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ड्रा से बचने के लिए उद्योगपति ने रचा अपहरण का ड्रामा, 5 जुलाई को करना था 30 करोड़ का भुगतान

Mon, 31 Jul 2017 12:11 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, फिरोजाबाद
ब्यूरो/ अमर उजाला, फिरोजाबाद Updated Mon, 31 Jul 2017 12:11 AM IST
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Industrialist created drama for kidnapping, police revealed to avoid draw
फाइल
फिरोजाबाद में बीसी चलाने वाले उद्यमी संजीव गुप्ता ने पांच जुलाई को होने वाले सिक्का स्कीम के आखिरी ड्रा में 30 करोड़ का भुगतान देने से बचने को अपने अपहरण का ड्रामा रचा था। बीसी चलाते-चलाते संजीव गुप्ता का इतना दबदबा हो गया कि उसने अपना ही लकी ड्रा का कूपन निकाल दिया। फिरोजाबाद के उद्यमियों और कारोबारियों के बीच यह ड्रा ‘सिक्का’ के नाम से चर्चित हो गया। इसमें संजीव ने पांच हजार रुपये में सदस्य बनाए। एक उसका लक्ष्य हजार सदस्य बनाना था।
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सैकड़ों सदस्य हर महीने होने वाले लकी ड्रा में बंपर इनाम और लगाए गए धन की वापसी 12 प्रतिशत की ब्याज दर से होने के लालच में सैकड़ों लोग सदस्य बन गए। इसके बाद तो संजीव गुप्ता के हाथों में बिना कुछ किए ही करोड़ों रुपये आने लगे। हर महीने शानदार पार्टी होती और एक ड्रा रखा जाता था। पांच सितारा होटलों की महफिल में ड्रा होते। पांच हजार के सिक्के का आखिरी ड्रा पांच जुलाई को होना था।
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बताते हैं कि संजीव गुप्ता को करीब 30 करोड़ रुपये सिक्का में पैसा लगाने वालों को वापस करना है। दो महीने से संजीव ने सभी भुगतान बंद कर दिए थे। ड्रा के लिए उस पर लगातार दबाव भी बन रहा था। यह पूरा खेल गैर कानूनी था इसलिए इसमें पैसा लगाने वाले खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं।
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70 महीने की योजना बीच में ही बंद की
तीन हजार रुपये प्रति माह की स्कीम पर 70 महीने की किटी से नाम से एक लकी ड्रा स्कीम भी संजीव ने शुरू की थी। बताते हैं कि इस स्कीम में संजीव गुप्ता की पत्नी सारिका गुप्ता की मदद से शहर की महिलाओं ने भी कार्ड खरीदे थे। यह स्कीम बीच में ही बंद कर दी गई।

बैंकाक और नेपाल में हुई थी बैठकें
बीसी किंग के नाम से पहचाने बनाने वाले उद्यमी संजीव गुप्ता ने पांच करोड़ तक की बीसी डाली थी। इसमें शहर के उद्योगपतियों के अलावा डाक्टरों ने भी निवेश किया था। बैंकाक में इसकी आखिरी बैठक हुई थी। सभी व्यवस्थाएं संजीव गुप्ता ने तय की थी। एक करोड़ की बीसी की मीटिंग नेपाल में हुई थी। हाईवे स्थित सागर रत्ना रेस्टोरेंट में भी संजीव साझीदार हैं। बीसी, सिक्का और लकी ड्रा की नियमित बैठकें संजीव के आर्चिट ग्रीन आवास या सागर रत्ना रेस्टोरेंट में ही होती थीं।

Industrialist created drama for kidnapping, police revealed to avoid draw
फाइल
साक्ष्यों के साथ शासन तक पहुंचा पुलिस का ‘झूठ’
उद्यमी संजीव गुप्ता के अपहरण का खुलासा भाजपाइयों के गले नहीं उतरा। भाजपा नेताओं ने पुलिस का यह ‘झूठ’ साक्ष्यों के साथ शासन तक पहुंचा दिया है। भाजपा के एक जनप्रतिनिधि ने मुख्यमंत्री के ओएसडी,  गृह सचिव, प्रभारी मंत्री और डीजीपी को पूरी रिपोर्ट भेजी है। एसएसपी की प्रेस कांफ्रेंस की वीडियो रिकार्डिंग और घटना से जुड़े सवालों पर पुलिस अधिकारियों के गोलमोल जवाबों के साक्ष्य भी शासन को उपलब्ध कराए हैं। 

कहां है दोनों मोबाइल
संजीव गुप्ता का आखिर बार फोन 28 जुलाई की दोपहर करीब 2.30 बजे खुला था। तब से फोन लगातार बंद है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि संजीव गुप्ता का जब अपहरण नहीं हुआ तो उनका मोबाइल फोन कहां है? पुलिस का कहना है कि संजीव के दोनों मोबाइल गायब हैं। वह यह पता नहीं कर पायी है कि फोन किसके पास हैं।

