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खाली खजाने पर विकास की इमारत का ख्वाब
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Mon, 09 Feb 2015 11:43 PM IST
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फीरोजाबाद। शासन की महत्वपूर्ण एवं प्राथमिकता वाली डा. राममनोहर लोहिया समग्र विकास योजना को शासन से धनराशि नहीं मिली है। वित्तीय वर्ष 2014-15 के समापन में मात्र 50 दिन का समय शेष है, लेकिन बिजली, सड़क एवं पेयजल तक को जरूरत के अनुरूप बजट नहीं मिला।
आंगनबाड़ी केंद्र भवन स्थापना का काम धनाभाव के कारण अटक गया। डा. राममनोहर लोहिया समग्र ग्राम्य विकास योजना में 24 गांव चयनित किए। संपर्क मार्ग बनाने को 596.71 लाख की जरूरत थी लेकिन मिला 287.11 लाख। विद्युतीकरण के लिए डिमांड 955.03 लाख की भेजी लेकिन अभी तक एक भी पैसा नहीं मिला। पेयजल सुधार को 319.75 लाख में मात्र 135.73 लाख की धनराशि मिली। आंगनबाड़ी केंद्रों का भवन निर्माण को 37.66 लाख चाहिए लेकिन मिली फूटी कौड़ी नहीं। 73.19 लाख की लागत से सोलर लाइट लगाने का काम शुरू नहीं हुआ। शासन ने स्वीकृति तो दे दी लेकिन लाइटें नहीं भेजीं।
3557 शौचालयों के निर्माण को 426.84 लाख चाहिए लेकिन मिले सिर्फ 69.91 लाख रुपये। लोहिया आवास निर्माण कराने को 1812.25 लाख में 966.13 लाख रुपया ही मिला है। इंदिरा आवास निर्माण को फूटी कौड़ी तक नहीं मिली। सीसी निर्माण को अवश्य 428.09 की डिमांड के अनुरूप ही धनराशि जारी की है। लोहिया गांव के कुल 4982.10 लाख में जनवरी माह के अंत में 2110.66 रुपया मिला है।
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नौ करोड़ स्वीकृत, फूटी कौड़ी मिली नहीं
अल्पसंख्यक बाहुल्य बस्तियों के कायाकल्प एवं पेयजल किल्लत को दूर करने को भी धनराशि नहीं दी। प्रस्ताव तो जिले से 13.35 करोड़ का भेजा। शासन ने नौ करोड़ रुपया मंजूर किया। प्रदेश के अन्य अल्पसंख्यक बाहुल्य जिलों को बजट भी जारी कर दिया लेकिन कानपुर नगर, फीरोजाबाद एवं फैजाबाद जिलों को फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। आखिर अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्र के वाशिंदों के अरमानों पर पानी फिर गया। एमएसडीपी स्कीम के तहत शासन ने नौ करोड़ की स्वीकृति दी लेकिन पैसा एक नहीं दिया।
लालपुर मरघटी क्षेत्र में पांच करोड़ 59 लाख, पुराने तहसील प्रांगण में पानी की टंकी को बनाने को 3.35 करोड़, अब्बास नगर में पाइपलाइन बिछाने पर एक करोड़ 43 लाख रुपया तथा डूडा द्वारा हसमतनगर, सर सैय्यद नगर, ताड़ों वाली बगिया में नाली निर्माण, क्रास ओवर ड्रेन के साथ रिटेनिंग बाल का काम कराने को बजट प्रस्तावित किया गया था लेकिन यह सिर्फ फाइलों तक सीमित रहा।
यहां स्थापित की जाएंगी टीटीएसपी
मक्का कालोनी में बाबू खां शाहजहां मस्जिद, लाल मियां की दुकान के सामने, शरीफाबाद, रामगढ़ में फयाज चाचा के घर के पास, पुराने रामगढ़ थाने के पीछे पंजतन पाक मस्जिद, मदीना कालोनी अशफाक चाचा के पास, छपरिया फातिमा मस्जिद, मोमिन मस्जिद, चिश्तिया मस्जिद, दुर्गेश नगर, मूली वाला खेत, नूरी मस्जिद कश्मीरी गेट, फाजिल गंज, वारसी मस्जिद, डाकबंगला के पीछे, हसमत नगर, बिलाल नगर, अब्बासनगर शामिल हैं।
स्कूलों की रंगत हुई फीकी
फीरोजाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग की हालत बहुत अच्छी नहीं है। स्कूलों को रंग रोगन को मिलने वाला बजट तक नहीं मिला। कंप्यूटर आपरेटरों को रखा लेकिन 11 महीने बाद भी मानदेय नहीं मिला। परिषदीय स्कूलों के रख-रखाव व रंग रोगन को प्रति वर्ष पांच हजार रुपया मिलता था। शिक्षकों की माने तो इस बार फूटी कौड़ी नहीं मिली। बजट नहीं आया तो किसी प्रधानाचार्य ने रंग-रोगन भी नहीं कराया। टाट पट्टियों तक को नहीं बदल सके। वार्षिक परीक्षाएं कराए जाने के लिए बजट नही हैं। मजबूर बच्चों को पेपर मिलने के बजाय ब्लैक बोर्ड से प्रश्न उतारने पडे़ंगे। बाल अधिकार अधिनियम के तहत प्राइवेट स्कूलों में ही पढ़ने वाले बच्चों की फीस की धनराशि शासन ने अभी तक जारी नहीं की। कस्तूरबा गांधी विद्यालय (आवासीय) दबरई में पढ़ने वाले छात्रों के रजाई एवं गद्दों को बजट काफी देर से मिला।
