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लोहिया गांवों में नहीं हुआ विकास
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Thu, 03 Mar 2016 11:00 PM IST
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डा.राममनोहर लोहिया समग्र ग्राम्य विकास योजना में चयनित गांवों में समस्याओं का अंबार है। सदर ब्लाक के मोहम्मदपुर बिहारीपुर गांव का डा.राममनोहर लोहिया समग्र विकास योजना में चयन वर्ष 2015-16 में हुआ। वित्तीय वर्ष के समापन में करीब एक माह शेष रह गया है। निषाद बाहुल्य इस गांव में विकास नहीं हो सका।
फतेहाबाद रोड से जाने को रास्ता कच्चा बना दिया। झोपड़ी में रहकर जीवन गुजारने वाली विधवा मुन्नीदेवी तक को लोहिया आवास का पात्र नहीं माना। पति वीरनरायन की मौत चार माह पूर्व हो गई थी। चार बेटे-बेटियों (कन्हैया, राहुल व रूबी एवं आरती) का बोझ मुन्नी पर है। चूड़ी की फड़ लगाकर वह जीवनयापन कर रही हैं। लोहिया आवास की बात चली तो आंखें भर आईं। बोली ऊपर वाले ने ही न्याय नहीं किया तो अधिकारियों से क्या उम्मीद है। दिव्यांग कमलेश देवी पत्नी दलवीर सिंह, मान सिंह, जयप्रकाश हरी सिंह, श्यामा देवी के परिवार झोपड़ी में जीवन गुजारने को विवश हैं। इस गांव के दिव्यांग सोबरन ने बताया पानी ट्राईसाइकिल वा रखकर आसफाबाद के करीब से लाते हैं। गांव में पीने का पानी ही नहीं है। पत्नी मीरादेवी दोनों पैरों से विकलांग है। उसे तो लोहिया आवास मिला लेकिन काम अधूरा रुकवा दिया। अतर सिंह व राजेंद्र के मकान के पास लगे हैंडपंप खराब हैं। जनक सिंह के मकान के पास बना शौचालय टूट गया। प्रयाग देवी ने कहा कि उसका शौचालय बिना दीवाल खड़े किए ही बनाया। घटिया ईंटों और सीमेंट का प्रयोग किया। रामलली देवी भी परेशान थीं। बिजली का ट्रांसफार्मर पिछले कई दिनों से खराब है। ग्रामीणों को सोलर लाइटों का इंतजार है। बुुजुर्ग गंगा देवी व भगवान देवी को वृद्धावस्था पेंशन तक नहीं दी गई।
ग्रामीण बोले समस्याएं हावी
शौचालयों के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया है। लोहिया आवास उन्हें दिए जो सुविधा संपन्न हैं, हैंडपंप खराब हो गए। पानी का संकट है। कोई सुनने वाला तक नहीं हैं।
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हाकिम सिंह निषाद
लोहिया गांव में चयन हुआ इसकी खुशी सभी को हुई, पर विकास कार्य उम्मीद से काफी कम कराए गए। बिजली व पानी के लिए पूरा गांव तरसता है। गलियां नहीं बनीं, बारिश में पूरा गांव दल-दल बन जाता है।
पप्पू निषाद
लोहिया गांव की गलियां पक्की होती हैं, बुजुर्गों को पेंशन मिलती है लेकिन हमारे गांव में नहीं हुआ। कैसा लोहिया गांव है। कोई सुनवाई नहीं होती है।
गंगा देवी
लोहिया गांव बनने के बाद शौचालय को छोड़ दें तो कोई विकास कार्य नहीं हुआ। गरीबों को कुछ तो मिले। झोपड़ी में रहने वालों को आवास मिलना चाहिए लेकिन यहां तो वह भी नहीं मिले।
चरन सिंह
लोहिया गांव होने के कारण समूचे गांव के विकास को प्रयासरत हूं। कुछ लोग लोहिया आवास से छूटे हुए हैं मेरी ओर से उनके नाम भेजे गए थे। सोलर लाइटें गांव को मिली हैं इनको भी लगाया जा रहा है। बिना भेदभाव के ही गांव का विकास होगा।
रामब्रेश प्रधान मोहम्मदपुर बिहारीपुर।
