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बैर पतन का द्वार, क्षमा ही सच्चा सम्मान: विवेक सागर
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टूंडला में रथयात्रा निकालते जैन समाज व आरती उतारते जिनभक्त
- फोटो : TUNDLA
फिरोजाबाद। नसियाजी जैन मंदिर में प्रवचन में जैनाचार्य विवेकसागर महाराज ने कहा है कि मनुष्य का पतन बैर से होता है। बैर पतन का द्वार है। बैर जीवनाशक महाविष है। बैर नरक का महाद्वार है।
आचार्य विवेक सागर महाराज ने कहा कि तीर्थंकरों, प्राचीन आचार्य, भगवंतों ने दशलक्षण पर्व का प्रारंभ उत्तम क्षमा धर्म से किया है। आप सभी बैर की गांठ खोलकर क्षमा को प्रवाहित करें। एक दूसरे के प्रति घृणा के शूल नहीं, प्रेम-स्नेह के फूल बोएं। क्षमा की माला द्वारा उनका स्वागत करें। क्षमा का सम्मान ही सच्चा सम्मान है। यदि आपके अंदर क्षमा का भाव है तो बैर नहीं रह सकता। यदि बैर भाव है तो क्षमा नहीं रह सकती। प्रवचन को सुनकर जैन श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
जैनाचार्य क्षमावाणी का पर्व सौहार्द और सद्भावना का पर्व है। एक-दूसरे से क्षमा मांगकर मन की कलुषता को साफ किया जाता है। दशलक्षण पर्वों के अंतिम में मनाया जाने वाला यह पर्व सभी के मन में वर्ष भर का एकत्रित मैल धोने के लिए आता है। अहंकार का विसर्जन कर, जीवन में समर्पण की कला सीखें।
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जाने-अनजाने हुई गलतियों की मांगी क्षमा
शिकोहाबाद। दशलक्षण पर्व मंगलवार को क्षमावाणी पर्व के साथ संपन्न हो गया। श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर जैन स्ट्रीट बड़ा बाजार में मंगलवार सुबह धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। दोपहर में घटयात्रा निकाली गई। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इस दौरान सभी लोगों ने एक दूसरे से जाने-अनजाने में की गई गलतियों के लिए क्षमा मांगी।
विमल जागृति मंच ने जैन समाज के सभी महिलाओं पुरुष बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था की। अनिल जैन, सुनील जैन, राकेश जैन, कैलाश जैन, प्रिंस जैन, संभव जैन, शिखर जैन, अमित जैन, राहुल जैन, दीपक जैन, शैलेंद्र जैन, कपिल जैन, अरुण जैन, विमल जैन, आलोक जैन, मयंक जैन, सनी जैन, गौरव जैन, आशीष जैन, चैतन्य जैन, ज्ञानेंद्र जैन आदि मौजूद रहे।
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आचार्य विवेक सागर महाराज ने कहा कि तीर्थंकरों, प्राचीन आचार्य, भगवंतों ने दशलक्षण पर्व का प्रारंभ उत्तम क्षमा धर्म से किया है। आप सभी बैर की गांठ खोलकर क्षमा को प्रवाहित करें। एक दूसरे के प्रति घृणा के शूल नहीं, प्रेम-स्नेह के फूल बोएं। क्षमा की माला द्वारा उनका स्वागत करें। क्षमा का सम्मान ही सच्चा सम्मान है। यदि आपके अंदर क्षमा का भाव है तो बैर नहीं रह सकता। यदि बैर भाव है तो क्षमा नहीं रह सकती। प्रवचन को सुनकर जैन श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
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जैनाचार्य क्षमावाणी का पर्व सौहार्द और सद्भावना का पर्व है। एक-दूसरे से क्षमा मांगकर मन की कलुषता को साफ किया जाता है। दशलक्षण पर्वों के अंतिम में मनाया जाने वाला यह पर्व सभी के मन में वर्ष भर का एकत्रित मैल धोने के लिए आता है। अहंकार का विसर्जन कर, जीवन में समर्पण की कला सीखें।
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जाने-अनजाने हुई गलतियों की मांगी क्षमा
शिकोहाबाद। दशलक्षण पर्व मंगलवार को क्षमावाणी पर्व के साथ संपन्न हो गया। श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर जैन स्ट्रीट बड़ा बाजार में मंगलवार सुबह धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। दोपहर में घटयात्रा निकाली गई। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इस दौरान सभी लोगों ने एक दूसरे से जाने-अनजाने में की गई गलतियों के लिए क्षमा मांगी।
विमल जागृति मंच ने जैन समाज के सभी महिलाओं पुरुष बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था की। अनिल जैन, सुनील जैन, राकेश जैन, कैलाश जैन, प्रिंस जैन, संभव जैन, शिखर जैन, अमित जैन, राहुल जैन, दीपक जैन, शैलेंद्र जैन, कपिल जैन, अरुण जैन, विमल जैन, आलोक जैन, मयंक जैन, सनी जैन, गौरव जैन, आशीष जैन, चैतन्य जैन, ज्ञानेंद्र जैन आदि मौजूद रहे।