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टूंडला में लॉकडाउन के मायने हुए खत्म, पार्कों व बाजारों में उमड़ने लगी भीड़
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टूंडला के कंपनी बाग मार्ग पर बिना मास्क के मोर्निंग वॉक करने वालों की भीड़
- फोटो : TUNDLA
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टूंडला(फिरोजाबाद)। लॉकडाउन की अवधि बढ़ने के साथ ही टूंडला में इसके मायने खत्म होते जा रहे हैं। लगभग दो माह होने को हैं। ऐसे में अब लोग घरों से बाहर निकलकर लॉकडाउन का उल्लंघन करने से परहेज नहीं कर रहे। पार्कों में सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष व बच्चे पहुंच रहे हैं, वहीं बाजारों में भीड़ देखने को मिल रही है। इतना ही नहीं 70 प्रतिशत से अधिक लोग न तो मास्क पहन रहे और न ही सोशल डिस्टेंस का कोई ख्याल रख रहे हैं। इससे कोराना का खतरा बढ़ सकता है।
लॉकडाउन को धीरे-धीरे दो माह होने को हैं। ऐसे में अब लोगों के सब्र का बांध भी टूटने लगा है। सुबह साढ़े चार बजे से ही लोग टहलने के लिए निकलने लगे हैं। पार्क व उसके इर्द-गिर्द सैकड़ों की संख्या में पहुंच रहे हैं। ऐसे लोगों का कहना है कि टूंडला में कोरोना नहीं है। घर में रहते-रहते उनकी सेहत और अधिक खराब होने लगी है। सुबह न टहलने से बीपी और डायबिटीज का खतरा बढ़ गया है। टहलने से काफी आराम रहता है। ऐसे में वह टहलने निकल आते हैं।
यही हाल सुबह के समय बाजार में रहता है। बाजार में भी काफी संख्या में लोग टहलने निकल आते हैं। कुछ तो मेडिकल स्टोरों से दवाएं खरीदने आते हैं तो कुछ सिर्फ दवा खरीदने के बहाने ही घरों से दवा के पर्चे लेकर निकल कर टहलते हैं। इतना ही नहीं 70 प्रतिशत लोग न तो मास्क पहन रहे और न ही सोशल डिस्टेंस का पालन कर रहे हैं। ऐसे में अब प्रतिदिन लॉकडाउन की धजिज्जयां तो उड़ ही रही हैं। कोरोना का खतरा भी बढ़ रहा है।
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लॉकडाउन को धीरे-धीरे दो माह होने को हैं। ऐसे में अब लोगों के सब्र का बांध भी टूटने लगा है। सुबह साढ़े चार बजे से ही लोग टहलने के लिए निकलने लगे हैं। पार्क व उसके इर्द-गिर्द सैकड़ों की संख्या में पहुंच रहे हैं। ऐसे लोगों का कहना है कि टूंडला में कोरोना नहीं है। घर में रहते-रहते उनकी सेहत और अधिक खराब होने लगी है। सुबह न टहलने से बीपी और डायबिटीज का खतरा बढ़ गया है। टहलने से काफी आराम रहता है। ऐसे में वह टहलने निकल आते हैं।
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यही हाल सुबह के समय बाजार में रहता है। बाजार में भी काफी संख्या में लोग टहलने निकल आते हैं। कुछ तो मेडिकल स्टोरों से दवाएं खरीदने आते हैं तो कुछ सिर्फ दवा खरीदने के बहाने ही घरों से दवा के पर्चे लेकर निकल कर टहलते हैं। इतना ही नहीं 70 प्रतिशत लोग न तो मास्क पहन रहे और न ही सोशल डिस्टेंस का पालन कर रहे हैं। ऐसे में अब प्रतिदिन लॉकडाउन की धजिज्जयां तो उड़ ही रही हैं। कोरोना का खतरा भी बढ़ रहा है।
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