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गैंगरेप मामले की जांच करने आए आईजी
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sat, 21 Feb 2015 11:05 PM IST
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वर्ष 2013 व 2014 में एक युवती के साथ दो बार हुए गैंगरेप और अपहरण के मामले की फाइल एक बार फिर से खोली जाएगी। यह निर्णय आईजी नागरिक सुरक्षा ने पीड़ित और आरोपी पक्ष से वार्ता कर घटनास्थल का निरीक्षण के दौरान कहीं।
मामला एका क्षेत्र के एक गांव से जुड़ा है। वर्ष 2013 के माह नवंबर की पांच से आठ तरीख के बीच युवती के साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया गया था। इसके साथ ही चार मार्च 2014 को अपहरण के बाद गैंगरेप किया गया। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने ग्राम प्रधान के पति सहित करीब आधा दर्जन लोगों के खिलाफ गैंगरेप का मामला तो दर्ज कर लिया लेकिन मुकदमे में एफआर लगा दी गई।
थाना पुलिस से न्याय न मिलने पर युवती परिवारीजनों के साथ आईजी नागरिक सुरक्षा अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर से मिली और घटनाक्रम से अवगत कराया। आईजी अमिताभ ठाकुर सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर के साथ शनिवार को पीड़िता के गांव पहुंचे। यहां उन्होंने आरोपी पक्ष के साथ पीड़िता, परिवारीजनों और ग्रामीणों से पूरे मामले की जानकारी करने के साथ ही दोनों बार के घटनास्थलों का निरीक्षण किया।
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आईजी ने बताया कि पुलिस को इतनी जल्दी मामले में एफआर नहीं लगानी चाहिए। ग्रामीण, परिवारीजनों और पीड़िता के साथ आरोपी पक्ष से जो पूछताछ की गई है, उससे पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए। इसके मामले से शासन के साथ आलाधिकारियों को अवगत कराते हुए फिर से जांच कराने की मांग की जाएगी।
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मामला एका क्षेत्र के एक गांव से जुड़ा है। वर्ष 2013 के माह नवंबर की पांच से आठ तरीख के बीच युवती के साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया गया था। इसके साथ ही चार मार्च 2014 को अपहरण के बाद गैंगरेप किया गया। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने ग्राम प्रधान के पति सहित करीब आधा दर्जन लोगों के खिलाफ गैंगरेप का मामला तो दर्ज कर लिया लेकिन मुकदमे में एफआर लगा दी गई।
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थाना पुलिस से न्याय न मिलने पर युवती परिवारीजनों के साथ आईजी नागरिक सुरक्षा अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर से मिली और घटनाक्रम से अवगत कराया। आईजी अमिताभ ठाकुर सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर के साथ शनिवार को पीड़िता के गांव पहुंचे। यहां उन्होंने आरोपी पक्ष के साथ पीड़िता, परिवारीजनों और ग्रामीणों से पूरे मामले की जानकारी करने के साथ ही दोनों बार के घटनास्थलों का निरीक्षण किया।
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आईजी ने बताया कि पुलिस को इतनी जल्दी मामले में एफआर नहीं लगानी चाहिए। ग्रामीण, परिवारीजनों और पीड़िता के साथ आरोपी पक्ष से जो पूछताछ की गई है, उससे पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए। इसके मामले से शासन के साथ आलाधिकारियों को अवगत कराते हुए फिर से जांच कराने की मांग की जाएगी।