{"_id":"9b051fb8520796222d59a8c3ddfff874","slug":"glass-industry-shock-gail-relief-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कांच उद्योग को झटका, गेल को राहत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कांच उद्योग को झटका, गेल को राहत
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Wed, 01 Jul 2015 11:14 PM IST
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मंदी के दौर और अतिरिक्त करों के बोझ से गुजर रहे कांच उद्योग पर एक और गाज
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गिर गई। गेल के अतिरिक्त भार से बचने की कोशिश कर रहे व्यापारियों को
तगड़ा झटका मिला है। व्यापारियों द्वारा ट्रांसपोर्टेशन
चार्ज के खिलाफ न्यायालय में गुहार लगाई गई लेकिन इस याचिका को न्यायालय ने
सिरे से नकार दिया। न्यायालय के आदेश के बाद व्यापारियों में खलबली मची
है।
गेल गैस इंडिया लि. द्वारा पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा रेग्यूलेटरी बोर्ड की अनुमति के बिना अप्रैल-2013 से 76 पैसे प्रति घनमीटर के हिसाब से ट्रांसपोर्टेशन चार्ज वसूलने के नोटिस जारी किए हैं। हालांकि गेल द्वारा पूर्व में 1.20 रुपए ट्रांसपोर्टेशन चार्ज वसूलने को नोटिस जारी किए थे, तब कुछ उद्यमी कोर्ट की शरण में चले गए थे। उद्योग जगत की दलील है कि अनुबंध होने के बावजूद गेल आए दिन नए-नए चार्ज लगा दिए जाते हैं। जबकि रेग्यूलेटरी बोर्ड की अनुमति के बिना कोई चार्ज नहीं लगाया जा सकता।
गेल के फरमान के खिलाफ दिल्ली की इंद्रप्रस्थ कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसे बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामला खारिज किए जाने को उद्यमियों का मानना है कि इसके गंभीर परिणाम होंगे।
बाक्स
आगरा, मथुरा, भरतपुर के उद्योगों पर भी पड़ेगी मार
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर फीरोजाबाद के साथ, आगरा, मथुरा व भरतपुर के उद्योगों पर भी पड़ेगा। फीरोजाबाद में करीब 200 इंडस्ट्रीज हैं, जिसमें करीब 13 लाख घनमीटर गैस की खपत होती है। इस हिसाब से एक चूड़ी कारखाने पर 22-25 लाख तथा ग्लास कारखाने पर एक से दो करोड़ तक अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है।
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अतिरिक्त बोझ उठाने की स्थिति में नहीं उद्यमी
सुहागनगरी का कांच उद्योग वर्तमान में पूरी तरह मंदी के दौर से गुजर रहा है। कांच उद्योग पर लगने वाले नित नए टैक्स, गैस के दामों में बढ़ोत्तरी की मार से कराह रहा है। ऐसे हाल में उद्यमी किसी तरह का अतिरिक्त बोझ उठाने की स्थिति में नहीं है।
दिल्ली तक दौड़े पर नहीं मिली राहत
रेग्यूलेटरी बोर्ड की अनुमति के बिना गेल द्वारा जबरन लगाए जा रहे ट्रांसपोर्टेशन चार्ज को लेकर उद्यमियों ने जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगाई थी। कांग्रेस सरकार में सांसद राजबब्बर के साथ कई बार पेट्रोलियम मंत्रालय से वार्ता हुई। मंत्रालय द्वारा आश्वासन भी दिए गए। भाजपा सरकार में उद्यमियों ने डा. रामशंकर कठेरिया के नेतृत्व में कई मंत्रियों से मुलाकात कर दर्द रखा। दिल्ली के दर्जनों चक्कर लगाए लेकिन राहत न मिली। उद्यमियों ने सपा के कई कद्दावर नेताओं से भी मुलाकात की है। जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों की से गुहार लगाने के बाद भी आजतक राहत नहीं मिली।
जख्म पर मरहम की जगह मिला नमक: उद्यमी
गेल की मनमानी से कांच इंडस्ट्री पहले से ही बर्वाद के कगार पर खड़ी है। अतिरिक्त चार्ज वसूलने से वह पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। उद्योग इस मार को झेल नहीं पाएगा। इसका परिणाम यह होगा कि बेरोजगारी बढ़ जाएगी।
पीके जिंदल
