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शहरी होने का तमगा मिला पर नहीं मिली मूलभूत सुविधाएं
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फिरोजाबाद ! लालपुर मंडी के पास बिलाल नगर की गलियों में जलभराब की स्थिती
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। ग्राम पंचायतों से सटे इलाके नगर निगम की सीमा में वित्तीय वर्ष 2014-15 में शामिल हो गए लेकिन लेकिन शहर जैसी सुविधाओं का अभाव अब तक बना हुआ है। विगत चार वर्षों से 16 से अधिक मोहल्ले विकास की बाट जोह रहे हैं। नगर निगम सीमा में शामिल लालपुर, आसफाबाद, दीदामई एवं टापाखुर्द में कच्ची सड़कों, टूटी-फूटी नालियों, संपर्क मार्गों व आंतरिक गलियों में फैली गंदगी लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है।
नगर निगम में शामिल ग्राम पंचायत लालपुर, आसफाबाद, दीदामई और टापाखुर्द में विगत चार वर्ष की अवधि में बनी नई कॉलोनी और मोहल्लों में हालात आज भी बदतर बने हुए हैं। टापाखुर्द क्षेत्र में बसी नई कॉलोनी व मोहल्ले के लोगों का कहना है कि ग्राम पंचायत में शामिल थे, तब सफाई के साथ ही सड़क व नाली-खड़ंजों की मरम्मत व निर्माण कार्य आसानी से हो जाते थे लेकिन नगर निगम सीमा में शामिल होने के बाद से मूलभूत सुविधाओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
दीदामई के शिवकुमार राठौर व हेमंत कुमार और लालपुर के देवेंद्र सिंह व इरफान का कहना है कि विकास कार्यों में जनप्रतिनिधि भी पक्षपात कर रहे हैं। सीवर लाइन चोक होने के कारण गलियों में मैला व भीषण गंदगी है। कच्ची गलियों में जलभराव के कारण निकलना दूभर हो गया है। कमावेेश यही हाल आसफाबाद का भी है। यहां भी कई गलियों में नाली-खड़ंजों और सीवर लाइन का अभाव लोगों के लिए नासूर बन चुका है। कई गलियों के बाहर फैली गंदगी से उठने वाली बदबू और मच्छरों के कारण आसपास के लोगों का हाल बेहाल है।
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2017 से विकास कार्यों के इंतजार में हैं ये मोहल्ले
बिलालनगर, लालपुर हजीरा, मोमिन नगर, बगदाद नगर, उर्दूनगर, मोदी नगर, बसंत नगर, बसंत विहार कॉलोनी, बालाजी नगर, रानी नगर, कांशीराम विहार, बघेल कॉलोनी, कमला नगर आदि।
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शहर में शामिल 20 से अधिक मोहल्लों में समस्याएं
-अधिकांश गलियों में कच्ची सड़कें
-सीवर लाइन का अभाव
-विद्युतीकरण का अभाव
-कूड़ा-कचरा निपटान को उचित व्यवस्था नही
-टूटी-फूटी नलियों में से अधिकांश चॉक,खाली प्लाटों में फेंक जा रहा कूड़ा
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- जिम्मेदार लोग विकास कार्यों में भी पक्षपात कर रहे हैं। दीदामई, आसफाबाद और लालपुर क्षेत्र में अधिकांश गलियों में गंदगी और बदबू का आलम है। सीवर लाइनें चौक हैं। इनसे से उफनने वाले गंदे पानी के बीच से आमजन का निकलना दूभर है। कई बार मांग के बावजूद इस ओर कोई ध्यान नहीं देना चाहता है।
मोहम्मद मुकीम, बगदाद नगर
- तीन-चार वर्ष से आंदोलन, धरना प्रदर्शन सभी वैधानिक कार्य बेकार साबित हुए। कोई सुनवाई नहीं करता है। शहर में शामिल होने के बाद इस समूचे इलाके का दौरा करने पर विकास कार्यों की सच्चाई सामने आ जाएगी।
सैयद अलनवी, पटेल नगर
- ग्रामीण कहलाते थे तो नाली-खड़ंजों और सफाई के लिए परेशान नही थे। टापाखुर्द से होकर जिले के बड़े अफसर और जनप्रतिनिधि तक गुजरते हैं लेकिन शहरी कहलाने के बाद से सड़कों पर जलभराव, सीवरलाइन का अभाव व विद्युतीकरण नहीं होने का दंश झेल रहे हैं।
चंदवती, मोदी नगर
