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कांच उद्योग को मिली संजीवनी, घटे गैस के दाम
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Wed, 30 Sep 2015 11:35 PM IST
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फीरोजाबाद। संसाधनों से जूझते कांच व्यवसाय को गैस कीमतों में हुई कमी संजीवनी का काम कर सकती है। त्योहार के सीजन पर केंद्र सरकार ने गैस के दाम घटाकर कांच उद्योग को राहत दी है। गैस के दामों में कमी होने से लघु उद्योगों को राहत मिलेगी।
बताते चलें कि सुहागनगरी में करीब 200 कांच इकाइयां संचालित हैं, जिसमें करीब 125 कांच इकाइयों में चूड़ी का उत्पादन किया जाता है। फीरोजाबाद में अनेक इकाइयां ऐसी हैं, जो 5000 घनमीटर से कम गैस की खपत कर रही हैं, लेकिन इन इकाइयों को संचालित करने के लिए उद्यमियों को महंगी गैस खरीदनी पड़ रही है। यही नहीं केंद्र सरकार द्वारा आए दिन गैस के दामों में इजाफा कर दिया है, जिससे कांच आइटमों की उत्पादन लगातार बढ़ जाती है। इस हाल में उद्यमियों को कांच की चूड़ी सहित अन्य उत्पादन बेचना मुश्किल हो रहा है। यही कारण है कि वर्तमान में कई औद्योगिक इकाइयां बंद हो चुकी हैं तो कई बंदी के कगार पर हैं। कई कांच कारखाने बंद होने से हजारों श्रमिक पलायन कर चुके हैं। पूर्व से ही इन हालातों से निपटने के लिए औद्योगिक संगठन गैस की कीमतें कम करने को लगातार केंद्र सरकार से डिमांड कर रहे हैं। बुधवार का दिन औद्योगिक संगठनों के लिए बेहद खास रहा। केंद्र सरकार ने एपीएम गैस के दाम घटाकर 3.82 रुपये कर दिए जो वर्तमान में 5.06 रुपये थी। उद्यमियों का कहना है कि गैस के दाम कम कराने को लगातार प्रयास किए जा रहे थे। इंटरनेशनल मार्केट में कमी के कारण ही केंद्र सरकार द्वारा एपीएम गैस के दामों में कमी गई है, जो उद्योग जगत के लिए राहत की बात है।
उद्योगों की तरक्की को अमर उजाला कर रहा प्रयास
पूरे प्रदेश में लघु सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योगों की तरक्की को अमर उजाला लगातार प्रयास कर रहा है। अमर उजाला द्वारा प्रदेश के प्रमुख शहरों में उद्योगों की दुश्वारियों को उजागर किया जा रहा है। इन समस्याओं को केंद्र व प्रदेश सरकार तक पहुंचाने के भी लगातार प्रयास किए जा रहा हैं। अमर उजाला की पहल को उद्योग जगत ने काफी सराहा है। उद्यमियों ने इसे और आगे तक ले जाने की अपील की है।
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देश में केंद्र सरकार द्वारा 5000 घनमीटर तक खपत वालों को एपीएम गैस दी जा रही है। सरकार से मांग है कि सुहागनगरी के लघु उद्योगों को भी एपीएम गैस दी जाए, जिससे चूड़ी उद्योग तरक्की कर सके।
हनुमान प्रसाद गर्ग, डायरेक्टर दि ग्लास इंडस्ट्रीयल सिंडीकेट
गैस के रेट कम होने से कांच उद्योग को संजीवनी मिलेगी। हमारी मांग है कि गेल द्वारा आरएलएनजी महंगी दी जा रही है, जबकि विदेशों में इस गैस के रेट कम हो चुके हैं। आरएलएनजी के दाम घटाने चाहिए।
राजकुमार मित्तल, अध्यक्ष यूपीजीएमएस
सुहागनगरी के जूझते कारोबार को गैस की कीमतें मरहम देंगी। अब टीटीजेड क्षेत्र में छोटी इकाइयों को गैस की उपलब्धता और कम कीमत हो तो लाभ मिलेगा।
पीके जिंदल, प्रमुख उद्यमी
राजा का ताल में बनेगा प्रदूषण जांच केंद्र
प्रदूषण की जांच को 14 स्थानों पर लगाए जाएंगे उपकरण
