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Firozabad News: अपहरण कर हत्या के दोषी को आजीवन कारावास
Wed, 16 Oct 2024 01:23 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Wed, 16 Oct 2024 01:23 AM IST
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फिरोजाबाद। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या द्वितीय एवं विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र सर्वेश कुमार पांडेय ने नौ वर्ष पुराने अपहरण कर हत्या के मामले में पुनीत कुमार को दोषी करार करते हुए आजीवन कारावास एवं एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। मामला थाना एका क्षेत्र का है। वादी संजीव कुमार गुप्ता ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा कि उसका बेटा रितिक 28 अक्तूबर 2015 को शाम से दुकान से लापता हो गया। उसकी दुकान पर उसके मोबाइल फोन पर एक फोन शाम 4:33 बजे आया, जिसमें फोन करने वाले ने अपने आप को उसके बेटे का सर बताया एवं उससे बात कराने के लिए कहा। उसके आने पर बात कराने की कहकर फोन काट दिया। कुछ समय बाद उसका पुत्र आया और फोन आने वाले से 5-7 मिनट बातचीत करके मोबाइल काउंटर पर रखकर बिना बताए चला गया।
उसका पुत्र कक्षा आठ का छात्र है और उम्र करीब 13 वर्ष है। फोन करने वाले व्यक्ति पर उसके पुत्र के अपहरण की आशंका जताई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना उपरांत पुनीत कुमार एवं विकास उर्फ विक्का के विरुद्ध अपहृण के मामले में आरोप पत्र दाखिल किया। इसी दौरान 20 सितंबर 2017 को शासन द्वारा प्रकरण की विवेचना सीबीसीआईडी को सौंपी, जिसने भी उपरोक्त आरोप में आरोप पत्र न्यायालय प्रेषित किया। जांच में पता चला कि फिरौती न मिलने पर आरोपियों ने किशोर की हत्या कर दी थी।
दोषी पुनीत कुमार न्यायालय हाजिर आया। न्यायालय ने आरोप लगाया जिसने आरोप से इन्कार करते हुए सत्र परीक्षण की मांग की। न्यायालय में आठ गवाहों ने गवाही दी। विशेष न्यायाधीश सर्वेश कुमार पांडेय ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध तमाम साक्ष्य का गहनता से अध्ययन करने के बाद पुनीत कुमार को दोषी पाते हुए खुले न्यायालय में सजा सुनाई।
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उसका पुत्र कक्षा आठ का छात्र है और उम्र करीब 13 वर्ष है। फोन करने वाले व्यक्ति पर उसके पुत्र के अपहरण की आशंका जताई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना उपरांत पुनीत कुमार एवं विकास उर्फ विक्का के विरुद्ध अपहृण के मामले में आरोप पत्र दाखिल किया। इसी दौरान 20 सितंबर 2017 को शासन द्वारा प्रकरण की विवेचना सीबीसीआईडी को सौंपी, जिसने भी उपरोक्त आरोप में आरोप पत्र न्यायालय प्रेषित किया। जांच में पता चला कि फिरौती न मिलने पर आरोपियों ने किशोर की हत्या कर दी थी।
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दोषी पुनीत कुमार न्यायालय हाजिर आया। न्यायालय ने आरोप लगाया जिसने आरोप से इन्कार करते हुए सत्र परीक्षण की मांग की। न्यायालय में आठ गवाहों ने गवाही दी। विशेष न्यायाधीश सर्वेश कुमार पांडेय ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध तमाम साक्ष्य का गहनता से अध्ययन करने के बाद पुनीत कुमार को दोषी पाते हुए खुले न्यायालय में सजा सुनाई।
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