-आनन-फानन निगम में शामिल तो कर लिया लेकिन उतनी सक्रियता से विकास कार्यों व क्षेत्र में मूलभूत समस्याओं के निदान की रूपरेखा नहीं बनाई गई। समूचे टापाखुर्द क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति, सड़क निर्माण एवं प्रकाश व्यवस्था से जुड़ीं तमाम समस्याएं हैं।
सुधा देवी, बघेल कॉलोनी
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नगर निगम में शामिल ग्राम पंचायत लालपुर, आसफाबाद, दीदामई और टापाखुर्द में विगत चार वर्ष की अवधि में बनी नई कॉलोनी और मोहल्लों में हालात आज भी बदतर बने हुए हैं। टापाखुर्द क्षेत्र में बसी नई कॉलोनी व मोहल्ले के लोगों का कहना है कि ग्राम पंचायत में शामिल थे, तब सफाई के साथ ही सड़क व नाली-खड़ंजों की मरम्मत व निर्माण कार्य आसानी से हो जाते थे लेकिन नगर निगम सीमा में शामिल होने के बाद से मूलभूत सुविधाओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
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दीदामई के शिवकुमार राठौर व हेमंत कुमार और लालपुर के देवेंद्र सिंह व इरफान का कहना है कि विकास कार्यों में जनप्रतिनिधि भी पक्षपात कर रहे हैं। सीवर लाइन चोक होने के कारण गलियों में मैला व भीषण गंदगी है। कच्ची गलियों में जलभराव के कारण निकलना दूभर हो गया है। कमावेेश यही हाल आसफाबाद का भी है। यहां भी कई गलियों में नाली-खड़ंजों और सीवर लाइन का अभाव लोगों के लिए नासूर बन चुका है। कई गलियों के बाहर फैली गंदगी से उठने वाली बदबू और मच्छरों के कारण आसपास के लोगों का हाल बेहाल है।
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2017 से विकास कार्यों के इंतजार में हैं ये मोहल्ले
बिलालनगर, लालपुर हजीरा, मोमिन नगर, बगदाद नगर, उर्दूनगर, मोदी नगर, बसंत नगर, बसंत विहार कॉलोनी, बालाजी नगर, रानी नगर, कांशीराम विहार, बघेल कॉलोनी, कमला नगर आदि।
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शहर में शामिल 20 से अधिक मोहल्लों में समस्याएं
-अधिकांश गलियों में कच्ची सड़कें
-सीवर लाइन का अभाव
-विद्युतीकरण का अभाव
-कूड़ा-कचरा निपटान को उचित व्यवस्था नही
-टूटी-फूटी नलियों में से अधिकांश चॉक,खाली प्लाटों में फेंक जा रहा कूड़ा
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- जिम्मेदार लोग विकास कार्यों में भी पक्षपात कर रहे हैं। दीदामई, आसफाबाद और लालपुर क्षेत्र में अधिकांश गलियों में गंदगी और बदबू का आलम है। सीवर लाइनें चौक हैं। इनसे से उफनने वाले गंदे पानी के बीच से आमजन का निकलना दूभर है। कई बार मांग के बावजूद इस ओर कोई ध्यान नहीं देना चाहता है।
मोहम्मद मुकीम, बगदाद नगर
- तीन-चार वर्ष से आंदोलन, धरना प्रदर्शन सभी वैधानिक कार्य बेकार साबित हुए। कोई सुनवाई नहीं करता है। शहर में शामिल होने के बाद इस समूचे इलाके का दौरा करने पर विकास कार्यों की सच्चाई सामने आ जाएगी।
सैयद अलनवी, पटेल नगर
- ग्रामीण कहलाते थे तो नाली-खड़ंजों और सफाई के लिए परेशान नही थे। टापाखुर्द से होकर जिले के बड़े अफसर और जनप्रतिनिधि तक गुजरते हैं लेकिन शहरी कहलाने के बाद से सड़कों पर जलभराव, सीवरलाइन का अभाव व विद्युतीकरण नहीं होने का दंश झेल रहे हैं।
चंदवती, मोदी नगर
-आनन-फानन निगम में शामिल तो कर लिया लेकिन उतनी सक्रियता से विकास कार्यों व क्षेत्र में मूलभूत समस्याओं के निदान की रूपरेखा नहीं बनाई गई। समूचे टापाखुर्द क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति, सड़क निर्माण एवं प्रकाश व्यवस्था से जुड़ीं तमाम समस्याएं हैं।
सुधा देवी, बघेल कॉलोनी