लोहिया गांव का समग्र विकास कराया जा रहा है। गांव में टीम भेजकर लोहिया आवास के पात्रों का चयन होता है। यदि कोई पात्र वंचित रहा है तो दोबारा टीम भेजकर जांच कराएंगे। पात्र यदि अवशेष तो उसको लाभान्वित किया जाएगा।
सुजीत कुमार सीडीओ फीरोजाबाद।
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फतेहाबाद रोड से जाने को रास्ता कच्चा बना दिया। झोपड़ी में रहकर जीवन गुजारने वाली विधवा मुन्नीदेवी तक को लोहिया आवास का पात्र नहीं माना। पति वीरनरायन की मौत चार माह पूर्व हो गई थी। चार बेटे-बेटियों (कन्हैया, राहुल व रूबी एवं आरती) का बोझ मुन्नी पर है। चूड़ी की फड़ लगाकर वह जीवनयापन कर रही हैं। लोहिया आवास की बात चली तो आंखें भर आईं। बोली ऊपर वाले ने ही न्याय नहीं किया तो अधिकारियों से क्या उम्मीद है। दिव्यांग कमलेश देवी पत्नी दलवीर सिंह, मान सिंह, जयप्रकाश हरी सिंह, श्यामा देवी के परिवार झोपड़ी में जीवन गुजारने को विवश हैं। इस गांव के दिव्यांग सोबरन ने बताया पानी ट्राईसाइकिल वा रखकर आसफाबाद के करीब से लाते हैं। गांव में पीने का पानी ही नहीं है। पत्नी मीरादेवी दोनों पैरों से विकलांग है। उसे तो लोहिया आवास मिला लेकिन काम अधूरा रुकवा दिया। अतर सिंह व राजेंद्र के मकान के पास लगे हैंडपंप खराब हैं। जनक सिंह के मकान के पास बना शौचालय टूट गया। प्रयाग देवी ने कहा कि उसका शौचालय बिना दीवाल खड़े किए ही बनाया। घटिया ईंटों और सीमेंट का प्रयोग किया। रामलली देवी भी परेशान थीं। बिजली का ट्रांसफार्मर पिछले कई दिनों से खराब है। ग्रामीणों को सोलर लाइटों का इंतजार है। बुुजुर्ग गंगा देवी व भगवान देवी को वृद्धावस्था पेंशन तक नहीं दी गई।
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ग्रामीण बोले समस्याएं हावी
शौचालयों के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया है। लोहिया आवास उन्हें दिए जो सुविधा संपन्न हैं, हैंडपंप खराब हो गए। पानी का संकट है। कोई सुनने वाला तक नहीं हैं।
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हाकिम सिंह निषाद
लोहिया गांव में चयन हुआ इसकी खुशी सभी को हुई, पर विकास कार्य उम्मीद से काफी कम कराए गए। बिजली व पानी के लिए पूरा गांव तरसता है। गलियां नहीं बनीं, बारिश में पूरा गांव दल-दल बन जाता है।
पप्पू निषाद
लोहिया गांव की गलियां पक्की होती हैं, बुजुर्गों को पेंशन मिलती है लेकिन हमारे गांव में नहीं हुआ। कैसा लोहिया गांव है। कोई सुनवाई नहीं होती है।
गंगा देवी
लोहिया गांव बनने के बाद शौचालय को छोड़ दें तो कोई विकास कार्य नहीं हुआ। गरीबों को कुछ तो मिले। झोपड़ी में रहने वालों को आवास मिलना चाहिए लेकिन यहां तो वह भी नहीं मिले।
चरन सिंह
लोहिया गांव होने के कारण समूचे गांव के विकास को प्रयासरत हूं। कुछ लोग लोहिया आवास से छूटे हुए हैं मेरी ओर से उनके नाम भेजे गए थे। सोलर लाइटें गांव को मिली हैं इनको भी लगाया जा रहा है। बिना भेदभाव के ही गांव का विकास होगा।
रामब्रेश प्रधान मोहम्मदपुर बिहारीपुर।
लोहिया गांव का समग्र विकास कराया जा रहा है। गांव में टीम भेजकर लोहिया आवास के पात्रों का चयन होता है। यदि कोई पात्र वंचित रहा है तो दोबारा टीम भेजकर जांच कराएंगे। पात्र यदि अवशेष तो उसको लाभान्वित किया जाएगा।
सुजीत कुमार सीडीओ फीरोजाबाद।