशि जमा करा रहे हैं उनसे तहसील रिकवरी चार्ज लिया जाना गलत है। जिला जज ने प्रशासन से बातचीत करके इसे कम कराने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से दोनों पक्षों के मतभेद को भुलाकर मामलों को खत्म किया जा रहा है। विभिन्न न्यायालयों ने अनेक वादों का निस्तारण किया। एडीजे रामपाल सिंह, राकेश कुमार, पीके जैन, रिजवान अहमद, प्राधिकरण सचिव अर्चना यादव अन्य न्यायिक अधिकारियों तथा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मसिंह यादव, संजीव जैन, लियाकत अली एडवोकेट के साथ अन्य अधिवक्ता मौजूद थे।
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