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गुजरात से आए प्रवासी मजदूरों को आश्रय स्थल पर न भोजन मिला न पानी
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जैन मंदिर स्थित आश्रय स्थल में अपने बच्चों और परिवार के साथ भूंखा सुलाने के साथ ही सुबह अपना दर्ज ?
- फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। लॉकडाउन के बीच अपने शहर लौट रहे प्रवासी मजदूरों को बुधवार रात आश्रय स्थल पर अनदेखी का शिकार होना पड़ा। रात में उन्हें न तो भोजन मिला और न ही पीने के लिए पानी। आक्रोशित मजदूरों ने सुबह प्रशासन द्वारा आश्रय स्थल पर भेजे गए भोजन के पैकेट लेने से इंकार कर दिया।
शिकोहाबाद थाना क्षेत्र के गांव नगला कुंदन निवासी प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि गुजरात के बड़ोदरा में काम करने वाले करीब 11 प्रवासी मजदूरों के साथ वह बुधवार रात करीब 11 बजे रोडवेज बस द्वारा सुभाष तिराहा स्थित जैन मंदिर में प्रशासन द्वारा बनाए गए आश्रय स्थल पर पहुंचे थे। यहां प्रशासन द्वारा मजदूर और उनके बच्चों के लिए न तो भोजन की व्यवस्था की गई और न ही पीने के पानी की। ऐसे में भूख और प्यास से परेशान हम लोगों को खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ी। भोजन की व्यवस्था न होने के कारण बच्चे रात भर परेशान रहे। आश्रय स्थल पर कर्मचारियों का व्यवहार काफी अपमानित करने वाला था। जानकारी पर बृहस्पतिवार सुबह मजदूरों को प्रशासन द्वारा आश्रय स्थल से घर भेजते समय भोजन के पैकेट आदि दिए गए लेकिन मजदूरों ने इनको लेने से इनकार कर दिया और अपने घर चले गए।
तीन घंटे तक जिला मुख्यालय पर भटकते रहे मजदूर
प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि हम लोग बस द्वारा पहले जिला मुख्यालय पहुंचे। यहां तीन घंटे तक पता करते रहे कि शिकोहाबाद ब्लॉक का आश्रयस्थल कहां पर बनाया गया है? अधिकारी और कर्मचारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे थे। बाद में एसडीएम से बात करने के बाद बस चालक हम लोगों को रात 11 बजे जैन मंदिर लेकर पहुंचा। जांच कराने के लिए भी अधिकारियों से कहा गया। इसके बाद जांच हो सकी।
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साइकिल चलाकर पहुंचे प्रवासी मजदूर ने नगर निगम में कराई जांच
उत्तर थाना क्षेत्र के मोहल्ला टापाकलां निवासी महेश नोएडा में मजदूरी करता है। महेश ने बताया कि वह 10 मई को नोएडा से साइकिल द्वारा बृहस्पतिवार सुबह छह बजे फिरोजाबाद पहुंचा। परिजनों को फोन कर बस स्टैंड पर ही बुला लिया। उसने बताया कि उसने प्रशासन को सूचना दी और जांच कराने के लिए कहा लेकिन दोपहर 12 बजे तक न तो किसी भी प्रशासनिक अधिकारी का संतोषजनक जवाब मिला और न ही जांच करने के लिए कहीं कोई स्थान आदि की जानकारी दी गई। परिवार के साथ करीब छह घंटे भटकने के बाद नगर निगम पहुंचकर थर्मल स्क्रीनिंग और फोटोग्राफी कराई गई।
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शिकोहाबाद थाना क्षेत्र के गांव नगला कुंदन निवासी प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि गुजरात के बड़ोदरा में काम करने वाले करीब 11 प्रवासी मजदूरों के साथ वह बुधवार रात करीब 11 बजे रोडवेज बस द्वारा सुभाष तिराहा स्थित जैन मंदिर में प्रशासन द्वारा बनाए गए आश्रय स्थल पर पहुंचे थे। यहां प्रशासन द्वारा मजदूर और उनके बच्चों के लिए न तो भोजन की व्यवस्था की गई और न ही पीने के पानी की। ऐसे में भूख और प्यास से परेशान हम लोगों को खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ी। भोजन की व्यवस्था न होने के कारण बच्चे रात भर परेशान रहे। आश्रय स्थल पर कर्मचारियों का व्यवहार काफी अपमानित करने वाला था। जानकारी पर बृहस्पतिवार सुबह मजदूरों को प्रशासन द्वारा आश्रय स्थल से घर भेजते समय भोजन के पैकेट आदि दिए गए लेकिन मजदूरों ने इनको लेने से इनकार कर दिया और अपने घर चले गए।
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तीन घंटे तक जिला मुख्यालय पर भटकते रहे मजदूर
प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि हम लोग बस द्वारा पहले जिला मुख्यालय पहुंचे। यहां तीन घंटे तक पता करते रहे कि शिकोहाबाद ब्लॉक का आश्रयस्थल कहां पर बनाया गया है? अधिकारी और कर्मचारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे थे। बाद में एसडीएम से बात करने के बाद बस चालक हम लोगों को रात 11 बजे जैन मंदिर लेकर पहुंचा। जांच कराने के लिए भी अधिकारियों से कहा गया। इसके बाद जांच हो सकी।
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साइकिल चलाकर पहुंचे प्रवासी मजदूर ने नगर निगम में कराई जांच
उत्तर थाना क्षेत्र के मोहल्ला टापाकलां निवासी महेश नोएडा में मजदूरी करता है। महेश ने बताया कि वह 10 मई को नोएडा से साइकिल द्वारा बृहस्पतिवार सुबह छह बजे फिरोजाबाद पहुंचा। परिजनों को फोन कर बस स्टैंड पर ही बुला लिया। उसने बताया कि उसने प्रशासन को सूचना दी और जांच कराने के लिए कहा लेकिन दोपहर 12 बजे तक न तो किसी भी प्रशासनिक अधिकारी का संतोषजनक जवाब मिला और न ही जांच करने के लिए कहीं कोई स्थान आदि की जानकारी दी गई। परिवार के साथ करीब छह घंटे भटकने के बाद नगर निगम पहुंचकर थर्मल स्क्रीनिंग और फोटोग्राफी कराई गई।