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कई चूड़ी पॉट भट्ठियों में थमा उत्पादन का पहिया
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रफ़रोजाबाद ! ओधोगिक आस्थान में स्थित एक चूड़ी इकाई में पसरा सन्नाटा
- फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। कोरोना व ऑमिक्रोन के कारण फिरोजाबाद के चूड़ी उद्योग जगत पर अघोषित बंदी के आसार गहरा गए हैं। बाजार में सादा चूड़ी की मांग नहीं होने के कारण चूड़ी का उत्पादन करने वाली 40 पॉट भट्ठियों में कामकाज ठप हो चुका है। शेष इकाइयों में भी एक अथवा दो शिफ्ट में ही चूड़ी उत्पादन हो रहा है।
सुहागनगरी के परंपरागत चूड़ी उद्योग जगत पर फिर से मंदी की मार हावी है। दो साल तक मंदी की मार झेलने के बाद सुचारु हुए कांच चूड़ी उद्योग जगत में फिर से कोरोना संक्रमण का असर गहराने लगा है। शहर के बाहर की चूड़ी मंडियों खास तौर पर मेरठ, मुजफ्फरनगर, वाराणसी, कानपुर, गोरखपुर, आजमगढ़ और झांसी आदि से चूड़ी की डिमांड पूरी तरह से ठप हो गई है। बड़ी मंडियों से डिमांड नहीं आने का असर फिरोजाबाद के चूड़ी कारखानों में भी दिखना शुरू हो गया है। उठान नहीं होने के कारण चूड़ी बनाने वाली 40 पॉट भट्ठियों में बंदी के हालत हैं। वहीं, शेष अन्य टैंक भट्ठियों में भी तीन की जगह केवल एक-दो शिफ्ट में ही चूड़ी उत्पादन हो रहा है।
चूड़ी कामगारों पर बढ़ेगा आजीविका का संकट
फिरोजाबाद में चूड़ी कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों बहुसंख्य हैं। उत्पादन प्रक्रिया पर ब्रेक लगने से चूड़ी उद्योग से जुडे़ झलाई, जुड़ाई, छटाई और पकाई श्रमिकों के अलावा हजारों चूड़ी पल्लेदार, गोदामों में फैंसी चूड़ी तैैयार करने वाले कारीगरों की आजीविका पर भी प्रभावित होने के आसार हैं।
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इन कारखानों में चूड़ी उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित
नेशनल ग्लास, जीबी ग्लास, सर्वोदय, शृंगार ग्लास, इरफान, स्टार, ए-1 ग्लास, इंदिरा ग्लास, पॉपुलर ग्लास, रामहरि ग्लास, शिवम, एस राजीव, सौभाग्य ग्लास एवं चॉयस ग्लास इंडस्ट्रीज आदि
कारखानेदारों की बात-
देश के बड़ी चूड़ी मंडी से आर्डर पूरी तरह से ठप हो गए हैं। कारखानों में स्टॉक जमा करना पड़ रहा है। हालत नहीं सुधरे तो पहले पुराना स्टॉक खत्म करने के बाद ही उत्पादन प्रक्रिया को सुचारु करना हमारी मजबूरी है।
बिन्नी मित्तल अध्यक्ष द इंडस्ट्रीरियल कॉपरेटिस सोसायटी
कारखानों में स्टॉक जमा करने की भी एक सीमा है। पहले कोरोना संक्रमण के कारण विदेशों से चूड़ी के आर्डर प्रभावित हुए। अब चुनाव की घोषणा के बाद देेेश की चूड़ी मंडियों से भी डिमांड नहीं आ रही है। कई पॉट भट्ठियों में बंदी के हालत हैं।
हेमंत अग्रवाल चॉयस ग्लास मक्खनपुर, पदाधिकारी लघु उद्योग भारती
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सुहागनगरी के परंपरागत चूड़ी उद्योग जगत पर फिर से मंदी की मार हावी है। दो साल तक मंदी की मार झेलने के बाद सुचारु हुए कांच चूड़ी उद्योग जगत में फिर से कोरोना संक्रमण का असर गहराने लगा है। शहर के बाहर की चूड़ी मंडियों खास तौर पर मेरठ, मुजफ्फरनगर, वाराणसी, कानपुर, गोरखपुर, आजमगढ़ और झांसी आदि से चूड़ी की डिमांड पूरी तरह से ठप हो गई है। बड़ी मंडियों से डिमांड नहीं आने का असर फिरोजाबाद के चूड़ी कारखानों में भी दिखना शुरू हो गया है। उठान नहीं होने के कारण चूड़ी बनाने वाली 40 पॉट भट्ठियों में बंदी के हालत हैं। वहीं, शेष अन्य टैंक भट्ठियों में भी तीन की जगह केवल एक-दो शिफ्ट में ही चूड़ी उत्पादन हो रहा है।
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चूड़ी कामगारों पर बढ़ेगा आजीविका का संकट
फिरोजाबाद में चूड़ी कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों बहुसंख्य हैं। उत्पादन प्रक्रिया पर ब्रेक लगने से चूड़ी उद्योग से जुडे़ झलाई, जुड़ाई, छटाई और पकाई श्रमिकों के अलावा हजारों चूड़ी पल्लेदार, गोदामों में फैंसी चूड़ी तैैयार करने वाले कारीगरों की आजीविका पर भी प्रभावित होने के आसार हैं।
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इन कारखानों में चूड़ी उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित
नेशनल ग्लास, जीबी ग्लास, सर्वोदय, शृंगार ग्लास, इरफान, स्टार, ए-1 ग्लास, इंदिरा ग्लास, पॉपुलर ग्लास, रामहरि ग्लास, शिवम, एस राजीव, सौभाग्य ग्लास एवं चॉयस ग्लास इंडस्ट्रीज आदि
कारखानेदारों की बात-
देश के बड़ी चूड़ी मंडी से आर्डर पूरी तरह से ठप हो गए हैं। कारखानों में स्टॉक जमा करना पड़ रहा है। हालत नहीं सुधरे तो पहले पुराना स्टॉक खत्म करने के बाद ही उत्पादन प्रक्रिया को सुचारु करना हमारी मजबूरी है।
बिन्नी मित्तल अध्यक्ष द इंडस्ट्रीरियल कॉपरेटिस सोसायटी
कारखानों में स्टॉक जमा करने की भी एक सीमा है। पहले कोरोना संक्रमण के कारण विदेशों से चूड़ी के आर्डर प्रभावित हुए। अब चुनाव की घोषणा के बाद देेेश की चूड़ी मंडियों से भी डिमांड नहीं आ रही है। कई पॉट भट्ठियों में बंदी के हालत हैं।
हेमंत अग्रवाल चॉयस ग्लास मक्खनपुर, पदाधिकारी लघु उद्योग भारती