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मंत्री एसपी बघेल को हाईकोर्ट का नोटिस
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद
Updated Sat, 27 May 2017 11:18 PM IST
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एसपी िससिंह बघ्ाेल
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योगी सरकार के मंत्री एसपी सिंह बघेल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फर्जी जाति प्रमाणपत्र लगाकर चुनाव लड़ने के आरोप में उनके खिलाफ हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर कोर्ट ने मंत्री को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आरोप है कि अन्य पिछड़ा वर्ग की गड़ेरिया जाति का होते हुए बघेल ने अनुसूचित जाति धांगर का प्रमाणपत्र बनवाकर टुंडला विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीते।
टुंडला विधानसभा के पूर्व विधायक राकेश बाबू ने चुनाव याचिका दाखिल कर बघेल का निर्वाचन रद्द करने की मांग की है। याचिका पर न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी सुनवाई कर रहे हैं। याची का पक्ष रख रहे अधिवक्ता राकेश गुप्ता का कहना था कि एसपी सिंह बघेल मूल रूप से औरैया के भटपुरा के उमरी गांव के रहने वाले हैं। वह और उनका परिवार पिछड़ा वर्ग की गड़ेरिया जाति से संबंधित है। गडे़रिया, पाल और बघेल उत्तर प्रदेश अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण नियमावली 1994 के शेड्यूल एक में 19वें नंबर पर अधिसूचित है। इसके बावजूद उन्होंने आगरा के पते पर अनुसूचित जाति धांगर/धनगर का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर टुंडला सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से नामांकन किया है। मूल रूप से औरैया के निवासी होने के बावजूद उन्होंने अपना जाति प्रमाणपत्र एमआईजी 44 न्यू शाहगंज आगरा के पते पर बनवाया है। एपी सिंह बघेल भाजपा के पिछड़ावर्ग के प्रकोष्ठ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
अधिवक्ता की दलील थी कि धांगर जाति की संख्या उत्तर प्रदेश में बेहद कम है। यह जाति मात्र सोनभद्र जिले में पाई जाती है और बमुश्किल इस जाति के सौ परिवार ही पूरे प्रदेश मेें होंगे। धांगर की कुल अनुसूचित जाति में हिस्सेदारी 0.01 प्रतिशत ही है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि एसपी सिंह बघेल के सगे बड़े भाई बृजराज सिंह बघेल और छोटे भाई वीरेंद्र सिंह बघेल पाल/गड़ेरिया जाति के ही हैं। उनके बड़े भाई के बेटे हनुमंत सिंह पुत्र विश्वंभर सिंह ने धांगड़ जाति का प्रमाणपत्र जारी करवाया था, जिसे जिला स्तरीय कमेटी ने निरस्त कर दिया है। याचिका में उपरोक्त आरोपों के समर्थन में कई दस्तावेजी साक्ष्य लगाए गए हैं और उनके आधार पर चुनाव निरस्त करने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने मंत्री को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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अनुसूचित जाति घोषित करने पर लग चुकी है रोक
इलाहाबाद। पाल-गडे़रिया सहित 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा का दर्जा देने और जाति प्रमाण पत्र जारी करने के समाजवादी पार्टी सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट रोक लगा चुका है। सपा सरकार ने 21 और 22 दिसंबर 2016 को शासनादेश जारी करते हुए 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति मानते हुए अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र देने का आदेश दिया था। इसे डा. भीमराव अंबेडकर ग्रंथालय गोरखपुर ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी। मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने शासनादेश के तहत जाति प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। याचिका पर अंतिम सुनवाई जुलाई में होनी है। इससे पूर्व 2005 में भी सपा सरकार ने ऐसा ही आदेश जारी किया था, मगर इसी संस्था द्वारा मामला हाईकोर्ट ले जाने के बाद तत्कालीन सरकार ने आदेश वापस ले लिया था।
