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दवाएं न डाक्टर, फिर भी जिला सूबे में अव्वल
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Fri, 22 Jul 2016 11:04 PM IST
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कायथा स्वास्थ्य केंद्र पर बंधी भैंस
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चौंकिए मत, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में जिला पूरे प्रदेश में अव्वल है। सूुबे की स्वास्थ्य विभाग की मई माह की प्रगति रिपोर्ट में फीरोजाबाद पहले स्थान पर था। यह स्थान भी सर्वाधिक ओपीडी, संस्थागत प्रसव और स्वास्थ्य विभाग अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर मिला।आंकड़ों में भले ही जिला सुूबे में अव्वल हो, लेकिन धरातल की स्थिति तो कुछ और ही है। स्वास्थ्य केंद्रों पर न डाक्टर मिलते हैं और न दवाएं मिलती है। चयन प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो साथ ही सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जब सूबे में अव्वल जिले का यह हाल है तो दूसरों का क्या हाल होगा।
रखने ही जगह हो दवाएं मंगाए
कठफोरी : पंचायत घर में स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है। यहां सिर्फ वार्डबॉय ही तैनात है। पूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। वार्डबॉय ने बताया कि दवा मंगा भी लें तो रखने के लिए भी कोई जगह नहीं है। बरसात में छत से पानी टपकता है।
उपकेंद्र ग्राम सुनाव : यहां बिल्डिंग तो बनी है, मगर मरीजों को इलाज आज तक नहीं मिला। कई वर्ष बीत गए, लेकिन चिकित्सक एवं कोई स्टाफ तैनात नहीं किया गया है।
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उपकेंद्र प्रतापपुर:सिर्फ फार्मासिस्ट तैनात है। यहां खांसी, जुकाम की दवा भी नहीं मिलती है। ग्रामीण कहते हैं कि यह स्वास्थ्य केंद्र नाम मात्र के लिए है।
पीएचसी फरिहा: यहां स्वास्थ्य सुविधाएं रामभरोसे चलती हैं। यहां चिकित्सक नियमित नहीं आते हैं। एक फार्मासिस्ट तैनात है। प्रसव की कोई सुविधा नहीं है।
1508 प्रसूताओं को जेएएसवाई का नहीं हुआ भुगतान
30 जून तक एकत्रित की गई रिपोर्ट के अनुसार मार्च से जून 5856 प्रसव हुए थे। मगर 1508 प्रसूताओं को जेएएसवाई योजना का भुगतान नहीं किया गया। जबकि बेड पर ही भुगतान करने के आदेश हैं। लाभार्थी स्वास्थ्य केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
वैसे तो जिला अस्पताल, स्टाफ तहसील स्तर का
सन् 1989 में फीरोजाबाद जिला बना था। उससे पहले यह तहसील थी और उस समय अस्पताल भी तहसील स्तर का ही था। उसके बाद अस्पताल जिला स्तर हो गया लेकिन स्टाफ की तैनाती तहसील स्तर की ही रही। मानकों के हिसाब पर 10 बिस्तरों पर भर्ती मरीज की देखभाल को चार स्टाफ नर्स, चार सफाई कर्मचारी एवं चिकित्सक तैनात होने चाहिए। लेकिन इस मानक के मुकाबले बहुत कम स्टाफ है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकडे़
सीएचसी 7
ब्लाक पीएचसी 5
एडिशनल पीएचसी 52
एंबुलेंस 102 24
एंबुलेंस 108 20
लेवल स्वीकृत कार्यरत रिक्त
फर्स्ट 78 47 31
सेकेंड 11 15
थर्ड 22 7 15
फोर्थ 14 09 05
बिना चिकित्सकों के चल रहे ये नवीन उपकेंद्र
नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुशियारी, भौंडेला, चुल्हावली, कच्चा टूंडला, नगला सिंधी, रसूलपुर बझेरा, ओखरा, बसई मुहम्मदपुर, दबरई, कुर्रीकूपा, रींवा, हाथवंत, नगला गढूआ, पेंडत, उडेसर, पिलखतर, सुराया, सैफपुर, भनुपुरा, हुसैनपुर बैजुआ, करहरा, नगला गुलाल, बलीपुर, कठफोरी, आटेपुर, भांडरी।
