{"_id":"57fd3ee94f1c1b266c28e2d2","slug":"devotion-does-not-mean-plating-fluid-grow-tnyam","type":"story","status":"publish","title_hn":"भक्ति का मतलब द्रव्य चढ़ाना नहीं, तन्यम हो जाना है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भक्ति का मतलब द्रव्य चढ़ाना नहीं, तन्यम हो जाना है
amar ujala
Updated Wed, 12 Oct 2016 01:10 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
छदामीलाल जैन मदिर में आयोजित श्री मज्जिनेंद्र पूजन शिविर में आचार्यश्री ने कहा कि परमात्मा का स्वरूप देखने से अपने स्वरूप का ज्ञान होता है। सम्यक दर्शन, रत्नत्रय को धारण, संयम धारण, तप द्वारा अपने कर्मों को जलाकर अपने निज स्वरूप की प्राप्ति होती है। आचार्य श्री ने कहा कि आठ कर्मों को नष्ट कर, आठ गुणों को प्राप्त कर अपने स्वरूप की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि सामान्य लोगों को केवल देखा जाता है। दर्शन नहीं किया जाते। जो वंदनीय, पूज्यनीय, सर्वश्रेष्ठ हैं, उन्हें सारी दुनिया नमस्कार करती है। उनके दर्शन किए जाते हैं। सायंकाल महाआरती का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने झूमकर, नाचकर, भावविभोर होकर भक्ति का आनंद लिया। आरती के बाद सुधार एंड पार्टी द्वारा नृत्य नाटिका का मंचन किया गया।