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Firozabad News: शिकायत के बाद जागा स्वास्थ्य विभाग, बिना पंजीकरण चल रहा था पैथोलॉजी सेंटर
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फिरोजाबाद। जिले में बिना पंजीकरण और मानकों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे निजी अस्पताल और पैथोलॉजी सेंटर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। करबला क्षेत्र में निजी पैथोलॉजी सेंटर की गलत जांच रिपोर्ट से मरीज की तबीयत बिगड़ने की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लाल पैथ का निरीक्षण किया। जांच में पैथोलॉजी सेंटर बिना पंजीकरण संचालित मिला। मौके पर कोई डॉक्टर भी मौजूद नहीं था। विभाग ने संचालक को नोटिस जारी किया है।
मामला मोहल्ला करबला निवासी मनीष चोपड़ा से जुड़ा है। उन्होंने 18 जुलाई को करबला पुलिया स्थित एक निजी पैथोलॉजी में खून की जांच कराई थी। रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन 5.4 ग्राम बताया गया। पैथोलॉजी संचालक ने स्थिति गंभीर बताते हुए चिकित्सक से संपर्क कर खून चढ़ाने की सलाह दी। रिपोर्ट के आधार पर निजी चिकित्सक ने मनीष को भर्ती कर दो यूनिट रक्त चढ़ा दिया। इसके बाद अगले दिन जब दूसरी पैथोलॉजी में जांच कराई गई तो हीमोग्लोबिन 17 ग्राम निकला। रिपोर्ट में अंतर देखकर चिकित्सक भी हैरान रह गए। चिकित्सक के अनुसार गलत रिपोर्ट के कारण मरीज को अनावश्यक रूप से रक्त चढ़ गया, जिससे उसे घबराहट समेत अन्य परेशानी होने लगी। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मनीष ने 22 जुलाई को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मामले की जांच कर पैथोलॉजी संचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं पैथोलॉजी सेंटरों के नोडल अधिकारी डॉ. कमल किशोर वर्मा ने सेंटर का निरीक्षण किया। जांच में पंजीकरण संबंधी दस्तावेज नहीं मिले। इस पर संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
शिकायत के बाद ही क्यों होती है जांच
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई पैथोलॉजी सेंटर और निजी अस्पताल बिना मानकों के संचालित होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं, लेकिन नियमित जांच नहीं की जाती।
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मामला मोहल्ला करबला निवासी मनीष चोपड़ा से जुड़ा है। उन्होंने 18 जुलाई को करबला पुलिया स्थित एक निजी पैथोलॉजी में खून की जांच कराई थी। रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन 5.4 ग्राम बताया गया। पैथोलॉजी संचालक ने स्थिति गंभीर बताते हुए चिकित्सक से संपर्क कर खून चढ़ाने की सलाह दी। रिपोर्ट के आधार पर निजी चिकित्सक ने मनीष को भर्ती कर दो यूनिट रक्त चढ़ा दिया। इसके बाद अगले दिन जब दूसरी पैथोलॉजी में जांच कराई गई तो हीमोग्लोबिन 17 ग्राम निकला। रिपोर्ट में अंतर देखकर चिकित्सक भी हैरान रह गए। चिकित्सक के अनुसार गलत रिपोर्ट के कारण मरीज को अनावश्यक रूप से रक्त चढ़ गया, जिससे उसे घबराहट समेत अन्य परेशानी होने लगी। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मनीष ने 22 जुलाई को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मामले की जांच कर पैथोलॉजी संचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं पैथोलॉजी सेंटरों के नोडल अधिकारी डॉ. कमल किशोर वर्मा ने सेंटर का निरीक्षण किया। जांच में पंजीकरण संबंधी दस्तावेज नहीं मिले। इस पर संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
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शिकायत के बाद ही क्यों होती है जांच
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई पैथोलॉजी सेंटर और निजी अस्पताल बिना मानकों के संचालित होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं, लेकिन नियमित जांच नहीं की जाती।
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