{"_id":"587129344f1c1ba37815c634","slug":"dhaka-killed-the-mastermind-of-the-attack-on-the-cafe-reminiscent-of-tarisi","type":"story","status":"publish","title_hn":"ढाका कैफे पर हमले के मास्टरमाइंड की मौत से तारिषी की याद ताजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ढाका कैफे पर हमले के मास्टरमाइंड की मौत से तारिषी की याद ताजा
अमर उजाला ब्यूूराे, फीराेजाबाद
Updated Sat, 07 Jan 2017 11:15 PM IST
विज्ञापन
तारिषी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ढाका में कैफे पर हुए आतंकी हमले में सुहागनगरी की बेटी तारिषी की हत्या करने वाले आतंकवादी नुरूल इस्लाम उर्फ मारजन की मुठभेड़ में मौत से तारिषी के परिवार के लोगों को कुछ सुकून जरूर मिला है। हालांकि तारिषी को खोने का गम परिवार के लोग अभी भी भुला नहीं पाए हैं।
बता दें कि एक जुलाई 2016 को ढाका में कैफे पर आतंकी हमला हुआ था। इसमें सुहाग नगरी की बेटी तारिषी की हत्या कर दी गई थी। तारिषी के पिता संजीव जैन ढाका में कपडे़ का व्यापार करते हैं। वहीं संजीव जैन के परिवार के अन्य सदस्य फीरोजाबाद में सुहाग नगर कालोनी में रहते हैं। परिवार के सदस्यों को ढाका कैफे पर आतंकी हमले के मास्टर माइंड के मुठभेड़ में मौत की जानकारी से सुकून मिला। तारिषी के चाचा राकेश मोहन जैन ने कहा कि तारिषी को खोने का गम कभी नहीं भुला सकते लेकिन बुराई का अंत बुरा ही होता है। तारिषी के चाचा अजीत जैन और परिवार के अन्य सदस्य शहर से बाहर थे। तारिषी की मौसी इनी जैन ने भी आतंकी के मारे जाने पर संतोष व्यक्त किया। बता दें तारिषी की हत्या के बाद शव को भारत लाया गया था। यहां गुड़गांव में तारिषी के शव का अंतिम संस्कार किया गया था। तारिषी की हत्या के बाद सुहाग नगरी में कैंडल मार्च निकालकर श्रद्धांजलि सभाएं की गई थी।
विज्ञापन
बता दें कि एक जुलाई 2016 को ढाका में कैफे पर आतंकी हमला हुआ था। इसमें सुहाग नगरी की बेटी तारिषी की हत्या कर दी गई थी। तारिषी के पिता संजीव जैन ढाका में कपडे़ का व्यापार करते हैं। वहीं संजीव जैन के परिवार के अन्य सदस्य फीरोजाबाद में सुहाग नगर कालोनी में रहते हैं। परिवार के सदस्यों को ढाका कैफे पर आतंकी हमले के मास्टर माइंड के मुठभेड़ में मौत की जानकारी से सुकून मिला। तारिषी के चाचा राकेश मोहन जैन ने कहा कि तारिषी को खोने का गम कभी नहीं भुला सकते लेकिन बुराई का अंत बुरा ही होता है। तारिषी के चाचा अजीत जैन और परिवार के अन्य सदस्य शहर से बाहर थे। तारिषी की मौसी इनी जैन ने भी आतंकी के मारे जाने पर संतोष व्यक्त किया। बता दें तारिषी की हत्या के बाद शव को भारत लाया गया था। यहां गुड़गांव में तारिषी के शव का अंतिम संस्कार किया गया था। तारिषी की हत्या के बाद सुहाग नगरी में कैंडल मार्च निकालकर श्रद्धांजलि सभाएं की गई थी।
विज्ञापन