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नसिया मंदिर में हंगामा, मारपीट, वेदी पर डाले ताले

ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Sun, 05 Apr 2015 10:55 PM IST
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Nasia temple commotion, assault, putting locks on the altar

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जिनाभिषेक-पूजन पद्धति को लेकर शहर के प्रमुख रत्नत्रय नसियाजी जैन मंदिर में रविवार की सुबह जमकर हंगामा हुआ। नौबत मारपीट तक पहुंच गई। माहौल इतना गरमाया कि कमेटी के लोगों ने मुख्य वेदी पर ताला डाल दिया। मौके पर थाने से पुलिस फोर्स भी पहुंच गया।
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बताते चलें रत्नत्रय नसियाजी जैन मंदिर में पिछले कई दिनों से विवाद गहराया हुआ है। विवाद की शुरुवात मंदिर परिसर में लगे त्यागीव्रती आश्रम के शिलालेख पर कालिख पोतने से हुई थी। जैन मुनि अमित सागर के शिष्य मुनिश्री संवेग सागर की प्रेरणा से बने त्यागीव्रती आश्रम की पट्टिका को मंदिर कमेटी के लोगों ने पुतवा दिया था। आश्रम के लिए दान देने वालों के नाम पर भी कालिख पोत दी गई थी। मुनि अमित सागर ने इसका विरोध किया तो कमेटी के लोगों ने पट्टिका से कालिख साफ करा दी। इसके साथ ही कमेटी के लोगों ने मुनि भक्तों के द्वारा नसिया मंदिर में किए जाने वाले पंचामृत अभिषेक और भगवान के समक्ष फूल आदि चढ़ाने का विरोध शुरू कर दिया। रविवार सुबह करीब छह बजे मुनिश्री अमित सागर के कुछ भक्त मंदिर में भगवान शीतलनाथ का अभिषेक करने पहुंचे। भक्तों ने जैसे ही पंचामृत अभिषेक शुरू किया कमेटी के लोगों ने विरोध कर दिया। फोटो खींच कर रहे युवक सीटू जैन का मोबाइल छीन लिया। कमेटी के लोगों ने शीतलनाथ भगवान की मुख्य वेदी पर ताला डलवा दिया। अन्य वेदियों को भी बंद करना शुरू कर दिया। मंदिर के हाल में चौबीसी भगवान की प्रतिमा का अभिषेक हो रहा था उस दौरान विवाद और भी बढ़ गया। धक्का-मुक्की और हंगामे के बीच तैश में आए जिनेंद्र जैन ने बिना धोती-दुपट्टा पहने अशुद्ध कपड़ों से चौबीसी पर कलश से अभिषेक शुरू कर दिया। इसका विरोध नितिन जैन नाम के युवक ने किया तो उसे धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया। उसकी पिटाई कर दी। एक अन्य युवक को भी पिटाई की। मंदिर के अंदर अराजकता जैसा माहौल बन गया। इस दौरान जैन मुनि अमित सागर समाज के लोगों से शांति की अपील करते रहे। सूचना पर थाना उत्तर से पुलिस फोर्स पहुंच गया। कमेटी के लोगों ने कहा मंदिर की जो परंपरा है वही रहेगी।


शाम तक वेदी पर पड़ा रहा ताला
शाम तक शीतलनाथ भगवान की वेदी पर ताला पड़ा रहा। अभिषेक के बाद वेदी को प्रासुक भी नहीं करने दिया गया। बार-बार टकराव के हालात यहां दिखाई दिए। शिकोहाबाद, टूंडला से भी भक्तगण यहां पहुंच गए थे।

जैन मुनि ने प्रवचन में व्यक्त की वेदना
जैन मुनि अमित सागर ने कहा कि इससे पूर्व कई दिगंबर संतों ने यहां पंचामृत अभिषेक कराया है विरोध सिर्फ हमारा ही क्यों..? विरोध का कारण पंचामृत अभिषेक नहीं है। जब कमेटी की मनमानी का विरोध किया तो बात बीस पंथ और तेरहपंथ से जोड़ दी गई। त्यागीव्रती आश्रम के कक्षों पर ताले डाल दिए गए हैं। कमरों पर पूजा करने वालों ने कब्जे कर लिए हैं। एक नहीं तीन-तीन बार त्यागीव्रती आश्रम के शिलालेख पर कालिख पोती गई। समाज में भ्रम फैलाया जा रहा है। एक व्यक्ति या एक कमेटी पूरा समाज नहीं होती। मानतुंगी आचार्य की भक्ति से 48 ताले टूट गए यह तो एक या दो ताले हैं। जैन संतों ने न कभी समता छोड़ी है और न कभी छोडे़ंगे। जैन मुनि ने कहा हमें किसी का विरोध नहीं करना जो आगम मेें लिखा है वही करेंगे उसे करने से कोई रोक नहीं सकता। मान्यता थोपी नहीं जा सकती और धर्म की ताकत हमेशा रहेगी।

पिट लेना पीटना नहीं...
जैन मुनि अमित सागर ने अपने शिष्यों से संयम से काम लेने को कहा। उन्होंने कहा कि समता भाव रखो। धर्म की रक्षा के लिए पिट लेना लेकिन किसी पर हाथ मत उठाना। किसी को पीटना नहीं।

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