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शिक्षकों की मौत के मुआवजे पर भारी नियम, शिक्षक संगठन कर रहे बदलाव की मांग

Wed, 19 May 2021 11:40 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 19 May 2021 11:40 PM IST
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फिरोजाबाद। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की ड्यूटी करने के बाद बीमार हुए शिक्षकों ने दम तोड़ दिया। शिक्षकों की मौत की बाद शिक्षक संगठन उनके परिवारिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए प्रयास करते रहे। मगर मुुआवजे के लिए जो दायरा बनाया है, उसमें जनपद का एक भी मृतक शिक्षक नहीं आ रहा है। आदेश के बाद सभी शिक्षक और संगठन हैरत में हैं। शिक्षक संगठनों ने नियमों में बदलाव की मांग की है।
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शिक्षक संगठन दावा कर रहे हैं कि जनपद में 12 से ज्यादा शिक्षकों की मौत हो चुकी है। जो चुनाव ड्यूटी करने के बाद बीमार हुए थे। चुनाव के लिए जारी शासनादेश में चुनाव की ड्यूटी के दौरान मरने वाले कर्मचारियों को अनुग्रह धनराशि देने का आदेश दिया गया था। शासनादेश में कहा है कि ड्यूटी पर घर से जाने ड्यूटी करने और घर वापसी तक जिन कर्मचारियों की मृत्यु होगी, उन्हें अनुग्रह धनराशि दी जाएगी। शिक्षक संगठन शासन से शीघ्र ही नियमों में बदलाव कर मृतक शिक्षकों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
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- यह सरकार की असंवेदनशीलता है। ड्यूटी पर ही मृत्यु हुई तो माना कि अनुकम्पा का पात्र है। जबकि कोरोना से डरा हुआ कर्मचारी शासन के आदेश के अनुसार घर से निकलने से भी बच रहा था। क्योंकि उस पर उसके संपूर्ण परिवार का दायित्व है। शासन के आदेश के बाद कर्मचारी को न चाहते हुए भी चुनाव प्रशिक्षण, चुनाव ड्यूटी और फिर मतगणना भी करनी ही पड़ी। इन सभी कार्यक्रमों में अव्यवस्थाएं थीं। सरकार नियमों में बदलाव कर शिक्षकों को मुआवजा दे। - कल्पना राजौरिया, नगर संयोजिका उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ।
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- हमारे साथी शिक्षक शासन-प्रशासन की लापरवाही की भेंट चढ़ गए। अब जब शासन के आदेश से ही कार्य करने में वे संक्रमित होकर काल के गाल में समा गए तो उनकी मृत्यु का कारण चुनाव को नहीं मान रहा है शासन। अब सवाल यह है कि कुछ दिनों के उपरांत संक्रमण फैलने के बाद ही व्यक्ति की मौत होती है। हमारे तमाम शिक्षक साथियों की संक्रमण से असामयिक मृत्यु के उपरांत मुआवजा दिया जाना चाहिए। - डॉ. नीतू सिंह, जिला महिला संयोजिका, अटेेवा।
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