प्रदूषण के वास्तविक कारणों की जांच को नीरी की टीम ने डाला डेरा
अमर उजाला ब्यूरो
फीरोजाबाद। ताज के पीलेपन की वजह से सुहागनगरी के कांच उद्योग पर लगातार अंगुलियां उठ रही हैं। अब प्रदूषण के वास्तविक कारण जानने को नीरी की टीम ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है। राजा का ताल पर प्रदूषण जांच केंद्र बनेगा। यही नहीं जनपद में 14 स्थानों पर प्रदूषण मापक यंत्र भी लगाए जाएंगे।
सुहागनगरी के प्रदूषण को लेकर कांच उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है। प्रदूषण को लेकर आए दिन होने वाली शिकायतों को देखते हुए टीटीजेड अथॉरिटी के अध्यक्ष के निर्देश पर नीरी द्वारा प्रदूषण के वास्तविक कारण जानने को जांच का जिम्मा सौंपा है। नीरी के वैज्ञानिक लगातार यहां शोध कर रहे हैं। मौसम साफ होते ही नीरी के वैज्ञानिकों ने सुहागनगरी में डेरा डाल दिया है। नीरी के वैज्ञानिक प्रदूषण की जांच को बड़े उपकरण भी यहां लगाने जा रहे हैं। इन उपकरणों के सहारे ही प्रदूषण की जांच होगी। वह यह भी देखेंगे कि फीरोजाबाद से आगरा की तरफ जाने वाली हवाओं से कौन-कौन सी गैस पहुंच रही है। नीरी के वैज्ञानिक उपकरणों के सहारे आगरा की सीमा तक हवाओं की जांच करेगी। राजा का ताल पर प्रदूषण जांच केंद्र बनाया जाएगा। टूंडला एफएच कालेज के निकट भी प्रदूषण मापक यंत्र लगाने की योजना है।
प्रदूषण मापक यंत्रों से यह जांच होगी कि फीरोजाबाद में उत्सर्जित होने वाली गैसों में से कितनी गैस टूंडला तक पहुंच रही है और कितनी आगे जा रही है। नीरी के वैज्ञानिकों द्वारा कुल 14 स्थानों पर प्रदूषण मापक यंत्र लगाने की योजना है। इससे गैस मापने के उपकरण के साथ हवा में घुलने वाले आरएसपीएम सहित अन्य प्रदूषण की जांच भी हो सकेगी। सबसे पहले इन उपकरणों को स्टेशन रोड, नगला भाऊ व राजा का ताल पर स्थापित किया जाएगा।
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बताते चलें कि सुहागनगरी में करीब 200 कांच इकाइयां संचालित हैं, जिसमें करीब 125 कांच इकाइयों में चूड़ी का उत्पादन किया जाता है। फीरोजाबाद में अनेक इकाइयां ऐसी हैं, जो 5000 घनमीटर से कम गैस की खपत कर रही हैं, लेकिन इन इकाइयों को संचालित करने के लिए उद्यमियों को महंगी गैस खरीदनी पड़ रही है। यही नहीं केंद्र सरकार द्वारा आए दिन गैस के दामों में इजाफा कर दिया है, जिससे कांच आइटमों की उत्पादन लगातार बढ़ जाती है। इस हाल में उद्यमियों को कांच की चूड़ी सहित अन्य उत्पादन बेचना मुश्किल हो रहा है। यही कारण है कि वर्तमान में कई औद्योगिक इकाइयां बंद हो चुकी हैं तो कई बंदी के कगार पर हैं। कई कांच कारखाने बंद होने से हजारों श्रमिक पलायन कर चुके हैं। पूर्व से ही इन हालातों से निपटने के लिए औद्योगिक संगठन गैस की कीमतें कम करने को लगातार केंद्र सरकार से डिमांड कर रहे हैं। बुधवार का दिन औद्योगिक संगठनों के लिए बेहद खास रहा। केंद्र सरकार ने एपीएम गैस के दाम घटाकर 3.82 रुपये कर दिए जो वर्तमान में 5.06 रुपये थी। उद्यमियों का कहना है कि गैस के दाम कम कराने को लगातार प्रयास किए जा रहे थे। इंटरनेशनल मार्केट में कमी के कारण ही केंद्र सरकार द्वारा एपीएम गैस के दामों में कमी गई है, जो उद्योग जगत के लिए राहत की बात है।
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उद्योगों की तरक्की को अमर उजाला कर रहा प्रयास
