फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Firozabad News ›   firozabad news taekwando day

Firozabad News: मेडल से आगे बढ़कर अब सुरक्षा का हथियार बन रही ताइक्वांडो

Fri, 04 Sep 2026 02:38 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2026 02:38 AM IST
विज्ञापन
firozabad news taekwando day
फोटो 25 आत्मरक्षा के गुर सीखतीं छात्राएं। संवाद
फिरोजाबाद। कभी ताइक्वांडो का मतलब बेटियों के लिए सिर्फ मेडल जीतना और प्रतियोगिताओं में नाम कमाना हुआ करता था, लेकिन अब सोच बदल रही है। बेटियां ताइक्वांडो को खेल के साथ-साथ अपनी सुरक्षा का हथियार भी बना रही हैं। सबसे खास बात यह है कि बेटों से ज्यादा बेटियां प्रशिक्षण ले रही हैं। प्राइवेट और निजी स्कूलों में भी आत्मरक्षा के गुर सिखाने पर जोर दिया जा रहा है।
विज्ञापन

छात्राओं का कहना है कि सड़क हो या स्कूल-कॉलेज से लौटने का रास्ता, आत्मरक्षा के गुर उन्हें डरने के बजाय परिस्थितियों का सामना करने का हौसला देते हैं। ताइक्वांडो प्रशिक्षण में छात्राओं को केवल किक और पंच ही नहीं सिखाए जाते, बल्कि खतरे को पहचानना, विपरीत परिस्थिति में खुद को बचाना और जरूरत पड़ने पर सामने वाले से दूरी बनाकर सुरक्षित निकलना भी सिखाया जाता है। यही वजह है कि अभिभावक भी अब बेटियों को ताइक्वांडो सिखाने के लिए आगे आ रहे हैं।
विज्ञापन


अब अकेले डर नहीं लगता
पहले ताइक्वांडो को सिर्फ एक खेल समझती थी। प्रशिक्षण शुरू करने के बाद समझ आया कि यह हमारी सुरक्षा के लिए भी बहुत जरूरी है। अब किसी अनजान परिस्थिति में घबराने के बजाय खुद को संभालने का आत्मविश्वास है। मेरा लक्ष्य प्रतियोगिता में मेडल जीतना तो है ही, साथ ही अपनी सुरक्षा के लिए सीखी तकनीकों को हमेशा याद रखना भी है। —जानवी कुलश्रेष्ठ, छात्रा
विज्ञापन
विज्ञापन


आत्मविश्वास जग रहा
ताइक्वांडो सीखने के बाद मेरे अंदर काफी बदलाव आया है। पहले छोटी-सी बात पर भी डर लगता था, लेकिन अब आत्मविश्वास बढ़ा है। प्रशिक्षण के दौरान हमें बताया जाता है कि खतरे से बचना सबसे पहली प्राथमिकता है और जरूरत पड़ने पर खुद को कैसे सुरक्षित रखना है। —वशिंका, छात्रा

मेडल से पहले आत्मविश्वास जरूरी :
ताइक्वांडो को केवल प्रतियोगिता और मेडल तक सीमित नहीं रखना चाहिए। खासकर बेटियों के लिए यह आत्मरक्षा और आत्मविश्वास का माध्यम है। हमारा उद्देश्य है कि हर बेटी खुद को सक्षम और सुरक्षित महसूस करे। अभिभावक जागरुक हुए हैं। भावुक यादव, प्रशिक्षक


हर स्कूल में आत्मरक्षा का प्रशिक्षण होना चाहिए
यदि स्कूल स्तर से ही छात्राओं को नियमित आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जाए तो वे छोटी-बड़ी आपात परिस्थितियों में ज्यादा जागरूक और तैयार रह सकती हैं। आज के समय में अभिभावक काफी जागरुक हुए हैं। बेटों से ज्यादा बेटियां आत्मरक्षा का प्रशिक्षण ले रही हैं। जयप्रकाश राजपूत, प्रशिक्षक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed