गुरु पूर्णिमा पर विशेष: गुरु देते हैं सफलता का मंत्र, सर्वोच्च है उनका स्थान
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गुरु ने सिखाया अनुशासन
गुरु के मार्गदर्शन से व्यक्ति ऊंचाइयों तक पहुंच जाता है। हमारे गुरु डा. लालवचन त्रिपाठी, जो कि गोरखपुर यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के अध्यक्ष थे, हिंदुस्तान के वरिष्ठ मनोविज्ञान थे। उनकी प्रेरणा से ही हमने उच्च शिक्षा हासिल करने का मन किया। हमारे गुरु ने ही हमें उच्चशिक्षा के प्रेरित किया। हमने तभी से महाविद्यालय में आने का निर्णय लिया।
हमारे गुरु डा. त्रिपाठी अनुशासन एवं अपने कार्य के साथ समझौता नहीं करते थे। उनके शिष्यों में अनुशासन देखने को मिलेगा। हमारे जीवन में गुरु की अहम भूमिका रही।- डॉ. प्रभाष्कर राय, प्राचार्य एसआरके कॉलेज महाविद्यालय
गुरु के बताए रास्ते से मिली सफलता
मैंने अपना गुरु उदयपुर मेडिकल कॉलेज की एचओडी प्रो. डा. ऊषारानी शर्मा को माना है। जब मैं पीजी कर रही थी तो उनके द्वारा जो बातें, अनुशासन सिखाया था, वो मुझे आज भी याद है। आज भी मरीजों को देखती हूं तो उनकी बातों को याद रखती हूं। उनके बताई बातों का अनुसरण करतीं हूं। जिसके जीवन में गुरु है, वो व्यक्ति सफल रहता है। गुरु ही हमें सफलता का मूलमंत्र देता है।-डॉ. गरिमा शर्मा, स्त्री रोग विशेषज्ञ
गुरु से मिली निष्ठा और लगन की सीख
मैं जब कक्षा नौंवी में पढ़ती थी, तब मैने अपने विद्यालय प्रधानाचार्य से सीखा कि व्यक्ति को निष्ठा, लगन से अपना कार्य करना चाहिए। बस उसी दिन से यह बात मेरे मन में बैठ गई। मैने लगन से ही मेहनत करना शुरू की।
मैं डीआईओएस बनकर फिरोजाबाद जनपद में तैनात हूं। प्रधानाचार्य मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते थे और हौंसला भी बढ़ाते थे। गुरु सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं कराता है, जबकि वह अपने अनुभव से जीवन की सफलता का मंत्र बनाता है।- रितु गोयल,