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Firozabad News: 32 साल पुरानी रियायशी कॉलोनी सुहागनगर बना व्यावसायिक नगर
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फोटो 11 सुहागनगर आवासीय भवन में संचालित वाटर प्लांट। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। शहर की सबसे पुरानी और 2800 आवासों की क्षमता वाली आवास विकास परिषद की सुहागनगर आवासीय कॉलोनी, अब जिम्मेदारों की अनदेखी और आवंटियों की मनमानी के चलते अपनी पहचान खो रही है। 32 साल पुरानी यह रियायशी कॉलोनी अब मुख्य मार्ग से लेकर सेक्टर-4 तक एक बड़े कॉमर्शियल एरिया (व्यावसायिक क्षेत्र) में तब्दील हो चुकी है।
आवासीय सुविधा के लिए बनी थी कॉलोनी : 1990 के दशक में शहरवासियों को व्यवस्थित आवासीय सुविधा देने के उद्देश्य से सुहाग नगर आवासीय परियोजना विकसित की गई थी। कॉलोनी को सेक्टर 1, 2, 3 और 4 में विभाजित किया गया था। लगभग 2800 आवासीय भूखंड इसमें काटे गए थे। अधिकारियों की अनदेखी और आवंटियों की मनमर्जी के कारण, इस आवासीय कॉलोनी का अधिकांश भाग अब व्यावसायिक गतिविधियों की गिरफ्त में है।
हर घर में दुकान, टैक्स निर्धारण में गड़बड़ी की आशंका: कॉलोनी के सभी सेक्टरों में अब रियायशी भवनों की जगह अलग-अलग तरह की दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुल गए हैं। इनमें परचून की दूकानें, कंपनियों के रिटेल काउंटर, हलवाई की दुकाने, कोरियर कंपनी, बैंक, फाइनेंस कंपनी और कई निजी कंपनियों के कार्यालय खुल गए हैं। इसके अलावा कई घरों में कैंटीन, मेडिकल स्टोर, अस्पताल तक संचालित हो रहे हैं।
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फिरोजाबाद। शहर की सबसे पुरानी और 2800 आवासों की क्षमता वाली आवास विकास परिषद की सुहागनगर आवासीय कॉलोनी, अब जिम्मेदारों की अनदेखी और आवंटियों की मनमानी के चलते अपनी पहचान खो रही है। 32 साल पुरानी यह रियायशी कॉलोनी अब मुख्य मार्ग से लेकर सेक्टर-4 तक एक बड़े कॉमर्शियल एरिया (व्यावसायिक क्षेत्र) में तब्दील हो चुकी है।
आवासीय सुविधा के लिए बनी थी कॉलोनी : 1990 के दशक में शहरवासियों को व्यवस्थित आवासीय सुविधा देने के उद्देश्य से सुहाग नगर आवासीय परियोजना विकसित की गई थी। कॉलोनी को सेक्टर 1, 2, 3 और 4 में विभाजित किया गया था। लगभग 2800 आवासीय भूखंड इसमें काटे गए थे। अधिकारियों की अनदेखी और आवंटियों की मनमर्जी के कारण, इस आवासीय कॉलोनी का अधिकांश भाग अब व्यावसायिक गतिविधियों की गिरफ्त में है।
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हर घर में दुकान, टैक्स निर्धारण में गड़बड़ी की आशंका: कॉलोनी के सभी सेक्टरों में अब रियायशी भवनों की जगह अलग-अलग तरह की दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुल गए हैं। इनमें परचून की दूकानें, कंपनियों के रिटेल काउंटर, हलवाई की दुकाने, कोरियर कंपनी, बैंक, फाइनेंस कंपनी और कई निजी कंपनियों के कार्यालय खुल गए हैं। इसके अलावा कई घरों में कैंटीन, मेडिकल स्टोर, अस्पताल तक संचालित हो रहे हैं।
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