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निर्यातकों को माल भाडा एवं निर्यात पर मिलने वाले रिफंड की दरकार
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फिरोजाबाद। सुहागनगरी में कांच उद्योग निर्यात जगत की दुश्वारियां अभी भी बरकरार हैं। शहर के निर्यातक माल भाड़ा अनुदान, कुल निर्यात पर मिलने वाले रिफंड जैसी योजनाओं के लाभ को शासन की ओर उम्मीद भरी दृष्टि से देख रहे हैं। वहीं उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित होने से कांच उत्पादों की कीमतों में आया अंतर भी निर्यातकों के लिए बड़ी परेशानी का सबब है।
हर साल करीब 500 करोड़ का कारोबार करने वाला कांच निर्यात उद्योग जगत पटरी पर लौटने को शासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। कोविड के कारण उत्पन्न परिस्थितियां करीब 12 देशों में होने वाले कांच उत्पादों के निर्यात में बड़ा रोड़ा है। लॉकडाउन के बाद कांच निर्यातक शासन से मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं मालभाड़ा अनुदान एवं कुल निर्यात रिफंड के लिए स्थानीय निर्यातक एक साल से शासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। जानकारी के अनुसार उक्त दोनों योजनाओं के जरिए मिलने वाला करोड़ों का अनुदान अभी भी अधर में लटका हुआ है।
उत्पादन प्रभावित हुआ तो उत्पादों की लागत बढ़ी
- प्रमुख निर्यातकों की माने तो निर्यात योग्य कांच बोतल, थर्मल रिफिल व हैंडीक्राफ्ट आइटम बनाने की प्रक्रिया कोविड के कारण प्रभावित रहीं। उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित रहने के कारण निर्यातकों पर लैंड किराया, बिजली बिल एवं श्रमांश आदि का बोझ बढ़ा। जिससे आर्डर के तहत तैयार उत्पादों की लागत में भी एक से पांच प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हुई।
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कांच निर्यात उद्योग जगत से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य-
- अमेरिका, ब्राजील, हालैंड, बैल्जियम, स्पेन, चिली, आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, बैजिल्यम
-एक्सपोर्ट प्रमोशन कॉसिल ऑफ इंडिया के तहत फिरोजाबाद में 108 कांच इकाईयां पंजीकृत
-फिलहाल 40-50 इकाईयों में ही शुरू हुई है उत्पादन प्रक्रिया
-चाइना में सर्वाधिक होती थर्मल रिफिल की सप्लाई
देश में 200 करोड़ से अधिक के निर्यात में कांच उद्योग की 25 प्रतिशत की सहभागिता है। ईपीसीएच अनुबंधित इकाईयों को सरकार अन्य सहूलियतों के अलावा सर्वप्रथम मालभाड़ा एवं कुल निर्यात पर मिलने वाले अनुदान का भुगतान करे।
मुकेश बंसल टोनी अध्यक्ष ग्लास मैन्यफेक्चरर एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन
कोविड के कारण प्रभावित रहीं उत्पादन प्रक्रिया ने पूर्व में विदेशों से मिले आर्डरों की लागत बढ़ा दी है। सरकार कांच निर्यातकों को पटरी पर लाने के लिये खास पैकेज की घोषणा करनी चाहिये।
सुनील खरबंदा, निर्यातक
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हर साल करीब 500 करोड़ का कारोबार करने वाला कांच निर्यात उद्योग जगत पटरी पर लौटने को शासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। कोविड के कारण उत्पन्न परिस्थितियां करीब 12 देशों में होने वाले कांच उत्पादों के निर्यात में बड़ा रोड़ा है। लॉकडाउन के बाद कांच निर्यातक शासन से मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं मालभाड़ा अनुदान एवं कुल निर्यात रिफंड के लिए स्थानीय निर्यातक एक साल से शासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। जानकारी के अनुसार उक्त दोनों योजनाओं के जरिए मिलने वाला करोड़ों का अनुदान अभी भी अधर में लटका हुआ है।
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उत्पादन प्रभावित हुआ तो उत्पादों की लागत बढ़ी
- प्रमुख निर्यातकों की माने तो निर्यात योग्य कांच बोतल, थर्मल रिफिल व हैंडीक्राफ्ट आइटम बनाने की प्रक्रिया कोविड के कारण प्रभावित रहीं। उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित रहने के कारण निर्यातकों पर लैंड किराया, बिजली बिल एवं श्रमांश आदि का बोझ बढ़ा। जिससे आर्डर के तहत तैयार उत्पादों की लागत में भी एक से पांच प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हुई।
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कांच निर्यात उद्योग जगत से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य-
- अमेरिका, ब्राजील, हालैंड, बैल्जियम, स्पेन, चिली, आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, बैजिल्यम
-एक्सपोर्ट प्रमोशन कॉसिल ऑफ इंडिया के तहत फिरोजाबाद में 108 कांच इकाईयां पंजीकृत
-फिलहाल 40-50 इकाईयों में ही शुरू हुई है उत्पादन प्रक्रिया
-चाइना में सर्वाधिक होती थर्मल रिफिल की सप्लाई
देश में 200 करोड़ से अधिक के निर्यात में कांच उद्योग की 25 प्रतिशत की सहभागिता है। ईपीसीएच अनुबंधित इकाईयों को सरकार अन्य सहूलियतों के अलावा सर्वप्रथम मालभाड़ा एवं कुल निर्यात पर मिलने वाले अनुदान का भुगतान करे।
मुकेश बंसल टोनी अध्यक्ष ग्लास मैन्यफेक्चरर एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन
कोविड के कारण प्रभावित रहीं उत्पादन प्रक्रिया ने पूर्व में विदेशों से मिले आर्डरों की लागत बढ़ा दी है। सरकार कांच निर्यातकों को पटरी पर लाने के लिये खास पैकेज की घोषणा करनी चाहिये।
सुनील खरबंदा, निर्यातक