गेल द्वारा अप्रैल-2013 से ट्रांसपोर्टेशन चार्ज वसूलने के निर्देश दिए गए हैं, परंतु सुप्रीम कोर्ट द्वारा आज आदेश सुनाया गया है, अत: ऐसी स्थिति गेल 2013 से चार्ज नहीं वसूल सकती। यदि गैल द्वारा मनमानी की गई तो कांच उद्योग पूरी तरह बर्वाद हो जाएगा।
राजकुमार मित्तल
गेल की मनमानी से उद्योग धंधे पूरी तरह चौपट हो रहे हैं। आएदिन नए-नए चार्ज थोपने से उत्पादन की कीमत बढ़ रही है, परंतु बढ़ी रेट पर कोई माल लेने को तैयार नहीं है। आदेश के खिलाफ हम आगे लड़ाई लड़ेंगे।
हनुमान प्रसाद गर्ग
गेल गैस इंडिया लि. द्वारा पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा रेग्यूलेटरी बोर्ड की अनुमति के बिना अप्रैल-2013 से 76 पैसे प्रति घनमीटर के हिसाब से ट्रांसपोर्टेशन चार्ज वसूलने के नोटिस जारी किए हैं। हालांकि गेल द्वारा पूर्व में 1.20 रुपए ट्रांसपोर्टेशन चार्ज वसूलने को नोटिस जारी किए थे, तब कुछ उद्यमी कोर्ट की शरण में चले गए थे। उद्योग जगत की दलील है कि अनुबंध होने के बावजूद गेल आए दिन नए-नए चार्ज लगा दिए जाते हैं। जबकि रेग्यूलेटरी बोर्ड की अनुमति के बिना कोई चार्ज नहीं लगाया जा सकता।
गेल के फरमान के खिलाफ दिल्ली की इंद्रप्रस्थ कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसे बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामला खारिज किए जाने को उद्यमियों का मानना है कि इसके गंभीर परिणाम होंगे।
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बाक्स
आगरा, मथुरा, भरतपुर के उद्योगों पर भी पड़ेगी मार
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर फीरोजाबाद के साथ, आगरा, मथुरा व भरतपुर के उद्योगों पर भी पड़ेगा। फीरोजाबाद में करीब 200 इंडस्ट्रीज हैं, जिसमें करीब 13 लाख घनमीटर गैस की खपत होती है। इस हिसाब से एक चूड़ी कारखाने पर 22-25 लाख तथा ग्लास कारखाने पर एक से दो करोड़ तक अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है।
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अतिरिक्त बोझ उठाने की स्थिति में नहीं उद्यमी
सुहागनगरी का कांच उद्योग वर्तमान में पूरी तरह मंदी के दौर से गुजर रहा है। कांच उद्योग पर लगने वाले नित नए टैक्स, गैस के दामों में बढ़ोत्तरी की मार से कराह रहा है। ऐसे हाल में उद्यमी किसी तरह का अतिरिक्त बोझ उठाने की स्थिति में नहीं है।
दिल्ली तक दौड़े पर नहीं मिली राहत
रेग्यूलेटरी बोर्ड की अनुमति के बिना गेल द्वारा जबरन लगाए जा रहे ट्रांसपोर्टेशन चार्ज को लेकर उद्यमियों ने जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगाई थी। कांग्रेस सरकार में सांसद राजबब्बर के साथ कई बार पेट्रोलियम मंत्रालय से वार्ता हुई। मंत्रालय द्वारा आश्वासन भी दिए गए। भाजपा सरकार में उद्यमियों ने डा. रामशंकर कठेरिया के नेतृत्व में कई मंत्रियों से मुलाकात कर दर्द रखा। दिल्ली के दर्जनों चक्कर लगाए लेकिन राहत न मिली। उद्यमियों ने सपा के कई कद्दावर नेताओं से भी मुलाकात की है। जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों की से गुहार लगाने के बाद भी आजतक राहत नहीं मिली।
जख्म पर मरहम की जगह मिला नमक: उद्यमी
गेल की मनमानी से कांच इंडस्ट्री पहले से ही बर्वाद के कगार पर खड़ी है। अतिरिक्त चार्ज वसूलने से वह पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। उद्योग इस मार को झेल नहीं पाएगा। इसका परिणाम यह होगा कि बेरोजगारी बढ़ जाएगी।
पीके जिंदल
गेल द्वारा अप्रैल-2013 से ट्रांसपोर्टेशन चार्ज वसूलने के निर्देश दिए गए हैं, परंतु सुप्रीम कोर्ट द्वारा आज आदेश सुनाया गया है, अत: ऐसी स्थिति गेल 2013 से चार्ज नहीं वसूल सकती। यदि गैल द्वारा मनमानी की गई तो कांच उद्योग पूरी तरह बर्वाद हो जाएगा।
राजकुमार मित्तल
गेल की मनमानी से उद्योग धंधे पूरी तरह चौपट हो रहे हैं। आएदिन नए-नए चार्ज थोपने से उत्पादन की कीमत बढ़ रही है, परंतु बढ़ी रेट पर कोई माल लेने को तैयार नहीं है। आदेश के खिलाफ हम आगे लड़ाई लड़ेंगे।
हनुमान प्रसाद गर्ग