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मुल्तान सिंह ने बनाई थी हैट्रिक
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फिरोजाबाद/टूंडला। जिले की टूंडला विधानसभा से चौधरी मुल्तान सिंह के अलावा आज तक कोई हैट्रिक नहीं लगा सका। वह तीन बार 1962, 1967 एवं 1969 का चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद यह विधानसभा सुरक्षित श्रेणी में आ गई। भाजपा तीन बार तथा जनता दल, सपा व बसपा ने दो-दो बार जीत चुकी हैं।
टूंडला एवं फिरोजाबाद तब आगरा जिले का हिस्सा थे। फिरोजाबाद सीट दक्षिणी एत्मादपुर/ टूंडला से पहले विधायक 1952 में उल्फत सिंह चौहान बने थे। 1957 का चुनाव रामसिंह चौहान ने जीता था। इस विधानसभा से 1962 से लेकर 1969 तक तीन चुनाव चौधरी मुल्तान सिंह ने जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 1974 में टूंडला (सु.) सीट हो जाने के कारण यहां चुनावी समीकरण ही बदल गया। 1974 का चुनाव यहां से कांग्रेस के रामजीलाल केन जीते थे। 1977 के चुनाव में जनता पार्टी के राजेश कुमार जीते उन्होंने रामजीलाल केन को हराया था।
1980 के चुनाव में फिर कांग्रेस के गुलाब सेहरा जीते थे। 1985 के चुनाव में अशोक सेहरा विधायक बने थे। 1989 के चुनाव में जनता दल से चुनाव मैदान में उतरे ओमप्रकाश दिवाकर विधायक बनें। तीन वर्ष बाद उप चुनाव हुए तो फिर ओमप्रकाश दिवाकर जीते और जनता पार्टी के रमेशचंद्र चंचल को 3406 वोट से हराया था। समाजवादी पार्टी के अस्तित्व में आने के बाद 1993 के चुनाव में रमेशचंद्र चंचल को टूंडला से प्रत्याशी बनाया तो चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे उन्होंने भाजपा के रामबहादुर चक को 3826 मतों से हराया था।
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1996 के चुनाव में शिव सिंह चक बसपा के नवनेश वरुण को 2689 मतों से हराकर विधानसभा पहुंचे थे। 2002 के चुनाव में सपा से चुनाव लड़े मोहनदेव शंखवार चुनाव जीते थे। 2007 एवं 2012 के चुनाव में बसपा के राकेश बाबू एडवोकेट चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 2007 में भाजपा के शिव सिंह चक तो 2012 में सपा के अखिलेश कुमार उर्फ धर्मदास शंखवार को हराया था। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रो. एसपी सिंह बघेल चुनाव जीते थे। हालांकि उपचुनाव में भाजपा के प्रेमपाल धनगर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
इन समस्याओं का नहीं हुआ निदान....
- टूंडला विधानसभा के कई गांवों में खारे पानी की समस्या है। पानी खारा होने के कारण ग्रामीण पीने के पानी की किल्लत के साथ फसलों को भी प्रभावित करते हैं। इसका निदान नहीं हो सका।
- टूंडला के साथ नारखी ब्लाक का ग्रामीण अंचल टीटीजोन मे आने के कारण यहां नलकूपों के बिजली का बिल अधिक आता है। किसान बिल ठीक कराने की मांग करते रहे लेकिन हल नहीं निकल सका।
- नारखी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिर्च का उत्पादक क्षेत्र हैं इसके विपणन की व्यवस्था नहीं की जा सकी। इसकी हानि सीधे किसानों को उठानी पड़ती है।
- टूंडला के यमुना की तलहटी वाले क्षेत्र एवं नारखी वाले इलाकों में विकास की दरकार रहती हैं सिंगल रूटों को ठीक कराए जाने की जरूरत है।
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टूंडला एवं फिरोजाबाद तब आगरा जिले का हिस्सा थे। फिरोजाबाद सीट दक्षिणी एत्मादपुर/ टूंडला से पहले विधायक 1952 में उल्फत सिंह चौहान बने थे। 1957 का चुनाव रामसिंह चौहान ने जीता था। इस विधानसभा से 1962 से लेकर 1969 तक तीन चुनाव चौधरी मुल्तान सिंह ने जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 1974 में टूंडला (सु.) सीट हो जाने के कारण यहां चुनावी समीकरण ही बदल गया। 1974 का चुनाव यहां से कांग्रेस के रामजीलाल केन जीते थे। 1977 के चुनाव में जनता पार्टी के राजेश कुमार जीते उन्होंने रामजीलाल केन को हराया था।
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1980 के चुनाव में फिर कांग्रेस के गुलाब सेहरा जीते थे। 1985 के चुनाव में अशोक सेहरा विधायक बने थे। 1989 के चुनाव में जनता दल से चुनाव मैदान में उतरे ओमप्रकाश दिवाकर विधायक बनें। तीन वर्ष बाद उप चुनाव हुए तो फिर ओमप्रकाश दिवाकर जीते और जनता पार्टी के रमेशचंद्र चंचल को 3406 वोट से हराया था। समाजवादी पार्टी के अस्तित्व में आने के बाद 1993 के चुनाव में रमेशचंद्र चंचल को टूंडला से प्रत्याशी बनाया तो चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे उन्होंने भाजपा के रामबहादुर चक को 3826 मतों से हराया था।
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1996 के चुनाव में शिव सिंह चक बसपा के नवनेश वरुण को 2689 मतों से हराकर विधानसभा पहुंचे थे। 2002 के चुनाव में सपा से चुनाव लड़े मोहनदेव शंखवार चुनाव जीते थे। 2007 एवं 2012 के चुनाव में बसपा के राकेश बाबू एडवोकेट चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 2007 में भाजपा के शिव सिंह चक तो 2012 में सपा के अखिलेश कुमार उर्फ धर्मदास शंखवार को हराया था। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रो. एसपी सिंह बघेल चुनाव जीते थे। हालांकि उपचुनाव में भाजपा के प्रेमपाल धनगर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
इन समस्याओं का नहीं हुआ निदान....
- टूंडला विधानसभा के कई गांवों में खारे पानी की समस्या है। पानी खारा होने के कारण ग्रामीण पीने के पानी की किल्लत के साथ फसलों को भी प्रभावित करते हैं। इसका निदान नहीं हो सका।
- टूंडला के साथ नारखी ब्लाक का ग्रामीण अंचल टीटीजोन मे आने के कारण यहां नलकूपों के बिजली का बिल अधिक आता है। किसान बिल ठीक कराने की मांग करते रहे लेकिन हल नहीं निकल सका।
- नारखी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिर्च का उत्पादक क्षेत्र हैं इसके विपणन की व्यवस्था नहीं की जा सकी। इसकी हानि सीधे किसानों को उठानी पड़ती है।
- टूंडला के यमुना की तलहटी वाले क्षेत्र एवं नारखी वाले इलाकों में विकास की दरकार रहती हैं सिंगल रूटों को ठीक कराए जाने की जरूरत है।