क्या कहते हैं मरीज
कठफोरी नवीन स्वास्थ्य केंद्र पर आए भूपसिंह ने कहा कि तीन दिन से खांसी की दवा को आ रहे हैं। मगर यहां सीरप है ना ही गोली।
क्या कहते हैं अधिकारी
हम सिर्फ चिकित्सक एवं स्टाफ की डिमांड शासन को भेज सकते हैं। स्वीकृति करना शासन का काम है। हमारे यहां स्टाफ की कमी हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का कार्य हम करेंगे।
डा. पुष्कर आनंद
मुख्य चिकित्साधिकारी
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रखने ही जगह हो दवाएं मंगाए
कठफोरी : पंचायत घर में स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है। यहां सिर्फ वार्डबॉय ही तैनात है। पूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। वार्डबॉय ने बताया कि दवा मंगा भी लें तो रखने के लिए भी कोई जगह नहीं है। बरसात में छत से पानी टपकता है।
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उपकेंद्र ग्राम सुनाव : यहां बिल्डिंग तो बनी है, मगर मरीजों को इलाज आज तक नहीं मिला। कई वर्ष बीत गए, लेकिन चिकित्सक एवं कोई स्टाफ तैनात नहीं किया गया है।
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उपकेंद्र प्रतापपुर:सिर्फ फार्मासिस्ट तैनात है। यहां खांसी, जुकाम की दवा भी नहीं मिलती है। ग्रामीण कहते हैं कि यह स्वास्थ्य केंद्र नाम मात्र के लिए है।
पीएचसी फरिहा: यहां स्वास्थ्य सुविधाएं रामभरोसे चलती हैं। यहां चिकित्सक नियमित नहीं आते हैं। एक फार्मासिस्ट तैनात है। प्रसव की कोई सुविधा नहीं है।
1508 प्रसूताओं को जेएएसवाई का नहीं हुआ भुगतान
30 जून तक एकत्रित की गई रिपोर्ट के अनुसार मार्च से जून 5856 प्रसव हुए थे। मगर 1508 प्रसूताओं को जेएएसवाई योजना का भुगतान नहीं किया गया। जबकि बेड पर ही भुगतान करने के आदेश हैं। लाभार्थी स्वास्थ्य केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
वैसे तो जिला अस्पताल, स्टाफ तहसील स्तर का
सन् 1989 में फीरोजाबाद जिला बना था। उससे पहले यह तहसील थी और उस समय अस्पताल भी तहसील स्तर का ही था। उसके बाद अस्पताल जिला स्तर हो गया लेकिन स्टाफ की तैनाती तहसील स्तर की ही रही। मानकों के हिसाब पर 10 बिस्तरों पर भर्ती मरीज की देखभाल को चार स्टाफ नर्स, चार सफाई कर्मचारी एवं चिकित्सक तैनात होने चाहिए। लेकिन इस मानक के मुकाबले बहुत कम स्टाफ है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकडे़
सीएचसी 7
ब्लाक पीएचसी 5
एडिशनल पीएचसी 52
एंबुलेंस 102 24
एंबुलेंस 108 20
लेवल स्वीकृत कार्यरत रिक्त
फर्स्ट 78 47 31
सेकेंड 11 15
थर्ड 22 7 15
फोर्थ 14 09 05
बिना चिकित्सकों के चल रहे ये नवीन उपकेंद्र
नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुशियारी, भौंडेला, चुल्हावली, कच्चा टूंडला, नगला सिंधी, रसूलपुर बझेरा, ओखरा, बसई मुहम्मदपुर, दबरई, कुर्रीकूपा, रींवा, हाथवंत, नगला गढूआ, पेंडत, उडेसर, पिलखतर, सुराया, सैफपुर, भनुपुरा, हुसैनपुर बैजुआ, करहरा, नगला गुलाल, बलीपुर, कठफोरी, आटेपुर, भांडरी।
क्या कहते हैं मरीज
कठफोरी नवीन स्वास्थ्य केंद्र पर आए भूपसिंह ने कहा कि तीन दिन से खांसी की दवा को आ रहे हैं। मगर यहां सीरप है ना ही गोली।
क्या कहते हैं अधिकारी
हम सिर्फ चिकित्सक एवं स्टाफ की डिमांड शासन को भेज सकते हैं। स्वीकृति करना शासन का काम है। हमारे यहां स्टाफ की कमी हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का कार्य हम करेंगे।
डा. पुष्कर आनंद
मुख्य चिकित्साधिकारी