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आधुनिकता की दौड़ में फीका हो रहा होली का रंग

Sun, 05 Mar 2017 11:22 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद Updated Sun, 05 Mar 2017 11:22 PM IST
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Holi colors are faded in the race for modernity
बाजार पर भी होली का खुमार चढ़ने लगा है।
आधुनिकता की दौड़ में अब सुहागनगरी में वर्षों पुरानी आदर्श होली, लोगों में होली को लेकर उत्साह और उमंग कहीं नजर नहीं आता। वर्षों पूर्व यहां ऐतिहासिक होली मनाई जाती थी, जिसकी शुरूआत वसंत पंचमी से ही हो जाती थी। आधुनिकता की दौड़ में रंगों के त्योहार का रंग फीका सा होने लगा है।
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सुहागनगरी में होली का त्योहार ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से मनाया जाता था। बुजुर्गों का कहना है कि फिरोजाबाद में वसंत पंचमी से होली शुरू हो जाती थी। शहर में जगह-जगह होली रखी जाती थी। होली आते ही घर-घर में ढोलक, मंजीरा, झांझर, तबला बाहर निकल आते थे। हर गली-मोहल्ले में होली का गायन होता था। एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक शहर में अलग-अलग स्थानों से डोला निकलते थे। पूर्णमासी के दिन शहर में श्री राधाकृष्ण मंदिर से रंग का डोला निकलता था। इस दुकान बाजार में दुकानदार गुलाबी व बसंती गुलाल घोल कर रखते थे। डोले में शामिल लोगों पर खूब रंग व गुलाल की होली करते थे। खूब ठंडाई छनती थी। रंग मेला गांधीपार्क में जाकर समाप्त होता था।
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वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप चंद्र जैन बताते हैं कि होली के दिनों में घंटाघर पर रात में अक्सर फक्कड़ गायन होता था, जिसमें लोग खासी दिलचस्पी लेते थे। उस समय में व्यक्तिगत रंजिश, छींटाकशी व छेड़छाड़ नहीं होती थी। पड़वा के दिन में शहर में कंस मेला लगता था, जिसमें सैकड़ों लोग उत्साह से भाग लेते थे। दौज के दिन पूरा बाजार सजता था। दुकानों पर सुपारी, इलायची रखते थे। सभी लोग आपस में सौहार्र्द से मिलते थे। वर्षों पूर्व शास्त्री मार्केट में नगर पालिका में भी होली पर लोगों का जमावड़ा होता था।
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कवि चंद्र प्रकाश चंद्र बताते हैं कि अब हर कोई आधुनिकता की दौड़ में भाग रहा है, जिससे शहर से वर्षों पुरानी आदर्श होली नजर नहीं आती। अब होली का पर्व लोगों के लिए महज औपचारिकता बनता जा रहा है।


टेसू के फूलों से भी होती थी होली
सुहाग नगर में टेसू के फूलों से भी होली खूब हुई है। पालिका में जब मनीष असीजा पालिकाध्यक्ष थे तब शहर के प्रमुख लोगों और संस्थाओं के पदाधिकारियों के यहां नगर पालिका की तरफ से टेसू के फूल भिजवाए जाते थे। फूलों के रंग से सुहागनगरी में होली होती थी। नगर पालिका गांधी पार्क में भी टेसू के फूलों से होली की व्यवस्था करती थी।
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