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ग्लास निर्यात को बचाने की जद्दोजहद
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Tue, 28 Jul 2015 09:33 PM IST
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ड्रा बैक कमेटी ग्लास मैन्यूफेक्चर एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन की एक बैठक मुंबई में संपन्न हुई, जिसमें सुहागनगरी के एक्सपोर्टरों ने कांच उद्योग से संबंधित समस्याओं को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग के बिना कांच उद्योग का अस्तित्व बचाना असंभव है।
फाइनेंस मंत्रालय द्वारा गठित कमेटी के चेयरमैन सुमित्रा चौधरी, सेक्रेटरी जीके पिल्लई, स्पेशल सेक्रेटरी कम मेंबर सीबीईसी वाईजी परांडे, चीफ कमिश्नर ऑफ कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज राजीव तलवार, ज्वाइंट सेक्रेटरी विनोद अग्रवाल, ओएसडी राजीव शंकर बैठक में शामिल रहे। कमेटी के समक्ष ग्लास मैन्यूफैक्चर एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन के चेयरमैन मुकेश बंसल टोनी ने सुहागनगरी के कांच उद्योग की समस्याएं उठाईं। उन्होंने कहा कि फीरोजाबाद टीटी जोन में स्थित है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यहां कोई भी नई इकाई नहीं लगाई जा सकती और न नेचुरल गैस के अलावा कोई फ्यूल जैसे तेल, लकड़ी, कोयला उपयोग किया जा सकता है। फीरोजाबाद के कांच उद्योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चीन, पोलेंड, ब्राजील, ताईवान, इंडोनेशिया, टर्की जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। ऐसे हाल में केंद्र सरकार के सहयोग के बिना ग्लास निर्यात अपना अस्तित्व बचाने में स्वयं को अक्षम पा रहा है।
फीरोजाबाद की झाड़, फानूस, कार की हैडलाइट, ग्लास वेयर बनाने वाली इकाई चायना से व्यापक पैमाने पर आयात की वजह से पहले ही बर्बाद हो चुकी है। शेष बची इंडस्ट्रीज को हिंदुस्तान नेशनल ग्लास नए-नए हथकंडों से सभी इकाइयों को बंद कराने को पूरा प्रयासरत है। उद्यमियों ने फीरोजाबाद से थर्मस रिफिल जो माउथ ब्लोइंग से बनते हैं, उसे भी हैंडक्राफ्ट सेक्टर में रखने का प्रस्ताव रखा।
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ड्रा बैक पुन: 14 प्रतिशत करने की मांग
फीरोजाबाद के उद्यमियों ने कमेटी के समक्ष ड्रा बैक पुन: 14 प्रतिशत करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि पहले कांच उत्पादों के निर्यात पर सात प्रतिशत फोकस स्कीम थी। उसे केंद्र सरकार ने घटाकर तीन प्रतिशत कर दिया था। एसोसिएशन के प्रयास के बाद वह पांच प्रतिशत हो सकी है। कांच निर्यात पर कुछ वर्ष पूर्व ड्रा बैक 14 प्रतिशत था, वह भी घटकर सात प्रतिशत रह गया है। अत: फाइनेंस मंत्रालय से पुन: 14 प्रतिशत करने की मांग रखी।
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फाइनेंस मंत्रालय द्वारा गठित कमेटी के चेयरमैन सुमित्रा चौधरी, सेक्रेटरी जीके पिल्लई, स्पेशल सेक्रेटरी कम मेंबर सीबीईसी वाईजी परांडे, चीफ कमिश्नर ऑफ कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज राजीव तलवार, ज्वाइंट सेक्रेटरी विनोद अग्रवाल, ओएसडी राजीव शंकर बैठक में शामिल रहे। कमेटी के समक्ष ग्लास मैन्यूफैक्चर एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन के चेयरमैन मुकेश बंसल टोनी ने सुहागनगरी के कांच उद्योग की समस्याएं उठाईं। उन्होंने कहा कि फीरोजाबाद टीटी जोन में स्थित है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यहां कोई भी नई इकाई नहीं लगाई जा सकती और न नेचुरल गैस के अलावा कोई फ्यूल जैसे तेल, लकड़ी, कोयला उपयोग किया जा सकता है। फीरोजाबाद के कांच उद्योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चीन, पोलेंड, ब्राजील, ताईवान, इंडोनेशिया, टर्की जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। ऐसे हाल में केंद्र सरकार के सहयोग के बिना ग्लास निर्यात अपना अस्तित्व बचाने में स्वयं को अक्षम पा रहा है।
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फीरोजाबाद की झाड़, फानूस, कार की हैडलाइट, ग्लास वेयर बनाने वाली इकाई चायना से व्यापक पैमाने पर आयात की वजह से पहले ही बर्बाद हो चुकी है। शेष बची इंडस्ट्रीज को हिंदुस्तान नेशनल ग्लास नए-नए हथकंडों से सभी इकाइयों को बंद कराने को पूरा प्रयासरत है। उद्यमियों ने फीरोजाबाद से थर्मस रिफिल जो माउथ ब्लोइंग से बनते हैं, उसे भी हैंडक्राफ्ट सेक्टर में रखने का प्रस्ताव रखा।
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ड्रा बैक पुन: 14 प्रतिशत करने की मांग
फीरोजाबाद के उद्यमियों ने कमेटी के समक्ष ड्रा बैक पुन: 14 प्रतिशत करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि पहले कांच उत्पादों के निर्यात पर सात प्रतिशत फोकस स्कीम थी। उसे केंद्र सरकार ने घटाकर तीन प्रतिशत कर दिया था। एसोसिएशन के प्रयास के बाद वह पांच प्रतिशत हो सकी है। कांच निर्यात पर कुछ वर्ष पूर्व ड्रा बैक 14 प्रतिशत था, वह भी घटकर सात प्रतिशत रह गया है। अत: फाइनेंस मंत्रालय से पुन: 14 प्रतिशत करने की मांग रखी।