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Firozabad News: महंगाई और अधिकमास ने थामी चूड़ी बाजार की रफ्तार
Mon, 25 May 2026 11:29 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Mon, 25 May 2026 11:29 PM IST
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फिरोजाबाद। पेट्रोल डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर चूड़ी उद्योग पर भी पड़ रहा है। लगातार बढ़ती कीमतों और कच्चे माल की महंगाई ने लागत बढ़ा दी है। वहीं दूसरी ओर धार्मिक लिहाज से अधिकमास लगने के कारण बाजारों में मांग बेहद कमजोर बनी हुई है। यही कारण है कि देश भर से आने वाले चूड़ी के बड़े ऑर्डर इस बार मिल नहीं रहे हैं।
चूड़ी उद्योग से जुड़े प्रमुख गोदाम संचालक निशांक अग्रवाल और आनंद अग्रवाल ने बताया कि सामान्य तौर पर मई के इस अंतिम सप्ताह और जून की शुरुआत तक चूड़ी बाजार में सावन, रक्षाबंधन और दिवाली तक के थोक ऑर्डर बुक हो जाते थे। कारखाने और गोदाम एडवांस माल तैयार करने में जुट जाते थे। इस वर्ष दक्षिण भारत, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बाहरी प्रदेशों के साथ-साथ यूपी के अन्य जिलों के बड़े खरीदार भी बाजार से दूरी बनाए हुए हैं। वे इस इंतजार में हैं कि जब महंगाई थोड़ी कम होगी और माल के दाम घटेंगे, तब वे खरीदारी शुरू करेंगे। बाजार टूटने की एक बड़ी वजह हाल ही में बढ़ा मालभाड़ा भी है। पिछले 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने भाड़ा बढ़ा दिया है। फिरोजाबाद से देश के अन्य राज्यों में माल भेजने का खर्च बढ़ने से कांच की चूड़ियों की लैंडिंग कॉस्ट (पहुंच लागत) बढ़ गई है। इससे बाहर के व्यापारियों के लिए माल महंगा पड़ रहा है और वे स्थानीय स्तर पर ऑर्डर देने में हिचक रहे हैं।
चूड़ी कारोबारियों का कहना है कि अधिकमास के दौरान मांग सुस्त रहना स्वाभाविक है क्योंकि इस अवधि में मांगलिक और वैवाहिक कार्य बंद रहते हैं। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि जुलाई में सावन की शुरुआत और त्योहारों के नजदीक आते ही बाजारों में एक बार फिर चूड़ी की खनक लौटेगी।
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चूड़ी उद्योग से जुड़े प्रमुख गोदाम संचालक निशांक अग्रवाल और आनंद अग्रवाल ने बताया कि सामान्य तौर पर मई के इस अंतिम सप्ताह और जून की शुरुआत तक चूड़ी बाजार में सावन, रक्षाबंधन और दिवाली तक के थोक ऑर्डर बुक हो जाते थे। कारखाने और गोदाम एडवांस माल तैयार करने में जुट जाते थे। इस वर्ष दक्षिण भारत, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बाहरी प्रदेशों के साथ-साथ यूपी के अन्य जिलों के बड़े खरीदार भी बाजार से दूरी बनाए हुए हैं। वे इस इंतजार में हैं कि जब महंगाई थोड़ी कम होगी और माल के दाम घटेंगे, तब वे खरीदारी शुरू करेंगे। बाजार टूटने की एक बड़ी वजह हाल ही में बढ़ा मालभाड़ा भी है। पिछले 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने भाड़ा बढ़ा दिया है। फिरोजाबाद से देश के अन्य राज्यों में माल भेजने का खर्च बढ़ने से कांच की चूड़ियों की लैंडिंग कॉस्ट (पहुंच लागत) बढ़ गई है। इससे बाहर के व्यापारियों के लिए माल महंगा पड़ रहा है और वे स्थानीय स्तर पर ऑर्डर देने में हिचक रहे हैं।
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चूड़ी कारोबारियों का कहना है कि अधिकमास के दौरान मांग सुस्त रहना स्वाभाविक है क्योंकि इस अवधि में मांगलिक और वैवाहिक कार्य बंद रहते हैं। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि जुलाई में सावन की शुरुआत और त्योहारों के नजदीक आते ही बाजारों में एक बार फिर चूड़ी की खनक लौटेगी।
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