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Firozabad News: कानूनी त्रुटि से खारिज हुई लॉकर उत्तराधिकार अर्जी, कोर्ट ने कहा-मायका पक्ष अहम

Sat, 26 Sep 2026 11:47 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Sat, 26 Sep 2026 11:47 PM IST
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Locker succession application dismissed due to legal error; Court states maternal family's role is crucial.
सांकेतिक  - फोटो : सांकेतिक
फिरोजाबाद। सत्र अदालत ने एक दिवंगत महिला के एसबीआई बैंक लॉकर का उत्तराधिकार प्रमाणपत्र मांगने पहुंचे पति की अर्जी कानूनी त्रुटि के चलते खारिज कर दिया है। सत्र न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग की कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका में मृतका के मायके पक्ष के कानूनी वारिसों को पक्षकार न बनाकर सिर्फ बैंक मैनेजर को ही विपक्षी बनाना कानूनन गलत है।
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मूल रूप से जसराना तहसील के ग्राम फरिहा (नया बस्ती) और हाल निवासी तेलंगाना के रहने वाले संजीव शर्मा, उनके बेटे रजत शर्मा और एक नाबालिग बेटे ने मई 2024 में जिला अदालत में एक याचिका दाखिल की थी। संजीव शर्मा की पत्नी रश्मि शर्मा का निधन 4 मई 2017 को तेलंगाना में हो गया था। रश्मि का भारतीय स्टेट बैंक की फिरोजाबाद बाईपास रोड स्थित मुख्य शाखा में बैंक खाता और लॉकर नंबर 111 था। लॉकर में कोई नॉमिनी दर्ज नहीं था। जब परिजन लॉकर का संचालन करने बैंक पहुंचे, तो बैंक ने कोर्ट से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र लाने की शर्त रखी थी।
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अदालत ने एडवोकेट कमिशनर की मौजूदगी में बैंक लॉकर को खुलवाया। सामान, आभूषणों व दस्तावेज की सूची तैयार कराई गई और उनका सरकारी मूल्यांकन भी कराया। मामले के निस्तारण के दौरान जिला जज डॉ. बब्बू सारंग ने पाया कि आवेदकों ने याचिका में केवल एसबीआई बैंक के शाखा प्रबंधक को ही विपक्षी पक्षकार बनाया है। अदालत ने आदेश में साफ किया कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार दिवंगत महिला के अन्य निकटतम कानूनी वारिसों जैसे कि उनके माता-पिता या भाई-बहन (मायका पक्ष) को भी याचिका में पक्षकार बनाना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि बैंक केवल लॉकर की सामग्री का कस्टोडियन या संरक्षक (ट्रस्टी) होता है, उसे इस मामले का मुख्य विरोधी या एकमात्र पक्षकार नहीं माना जा सकता। आवश्यक पक्षकारों को याचिका में शामिल न करने की प्रक्रियात्मक खामी के कारण अदालत ने मई 2024 से चली आ रही इस याचिका को निरस्त कर दिया।
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