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कारखानों में देखा उत्पादन-प्रदूषण का हाल
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Fri, 30 Oct 2015 10:52 PM IST
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर आई केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और टीटीजेड प्राधिकरण द्वारा कांच इकाईयों का दूसरे दिन भी निरीक्षण किया गया। टीम ने पॉट और पकाई भट्ठियों में दस्तक देकर चूड़ी निर्माण के साथ प्रदूषण का हाला जाना।
सुहाग नगरी के कांच उद्योग पर प्रदूषण को लेकर लगातार संकट गहराता जा रहा है। एनजीटी में लगातार शिकायतें हो रही हैं। पहले पांच दर्जन इकाईयों के संबंध में शिकायत की गई थी कि ये इकाईयां बिना प्रदूषण बोर्ड की अनुमति से चल रही हैं। अत: इन इकाईयों को बंद कराया जाए। उस समय उद्यमियों ने लखनऊ तक दौड़ लगाकर बोर्ड से सहमति पत्र प्राप्त कर एनजीटी में जवाब दाखिल कर दिया था। मामले में एनटीजी ने संयुक्त टीम बनाकर फीरोजाबाद के कांच उद्योग का सर्वे करने के निर्देश दिए थे। एनजीटी के आदेश में संयुक्त टीम दो दिन से शहर में डेरा डाले हैं। गुरुवार को आधा दर्जन ग्लास इकाईयों में दस्तक देकर इकाईयों में बनने वाले उत्पादों के संबंध में ब्योरा जुटाया गया। उत्पाद के निर्माण प्रक्रिया को देखा गया। प्रदूषण की रोकथाम के उपाय भी देखे गए। शुक्रवार को एनजीटी की संयुक्त ने टीम स्टेशन रोड स्थित सत्य नारायन ग्लास वर्क्स में दस्तक दी। कारखाने में चूड़ी निर्माण की प्रक्रिया देखी। कच्चे माल के संबंध में जानकारी जुटाई। प्रदूषण रोकने के उपाय भी देखे। आसफाबाद स्थित सहकारी समिति पकाई भट्ठी को देखा कि यहां किस तरह पकाई की जाती है? पकाई भट्ठी से होने वाले प्रदूषण का हाल देखा। इसके बाद टीम जलेसर रोड स्थित कांच उद्योग विकास केंद्र पहुंची। यहां उन्होंने कांच उद्योग को उपलब्ध कराई जा रही टेक्नोलॉजी के संबंध में जानकारी की। सीडीजीआई अफसरों से पूछा गया कि यहां उद्यमी अपनी समस्याएं लेकर आते हैं। उनकी समस्या का किस स्तर पर समाधान हो रहा है? टीटीजेड में प्रदूषण को कम करने के लिए क्या किया जा सकता है। टीम में केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के वैज्ञानिक डा. केके गर्ग, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसपी शुक्ला, टीटीजेड अथॉरिटी के प्रतिनिधि संजय बांगड़िया, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विश्वनाथ शर्मा शामिल थे।
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सुहाग नगरी के कांच उद्योग पर प्रदूषण को लेकर लगातार संकट गहराता जा रहा है। एनजीटी में लगातार शिकायतें हो रही हैं। पहले पांच दर्जन इकाईयों के संबंध में शिकायत की गई थी कि ये इकाईयां बिना प्रदूषण बोर्ड की अनुमति से चल रही हैं। अत: इन इकाईयों को बंद कराया जाए। उस समय उद्यमियों ने लखनऊ तक दौड़ लगाकर बोर्ड से सहमति पत्र प्राप्त कर एनजीटी में जवाब दाखिल कर दिया था। मामले में एनटीजी ने संयुक्त टीम बनाकर फीरोजाबाद के कांच उद्योग का सर्वे करने के निर्देश दिए थे। एनजीटी के आदेश में संयुक्त टीम दो दिन से शहर में डेरा डाले हैं। गुरुवार को आधा दर्जन ग्लास इकाईयों में दस्तक देकर इकाईयों में बनने वाले उत्पादों के संबंध में ब्योरा जुटाया गया। उत्पाद के निर्माण प्रक्रिया को देखा गया। प्रदूषण की रोकथाम के उपाय भी देखे गए। शुक्रवार को एनजीटी की संयुक्त ने टीम स्टेशन रोड स्थित सत्य नारायन ग्लास वर्क्स में दस्तक दी। कारखाने में चूड़ी निर्माण की प्रक्रिया देखी। कच्चे माल के संबंध में जानकारी जुटाई। प्रदूषण रोकने के उपाय भी देखे। आसफाबाद स्थित सहकारी समिति पकाई भट्ठी को देखा कि यहां किस तरह पकाई की जाती है? पकाई भट्ठी से होने वाले प्रदूषण का हाल देखा। इसके बाद टीम जलेसर रोड स्थित कांच उद्योग विकास केंद्र पहुंची। यहां उन्होंने कांच उद्योग को उपलब्ध कराई जा रही टेक्नोलॉजी के संबंध में जानकारी की। सीडीजीआई अफसरों से पूछा गया कि यहां उद्यमी अपनी समस्याएं लेकर आते हैं। उनकी समस्या का किस स्तर पर समाधान हो रहा है? टीटीजेड में प्रदूषण को कम करने के लिए क्या किया जा सकता है। टीम में केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के वैज्ञानिक डा. केके गर्ग, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसपी शुक्ला, टीटीजेड अथॉरिटी के प्रतिनिधि संजय बांगड़िया, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विश्वनाथ शर्मा शामिल थे।
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