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लॉकडाउन में याद आ रहा बाजार का चटपटा नाश्ता
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फिरोजाबाद। लॉकडाउन के दौरान लोगों का खानपान भी काफी प्रभावित हुआ है। शहर के लोग सुबह का नाश्ता अक्सर बाजार में ही करते थे। कचौड़ी, जलेबी, बेढ़ई आदि के नाश्ता की लोगों को बहुत याद आ रही है। मजबूरी में लोग घरों में चना, छोले आदि बनाकर नाश्ता कर रहे हैं।
चूड़ियों के शहर में 100 से अधिक नाश्ते की दुकानें है। सैकड़ों ठेलों पर भी तरह-तरह का नाश्ते मिलता था। नाश्ते में बेढ़ई, कचौडी और जलेबी खूब बिकती थी। आम दिनों में दुकान और ठेलों पर सुबह से ही भीड़ लगनी शुरू हो जाती थी। दोपहर बाद इन्हीं दुकानों और ठेलों पर समौसे और ब्रेड पकौड़ा भी खूब बिकते थे।
हनुमान रोड, घंटाघर चौराहा, सिनेमा चौराहा, बस स्टैंड, गांधी पार्क चौराहा, जाटवपुरी चौराहा, छोटा चौराहा, जलेसर रोड आदि जगह पर सुबह-सुबह नाश्ता करने वालों की भीड़ दिखती थी। लेकिन अब लॉकडाउन में इन दुकानों पर ताले लगे हुए हैं। वहीं लोग भी घरों में कैद हैं। कुछ लोग तो सुबह नाश्ते में घर पर ही कचौड़ी आदि बनवाकर चटकारे ले रहे हैं तो कुछ चना, छोले और पराठा सब्जी का नाश्ता कर रहे हैं। लेकिन उन्हें बाजार के चटपटे नाश्ते की कमी खूब खल रही है।
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अब तो जो मिल जाता है उसी से पेट भर लेते हैं
दोस्तों के साथ रोजाना सुबह नाश्ता करते थे। लेकिन जब से लॉकडाउन हुआ है, न तो दोस्तों से मिल पा रहे हैं और न ही नाश्ता मिल रहा है। घर पर जो बन जाता है उसी से पेट लेते हैं।
शुभ चौरसिया, जलेसर रोड
सप्ताह में पांच दिन सुबह कचौड़ी का नाश्ता करते थे। जब से लॉकडाउन लगा है, चटपटा नाश्ता नहीं मिला है। मजबूरी में घर पर ही चना, छोले बनाकर का नाश्ता काम चला रहे हैं।
विशाल वार्ष्णेय, लाजपत कुंज
बिना आय दुकान का किराया, मजदूरी दे रहे
दुकान बंद होने से दिक्कत हो रही है। दुकान का किराया और लेबर की मजदूरी देनी है। ऐसे वक्त में लेबर का साथ नहीं दिया तो कब देंगे। खर्चे में कोई कमी नहीं की जा सकती। लेकिन आय दो पैसे की नहीं है।
नीरज कुमार, कचौड़ी विक्रेता
डेढ़ महीने से दुकान बंद पड़ी है। बैंक से पैसे निकाल कर मजदूरों को दिए हैं। ताकि वे लोग परेशान न हों। कारोबार आज नहीं तो कल शुरू होगा। ऐसे वक्त में सभी का साथ देना चाहिए।
चंचल गुप्ता, कचौड़ी-जलेबी विक्रेता
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चूड़ियों के शहर में 100 से अधिक नाश्ते की दुकानें है। सैकड़ों ठेलों पर भी तरह-तरह का नाश्ते मिलता था। नाश्ते में बेढ़ई, कचौडी और जलेबी खूब बिकती थी। आम दिनों में दुकान और ठेलों पर सुबह से ही भीड़ लगनी शुरू हो जाती थी। दोपहर बाद इन्हीं दुकानों और ठेलों पर समौसे और ब्रेड पकौड़ा भी खूब बिकते थे।
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हनुमान रोड, घंटाघर चौराहा, सिनेमा चौराहा, बस स्टैंड, गांधी पार्क चौराहा, जाटवपुरी चौराहा, छोटा चौराहा, जलेसर रोड आदि जगह पर सुबह-सुबह नाश्ता करने वालों की भीड़ दिखती थी। लेकिन अब लॉकडाउन में इन दुकानों पर ताले लगे हुए हैं। वहीं लोग भी घरों में कैद हैं। कुछ लोग तो सुबह नाश्ते में घर पर ही कचौड़ी आदि बनवाकर चटकारे ले रहे हैं तो कुछ चना, छोले और पराठा सब्जी का नाश्ता कर रहे हैं। लेकिन उन्हें बाजार के चटपटे नाश्ते की कमी खूब खल रही है।
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अब तो जो मिल जाता है उसी से पेट भर लेते हैं
दोस्तों के साथ रोजाना सुबह नाश्ता करते थे। लेकिन जब से लॉकडाउन हुआ है, न तो दोस्तों से मिल पा रहे हैं और न ही नाश्ता मिल रहा है। घर पर जो बन जाता है उसी से पेट लेते हैं।
शुभ चौरसिया, जलेसर रोड
सप्ताह में पांच दिन सुबह कचौड़ी का नाश्ता करते थे। जब से लॉकडाउन लगा है, चटपटा नाश्ता नहीं मिला है। मजबूरी में घर पर ही चना, छोले बनाकर का नाश्ता काम चला रहे हैं।
विशाल वार्ष्णेय, लाजपत कुंज
बिना आय दुकान का किराया, मजदूरी दे रहे
दुकान बंद होने से दिक्कत हो रही है। दुकान का किराया और लेबर की मजदूरी देनी है। ऐसे वक्त में लेबर का साथ नहीं दिया तो कब देंगे। खर्चे में कोई कमी नहीं की जा सकती। लेकिन आय दो पैसे की नहीं है।
नीरज कुमार, कचौड़ी विक्रेता
डेढ़ महीने से दुकान बंद पड़ी है। बैंक से पैसे निकाल कर मजदूरों को दिए हैं। ताकि वे लोग परेशान न हों। कारोबार आज नहीं तो कल शुरू होगा। ऐसे वक्त में सभी का साथ देना चाहिए।
चंचल गुप्ता, कचौड़ी-जलेबी विक्रेता