शासन से बजट मिल रहा है, लोहिया गांव को तो प्राथमिकता दी जा रही है, कुछ विभागों को बजट यदि नहीं मिला है तो उनको शीघ्र मिलेगा। गांव संतृप्त होंगे। शिक्षा के साथ अल्पसंख्यक बस्तियों का कायाकल्प होगा।
सुजीत कुमार, सीडीओ फीरोजाबाद।
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आंगनबाड़ी केंद्र भवन स्थापना का काम धनाभाव के कारण अटक गया। डा. राममनोहर लोहिया समग्र ग्राम्य विकास योजना में 24 गांव चयनित किए। संपर्क मार्ग बनाने को 596.71 लाख की जरूरत थी लेकिन मिला 287.11 लाख। विद्युतीकरण के लिए डिमांड 955.03 लाख की भेजी लेकिन अभी तक एक भी पैसा नहीं मिला। पेयजल सुधार को 319.75 लाख में मात्र 135.73 लाख की धनराशि मिली। आंगनबाड़ी केंद्रों का भवन निर्माण को 37.66 लाख चाहिए लेकिन मिली फूटी कौड़ी नहीं। 73.19 लाख की लागत से सोलर लाइट लगाने का काम शुरू नहीं हुआ। शासन ने स्वीकृति तो दे दी लेकिन लाइटें नहीं भेजीं।
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3557 शौचालयों के निर्माण को 426.84 लाख चाहिए लेकिन मिले सिर्फ 69.91 लाख रुपये। लोहिया आवास निर्माण कराने को 1812.25 लाख में 966.13 लाख रुपया ही मिला है। इंदिरा आवास निर्माण को फूटी कौड़ी तक नहीं मिली। सीसी निर्माण को अवश्य 428.09 की डिमांड के अनुरूप ही धनराशि जारी की है। लोहिया गांव के कुल 4982.10 लाख में जनवरी माह के अंत में 2110.66 रुपया मिला है।
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नौ करोड़ स्वीकृत, फूटी कौड़ी मिली नहीं
अल्पसंख्यक बाहुल्य बस्तियों के कायाकल्प एवं पेयजल किल्लत को दूर करने को भी धनराशि नहीं दी। प्रस्ताव तो जिले से 13.35 करोड़ का भेजा। शासन ने नौ करोड़ रुपया मंजूर किया। प्रदेश के अन्य अल्पसंख्यक बाहुल्य जिलों को बजट भी जारी कर दिया लेकिन कानपुर नगर, फीरोजाबाद एवं फैजाबाद जिलों को फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। आखिर अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्र के वाशिंदों के अरमानों पर पानी फिर गया। एमएसडीपी स्कीम के तहत शासन ने नौ करोड़ की स्वीकृति दी लेकिन पैसा एक नहीं दिया।
लालपुर मरघटी क्षेत्र में पांच करोड़ 59 लाख, पुराने तहसील प्रांगण में पानी की टंकी को बनाने को 3.35 करोड़, अब्बास नगर में पाइपलाइन बिछाने पर एक करोड़ 43 लाख रुपया तथा डूडा द्वारा हसमतनगर, सर सैय्यद नगर, ताड़ों वाली बगिया में नाली निर्माण, क्रास ओवर ड्रेन के साथ रिटेनिंग बाल का काम कराने को बजट प्रस्तावित किया गया था लेकिन यह सिर्फ फाइलों तक सीमित रहा।
यहां स्थापित की जाएंगी टीटीएसपी
मक्का कालोनी में बाबू खां शाहजहां मस्जिद, लाल मियां की दुकान के सामने, शरीफाबाद, रामगढ़ में फयाज चाचा के घर के पास, पुराने रामगढ़ थाने के पीछे पंजतन पाक मस्जिद, मदीना कालोनी अशफाक चाचा के पास, छपरिया फातिमा मस्जिद, मोमिन मस्जिद, चिश्तिया मस्जिद, दुर्गेश नगर, मूली वाला खेत, नूरी मस्जिद कश्मीरी गेट, फाजिल गंज, वारसी मस्जिद, डाकबंगला के पीछे, हसमत नगर, बिलाल नगर, अब्बासनगर शामिल हैं।
स्कूलों की रंगत हुई फीकी
फीरोजाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग की हालत बहुत अच्छी नहीं है। स्कूलों को रंग रोगन को मिलने वाला बजट तक नहीं मिला। कंप्यूटर आपरेटरों को रखा लेकिन 11 महीने बाद भी मानदेय नहीं मिला। परिषदीय स्कूलों के रख-रखाव व रंग रोगन को प्रति वर्ष पांच हजार रुपया मिलता था। शिक्षकों की माने तो इस बार फूटी कौड़ी नहीं मिली। बजट नहीं आया तो किसी प्रधानाचार्य ने रंग-रोगन भी नहीं कराया। टाट पट्टियों तक को नहीं बदल सके। वार्षिक परीक्षाएं कराए जाने के लिए बजट नही हैं। मजबूर बच्चों को पेपर मिलने के बजाय ब्लैक बोर्ड से प्रश्न उतारने पडे़ंगे। बाल अधिकार अधिनियम के तहत प्राइवेट स्कूलों में ही पढ़ने वाले बच्चों की फीस की धनराशि शासन ने अभी तक जारी नहीं की। कस्तूरबा गांधी विद्यालय (आवासीय) दबरई में पढ़ने वाले छात्रों के रजाई एवं गद्दों को बजट काफी देर से मिला।
शासन से बजट मिल रहा है, लोहिया गांव को तो प्राथमिकता दी जा रही है, कुछ विभागों को बजट यदि नहीं मिला है तो उनको शीघ्र मिलेगा। गांव संतृप्त होंगे। शिक्षा के साथ अल्पसंख्यक बस्तियों का कायाकल्प होगा।
सुजीत कुमार, सीडीओ फीरोजाबाद।