पूरे प्रदेश में लघु सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योगों की तरक्की को अमर उजाला लगातार प्रयास कर रहा है। अमर उजाला द्वारा प्रदेश के प्रमुख शहरों में उद्योगों की दुश्वारियों को उजागर किया जा रहा है। इन समस्याओं को केंद्र व प्रदेश सरकार तक पहुंचाने के भी लगातार प्रयास किए जा रहा हैं। अमर उजाला की पहल को उद्योग जगत ने काफी सराहा है। उद्यमियों ने इसे और आगे तक ले जाने की अपील की है।
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देश में केंद्र सरकार द्वारा 5000 घनमीटर तक खपत वालों को एपीएम गैस दी जा रही है। सरकार से मांग है कि सुहागनगरी के लघु उद्योगों को भी एपीएम गैस दी जाए, जिससे चूड़ी उद्योग तरक्की कर सके।
हनुमान प्रसाद गर्ग, डायरेक्टर दि ग्लास इंडस्ट्रीयल सिंडीकेट
गैस के रेट कम होने से कांच उद्योग को संजीवनी मिलेगी। हमारी मांग है कि गेल द्वारा आरएलएनजी महंगी दी जा रही है, जबकि विदेशों में इस गैस के रेट कम हो चुके हैं। आरएलएनजी के दाम घटाने चाहिए।
राजकुमार मित्तल, अध्यक्ष यूपीजीएमएस
सुहागनगरी के जूझते कारोबार को गैस की कीमतें मरहम देंगी। अब टीटीजेड क्षेत्र में छोटी इकाइयों को गैस की उपलब्धता और कम कीमत हो तो लाभ मिलेगा।
पीके जिंदल, प्रमुख उद्यमी
राजा का ताल में बनेगा प्रदूषण जांच केंद्र
प्रदूषण की जांच को 14 स्थानों पर लगाए जाएंगे उपकरण
प्रदूषण के वास्तविक कारणों की जांच को नीरी की टीम ने डाला डेरा
अमर उजाला ब्यूरो
फीरोजाबाद। ताज के पीलेपन की वजह से सुहागनगरी के कांच उद्योग पर लगातार अंगुलियां उठ रही हैं। अब प्रदूषण के वास्तविक कारण जानने को नीरी की टीम ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है। राजा का ताल पर प्रदूषण जांच केंद्र बनेगा। यही नहीं जनपद में 14 स्थानों पर प्रदूषण मापक यंत्र भी लगाए जाएंगे।
सुहागनगरी के प्रदूषण को लेकर कांच उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है। प्रदूषण को लेकर आए दिन होने वाली शिकायतों को देखते हुए टीटीजेड अथॉरिटी के अध्यक्ष के निर्देश पर नीरी द्वारा प्रदूषण के वास्तविक कारण जानने को जांच का जिम्मा सौंपा है। नीरी के वैज्ञानिक लगातार यहां शोध कर रहे हैं। मौसम साफ होते ही नीरी के वैज्ञानिकों ने सुहागनगरी में डेरा डाल दिया है। नीरी के वैज्ञानिक प्रदूषण की जांच को बड़े उपकरण भी यहां लगाने जा रहे हैं। इन उपकरणों के सहारे ही प्रदूषण की जांच होगी। वह यह भी देखेंगे कि फीरोजाबाद से आगरा की तरफ जाने वाली हवाओं से कौन-कौन सी गैस पहुंच रही है। नीरी के वैज्ञानिक उपकरणों के सहारे आगरा की सीमा तक हवाओं की जांच करेगी। राजा का ताल पर प्रदूषण जांच केंद्र बनाया जाएगा। टूंडला एफएच कालेज के निकट भी प्रदूषण मापक यंत्र लगाने की योजना है।
प्रदूषण मापक यंत्रों से यह जांच होगी कि फीरोजाबाद में उत्सर्जित होने वाली गैसों में से कितनी गैस टूंडला तक पहुंच रही है और कितनी आगे जा रही है। नीरी के वैज्ञानिकों द्वारा कुल 14 स्थानों पर प्रदूषण मापक यंत्र लगाने की योजना है। इससे गैस मापने के उपकरण के साथ हवा में घुलने वाले आरएसपीएम सहित अन्य प्रदूषण की जांच भी हो सकेगी। सबसे पहले इन उपकरणों को स्टेशन रोड, नगला भाऊ व राजा का ताल पर स्थापित किया जाएगा।