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छदामी जैन मंदिर में है उत्तर भारत की सबसे बड़ी भगवान बाहुबली की प्रतिमा

Tue, 03 Sep 2019 11:49 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 03 Sep 2019 11:49 PM IST
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सुभाष तिराहा स्थित शहर का प्रमुख श्री छदामी लाल जैन मंदिर - फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। अमर उजाला द्वारा शुरू की गई श्रंखला में आज उत्तर भारत के प्रमुख जैन मंदिरों में शामिल श्री छदामी लाल जैन मंदिर के बारे में जानिए। श्री छदामी लाल जैन मंदिर में उत्तर भारत की सबसे ऊंची और देश की पांचवीं सबसे बड़ी भगवान बाहुबली की प्रतिमा स्थापित है। यह मंदिर जितना रमणिक है उससे कहीं अधिक रोचक भगवान बाहुबली की प्रतिमा का इतिहास है। श्री छदामी लाल जैन मंदिर शहर की एंट्री पर ही स्थित है। वास्तुकला में यह मंदिर देश के प्रमुख मंदिरों में माना जाता है। अन्य प्रांतों से पर्यटक इस मंदिर के दर्शन करने आते हैं।
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मंदिर में स्थापित भगवान बाहुबली की प्रतिमा उत्तर भारत की सबसे बड़ी प्रतिमा है। 42 फीट शिलालेख की इस प्रतिमा को कर्नाटक के कारकल से यहां सेठ छदामी लाल जैन ने मंगाया था। 64 पहियों की स्पेशल ट्रॉली से कारकल से यह प्रतिमा करीब साढे़ तीन माह में यहां आ सकी थी। स्पेशल ट्रॉली को खींचने के लिए चार ट्रैक्टर मंगाए गए थे। वर्ष 1975 में 130 टन वजन की इस भव्य प्रतिमा की जब स्थापना हुई तब पूरे देश से पांच लाख से अधिक लोग सुहाग नगरी में आए थे। तत्कालीन उपराष्ट्रपति बीडी जत्थी भी इस समारोह में शामिल हुए।
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संगमरमर से दस साल में बन कर तैयार हुआ था मंदिर
फिरोजाबाद। सेठ छदामीलाल जैन ने सन 1947 में सेठ छदामीलाल जैन ट्रस्ट की स्थापना की थी। उन्होंने सन 1949 में कई बीघा जमीन खरीदी। वर्ष 1950 में टिन शेड में मंदिर की स्थापना की गई थी। 1951 में टीनशेड में पंचकल्याणक कराकर प्रतिमा स्थापित की। तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत भी इस पंचकल्याण महोत्सव में शामिल हुए। वरिष्ठ अधिवक्ता अनूपचंद्र जैन ने बताया कि सेठ छदामी लाल के मन में भव्य मंदिर बनाने का भाव जागा। उन्होंने जयपुर के कारीगरों को बुलाया और संगमरमर बड़ी मात्रा में खरीद लिया। 10 साल में इस विशाल मंदिर का कार्य पूर्ण हुआ। 1961 में भगवान महावीर की प्रतिमा का पंचकल्याणक हुआ। तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्ता सहित देश की कई हस्तियां भी शामिल हुईं। उस समय बिजली झालर इस मंदिर में पहली बार लगाई गई थी।
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