सुनियोजित था बिना सीसीटीवी की नजर में आए निकलना 
अपहरण के ड्रामे में सीसीटीवी से बचते हुए शहर ही नहीं प्रदेश से निकलने की योजना सुनियोजित थी। प्लानिंग के तहत संजीव की गाड़ी टूंडला टोल वाले रास्ते पर न जाकर ककरऊ जाने वाले रास्ते पर एक ढाबे से होकर निकाली गई ताकि सीसीटीवी से बचा जा सके। इस तरह अवागढ़ - एटा वाले रास्ते से होते हुए संजीव प्रदेश की सीमा से ही बाहर चले गए।

22 जुलाई को संजीव की लोकेशन अवागढ़ और 23 जुलाई को एटा में मिली थी। वहीं शनिवार को मीडिया से एसएसपी अजय कुमार का कहना था कि उन्हें एक गवाह मिला है जो बता रहा है कि 23 जुलाई को संजीव फिरोजाबाद में ही देखे गए। यह बात संजीव के मोबाइल की लोकेशन से मैच नहीं खाती। 

सात दिन तक नहीं की शेविंग
पुलिस सामने आए तो उसकी स्थिति अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूटने जैसे हालात दर्शाने के लिए संजीव ने रणनीति के तहत सात दिन तक शेविंग नहीं की। वर्ना चकाचौंध जीवन जीने वाला संजीव प्रतिदिन फिट रहता था। उसकी कोठी में ही ब्यूटी पार्लर था।

Industrialist created drama for kidnapping, police revealed to avoid draw
फाइल
पुलिस ने दर्ज किए नीता, प्रदीप और अमित के बयान
अपहरण का ड्रामा रचने वाले  संजीव गुप्ता की पत्नी सारिका गुप्ता की ओर से दर्ज कराई अपहरण की रिपोर्ट पर पुलिस ने रविवार को नीता पांडेय, प्रदीप पांडेय और अमित गुप्ता के आवास पर जाकर उनरे बयान दर्ज किए। सुहागनगर निवासी अमित गुप्ता के आवास पर एसओ टूंडला ने उनके संजीव गुप्ता से संबंधों की बाबत जानकारी हासिल की।

अमित ने बताया संजीव गुप्ता उसके रिश्ते में फूफा और सारिका  बुआ है। अमित ने बताया कि मेरे खुद ही 24 लाख रुपया संजीव ने लिए थे जो अभी तक नहीं दिए। पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने के बाद उनकी मौजूदगी और संजीव से संपर्क होने के बारे में भी पूछताछ की। इसके बाद पुलिस टीम नीता पांडेय के आवास पर पहुंची। पुलिस ने नीता पांडेय के साथ ही उनके पति प्रदीप पांडेय का बयान दर्ज किया।नीता पांडेय ने बताया कि पुलिस ने उनसे संजीव के बारे में पूछताछ की। 

दो घंटे पूछताछ में संजीव ने फिर अलावा अपहरण का राग
फिरोजाबाद। अपहरण का ड्रामा रचने वाला संजीव गुप्ता ने रविवार को दो घंटे तक हुई पूछताछ में एक बार फिर अपहरण का राग अलापा। शनिवार रात सीओ टूंडला धर्मेद्र सिंह, कोतवाल टूंडला अरुण कुमार और चौकी प्रभारी राजा का ताल केपी सिंह के सवालों के जवाब में संजीव ने बयान दिया कि वह हाईवे स्थित होटल सागर रत्ना से उसायनी स्थित एडीफाई स्कूल गए थे।

यहां से उनकी गाड़ी में पीछे एक व्यक्ति छुप कर बैठ गया था। वह स्कूल से जैसे ही घर के लिए चले तभी कार के पीछे छुपे बैठे युवक ने उन पर पिस्टल लगा दी थी। कार को उसायनी से शहर की तरफ न लाकर बाईपास मार्ग से बैंदी, ककरऊ कोठी लेकर पहुंचा। इसके साथ ही कर को जिला जेल होते हुए जलेसर, एटा होते हुए गभाना ले गया। यहां कार में पहले से सवार व्यक्ति के और साथी मिल गए। गभाना में बदमाशों ने उसको नशीला पदार्थ खिला दिया। इसके बार वह बेहोश हो गया। 

कुछ सवालों के नहीं दे पाए जवाब
संजीव उसायनी स्थित शिक्षण संस्था पहुंचे तो उस वक्त बारिश हो रही थी। चौकीदार ने संजीव गुप्ता से स्कूल के अंदर बैठने के लिए कहा था लेकिन संजीव ने न तो कार के गेट खोले और न ही वह कार से उतरे। ऐसे में उनकी कार में कौन सवार हो गया? इसके बारे में सवाल करने पर संजीव संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। वहीं गांव बैंदी के समीप एक होटल संचालक ने संजीव को कार के अंदर अकेला देखा था और वह खुद ड्राइव कर रहे थे। इस पर भी उन्होंने कुछ नहीं कहा। 

कोठी में कैद रहे संजीव, पुलिस बाहर देती रही पहरा
फिरोजाबाद। रविवार को संजीव गुप्ता परिवार के साथ ऑर्चिट ग्रीन स्थित कोठी में ही कैद रहे।  गेट पर पुलिस का पहरा रहा। ऐसे में उनके करीबियों और रिश्तेदारों ने भी दूरियां बना ली। रविवार को कोठी के बाहर सन्नाटा रहा।
 
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