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दूषित हुआ पेयजल, नदियां भूलीं कलकल

Fri, 05 Jun 2015 05:21 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Fri, 05 Jun 2015 05:21 PM IST
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Has contaminated drinking water , rivers lost her voice
कारखानों की चिमनियों से उठता धुआं, नदियों में जाता नाले का पानी, कलुषित होता कालिंदी का आंचल, शहर में चारों ओर वाहनों का बेहिसाब शोर। यह तो महज बानगी है जिले में बद से बदतर होते हालातों की। शहर हो या गांव बदलते परिवेश ने प्रकृति को बदल दिया। पर्यावरण का भोलापन प्रयोगों की भेंट चढ़ गया। नतीजा न तो शुद्ध पेयजल है और न ही नदियों की कलकल करती अविरल धारा। बढ़ती आबादी और औद्योगीकरण के चलते यमुना दूषित हुई तो वहीं सिरसा, सेंगर, अरिंद, आबू समेत अन्य नदियां अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं। वाहनों के शोर ने लोगों के सुनने की क्षमता भी कम कर दी।
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 सुहागनगरी, जहां की रंगत, बरकत समेत कारीगरी ने देश और विदेश में शहर को पहचान दिलाई है वहीं विगत कुछ सालों से बढ़ते प्रदूषण ने लोगों को चपेट में भी लिया है। प्रकृति से खिलवाड़, वाहनों, जेनरेटरों के शोर में ध्वनि प्रदूषण के सारे मानक उड़ गए। स्कूल, कालेज, अस्पताल के बाहर टेंपो व अन्य वाहनों में प्रतिबंधित प्रेशर हार्न इस मर्ज को और बढ़ा रहा है। इससे लोगों को ऊंचा सुनने की आदत, कम सुनाई देने जैसी समस्याएं हो रही हैं।
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बूंद-बूंद पानी को तरसते लोग
यमुना से कुछ ही दूरी पर बसा शहर पानी को तरस रहा है। फीरोजाबाद, शिकोहाबाद, जसराना, सिरसागंज, समेत जनपद के अन्य हिस्सों में दिनों दिन भूगर्भ जलस्तर गिरता जा रहा है तो तमाम योजनाओं पर अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी अब तक यमुना को निर्मल नहीं किया जा सका। एक के बाद एक नई योजना बनती है लेकिन मर्ज कम नहीं होता। पूरे शहर में अंधाधुंध हो रहे भूगर्भ जल दोहन के कारण जलस्तर नीचे गिरता जा रहा है। गिरते हुए जलस्तर को सुधारने के लिए शहर में कहीं भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। जिसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है वहीं लस्टर कारखानों, शहर के नालों नालियों का पानी, एसटीपी प्लांटों का ठीक ढंग से काम नहीं करने से जीवन दायिनी यमुना खुद ही अपने जीवन को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। डीओ, बीओडी, पीएच और रंग की मात्रा असंतुलित होने से इंसान से लेकर जलीय जीवों के लिए वह खतरा बन गए हैं। सिरसा नदी में भी प्रदूषण बढ़ रहा है।
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प्रदूषण में कौन कितना जिम्मेदार
उद्योग: 40 फीसदी
वाहन: 25 फीसदी
सड़कें, कचरा: 25 फीसदी
घरेलू ईंधन: 10 फीसदी

यह है पानी के मानक
पीने वाला पानी: इसका रंग 10 हैजन अधिकतम, पीएच 6.5-8.5, डीओ न्यूनतम 6, बीओडी 2.0 होनी चाहिए।

ध्वनि प्रदूषण से होने वाले रोग
चिड़चिड़ाहट, श्रवणशक्ति में कमी, सिरदर्द, चक्कर, जी मिचलाना, उल्टी, कानों में तीव्र दर्द, त्वचा में जलन और संवेदनशील झिल्लियों का फटना।

जल प्रदूषण से होने वाले रोग
पेट संबधी बीमारियां, अमीबाइसिस, गैस्ट्राइटिस, कब्ज, पानी में फ्लोराइड हो तो हड्डियां कमजोर, उल्टी-दस्त डायरिया, बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकते हैं।

यमुना की मौजूदा स्थिति
कारक          सामान्य   बढ़ा हुआ
 आरएसपीएम     60      250
 एसओ           04      07
 डीओडी         10      18
 सीओडी         22     44.4

शुद्ध हवा में प्रदूषण की स्थित

 क्षेत्र             दिन             रात
रिहायशी        55/45      70.5/50
व्यावसायिक    65/55      82.3/60
औद्योगिक      75/70      78/68.8
संवेदनशील     50/40     53.5/42
(आंकड़े प्रदूषण नियंत्रण विभाग से आरएसपीएम के मई के आखिरी सप्ताह के हैं)
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