पूर्व विधायक राकेश बाबू एडवोकेट का कहना है कि एसपी सिंह बघेल ने नियम कानून को ताक पर रख कर अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र बनवाया है। गड़रिया, पाल और बघेल पिछड़ा वर्ग में आते हैं। उन्होंने अनुसूचित जाति से जुड़े लोगों के अधिकारों का हनन किया है। उन्होंने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल कर उनके निर्वाचन को चुनौती दी है।
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टुंडला विधानसभा के पूर्व विधायक राकेश बाबू ने चुनाव याचिका दाखिल कर बघेल का निर्वाचन रद्द करने की मांग की है। याचिका पर न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी सुनवाई कर रहे हैं। याची का पक्ष रख रहे अधिवक्ता राकेश गुप्ता का कहना था कि एसपी सिंह बघेल मूल रूप से औरैया के भटपुरा के उमरी गांव के रहने वाले हैं। वह और उनका परिवार पिछड़ा वर्ग की गड़ेरिया जाति से संबंधित है। गडे़रिया, पाल और बघेल उत्तर प्रदेश अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण नियमावली 1994 के शेड्यूल एक में 19वें नंबर पर अधिसूचित है। इसके बावजूद उन्होंने आगरा के पते पर अनुसूचित जाति धांगर/धनगर का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर टुंडला सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से नामांकन किया है। मूल रूप से औरैया के निवासी होने के बावजूद उन्होंने अपना जाति प्रमाणपत्र एमआईजी 44 न्यू शाहगंज आगरा के पते पर बनवाया है। एपी सिंह बघेल भाजपा के पिछड़ावर्ग के प्रकोष्ठ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
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अधिवक्ता की दलील थी कि धांगर जाति की संख्या उत्तर प्रदेश में बेहद कम है। यह जाति मात्र सोनभद्र जिले में पाई जाती है और बमुश्किल इस जाति के सौ परिवार ही पूरे प्रदेश मेें होंगे। धांगर की कुल अनुसूचित जाति में हिस्सेदारी 0.01 प्रतिशत ही है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि एसपी सिंह बघेल के सगे बड़े भाई बृजराज सिंह बघेल और छोटे भाई वीरेंद्र सिंह बघेल पाल/गड़ेरिया जाति के ही हैं। उनके बड़े भाई के बेटे हनुमंत सिंह पुत्र विश्वंभर सिंह ने धांगड़ जाति का प्रमाणपत्र जारी करवाया था, जिसे जिला स्तरीय कमेटी ने निरस्त कर दिया है। याचिका में उपरोक्त आरोपों के समर्थन में कई दस्तावेजी साक्ष्य लगाए गए हैं और उनके आधार पर चुनाव निरस्त करने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने मंत्री को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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अनुसूचित जाति घोषित करने पर लग चुकी है रोक
इलाहाबाद। पाल-गडे़रिया सहित 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा का दर्जा देने और जाति प्रमाण पत्र जारी करने के समाजवादी पार्टी सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट रोक लगा चुका है। सपा सरकार ने 21 और 22 दिसंबर 2016 को शासनादेश जारी करते हुए 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति मानते हुए अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र देने का आदेश दिया था। इसे डा. भीमराव अंबेडकर ग्रंथालय गोरखपुर ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी। मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने शासनादेश के तहत जाति प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। याचिका पर अंतिम सुनवाई जुलाई में होनी है। इससे पूर्व 2005 में भी सपा सरकार ने ऐसा ही आदेश जारी किया था, मगर इसी संस्था द्वारा मामला हाईकोर्ट ले जाने के बाद तत्कालीन सरकार ने आदेश वापस ले लिया था।
पूर्व विधायक राकेश बाबू एडवोकेट का कहना है कि एसपी सिंह बघेल ने नियम कानून को ताक पर रख कर अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र बनवाया है। गड़रिया, पाल और बघेल पिछड़ा वर्ग में आते हैं। उन्होंने अनुसूचित जाति से जुड़े लोगों के अधिकारों का हनन किया है। उन्होंने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल कर उनके निर्वाचन को चुनौती दी है।