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कोरोना की आशंका पर परीक्षण कराने वालों से बातचीत परिवार, दोस्तों का रखा ध्यान तो खुद पहुंचे जांच कराने
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फिरोजाबाद। कोरोना के संदेह पर भी लोग जांच कराने से बच रहे हैं। बाहर से आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग को सूचना नहीं दे रहे हैं। हालांकि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि अपने परिवार, दोस्तों और आस-पड़ोसियों के स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए जांच कराए। सुहागनगरी के कुछ लोगों ने स्वयं के जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दिया। शंका होने पर डरे नहीं अपितु जागरूक नागरिक होने का परिचय देते हुए स्वयं कोरोना की जांच कराने पहुंचे। लोगों को भी इस प्रकार की जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए।
‘जांच से डरें नहीं, संदेह है तो खुद जांच कराने को कहें’
चूड़ी व्यवसाय अंशुल अग्रवाल ने स्वयं स्वास्थ्य विभाग को सूचना देकर कोरोना की जांच कराई। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम को बताया कि वह 21 मार्च को आगरा निवासी अपने दोस्त से मिले थे और 26 मार्च को उसे कोरोना की पुष्टि हो गई थी। इसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम उन्हें मेडिकल कॉलेज ले गई, जहां मुंह से लार का सैंपल लिया गया। जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई तो स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें घर जाने की अनुमति दे दी। उन्होंने कहा कि कोरोना खतरनाक बीमारी है। इसलिए हर नागरिक को जिम्मेदारी समझनी चाहिए। यदि बाहर से आएं तो स्वयं विभाग को सूचित कर दें। जांच में पॉजिटिव निकलने पर भी समय से इलाज होगा और परिवार के सदस्य, दोस्त, आस-पड़ोस के लोग भी बचे रहेंगे।
‘परिजनों करें महफूज, समाज के न बनें दुश्मन’
सेवार्थ संस्थान ट्रॉमा सेंटर के चिकित्सक डॉ. निमित गुप्ता ने बताया कि वह एक माह पूर्व दुबई से आए मित्र से मिले थे। तब कोरोना के मामले बढ़ रहे थे। वह भी प्रतिदिन मरीजों को देखते हैं। ऐसे में उन्होंने अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी और स्वयं जांच कराने मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। यहां उनका सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया, जो नेगिटिव आया। उन्होंने बताया कि जांच कराने से पूर्व डर था कि विदेश से आए दोस्त से संपर्क में आने के बाद यदि उन्हें कोरोना हुआ तो बड़ी संख्या में लोग बीमारी की जद में आ जाएंगे। उन्होंने बताया कि समाज, अपने परिवार की चिंता करते हुए उन्होंने जांच कराई।
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‘अफवाह न फैलाएं, जांच में पूरा सहयोग करें’
सुहागनगर निवासी मनोज ठाकुर बताते हैं कि मेरी बेटी हैदराबाद से पढ़कर आई थी। आते ही वह नहाई और उसे दर्द होने लगा। बेटी ने ही मुझसे कहा कि पापा जांच करा दो, मुझे दिक्कत है। मैं बेटी को मेडिकल कॉलेज लेकर गया। वहां जांच से इंकार कर दिया गया। इस पर उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह कर जांच कराई। इसके बाद चिकित्सकों ने कहा कि जांच के बाद पूरे परिवार को क्वारंटीन होना होगा। इस पर उन्होंने सहमति जताई और जांच कराई। रिपोर्ट भी नेगेटिव आ गई। लोगों से भी आग्रह है कि वह जांच कराएं। जांच कराने से कतई न छुपे। जांच में रिपोर्ट पॅाजिटिव आती तो समय से इलाज मिलता। साथ ही हमसे संपर्क में आने वाले लोग भी बचते। समाज के सहयोगी बनें, न की दुश्मन बनें।
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‘जांच से डरें नहीं, संदेह है तो खुद जांच कराने को कहें’
चूड़ी व्यवसाय अंशुल अग्रवाल ने स्वयं स्वास्थ्य विभाग को सूचना देकर कोरोना की जांच कराई। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम को बताया कि वह 21 मार्च को आगरा निवासी अपने दोस्त से मिले थे और 26 मार्च को उसे कोरोना की पुष्टि हो गई थी। इसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम उन्हें मेडिकल कॉलेज ले गई, जहां मुंह से लार का सैंपल लिया गया। जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई तो स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें घर जाने की अनुमति दे दी। उन्होंने कहा कि कोरोना खतरनाक बीमारी है। इसलिए हर नागरिक को जिम्मेदारी समझनी चाहिए। यदि बाहर से आएं तो स्वयं विभाग को सूचित कर दें। जांच में पॉजिटिव निकलने पर भी समय से इलाज होगा और परिवार के सदस्य, दोस्त, आस-पड़ोस के लोग भी बचे रहेंगे।
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‘परिजनों करें महफूज, समाज के न बनें दुश्मन’
सेवार्थ संस्थान ट्रॉमा सेंटर के चिकित्सक डॉ. निमित गुप्ता ने बताया कि वह एक माह पूर्व दुबई से आए मित्र से मिले थे। तब कोरोना के मामले बढ़ रहे थे। वह भी प्रतिदिन मरीजों को देखते हैं। ऐसे में उन्होंने अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी और स्वयं जांच कराने मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। यहां उनका सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया, जो नेगिटिव आया। उन्होंने बताया कि जांच कराने से पूर्व डर था कि विदेश से आए दोस्त से संपर्क में आने के बाद यदि उन्हें कोरोना हुआ तो बड़ी संख्या में लोग बीमारी की जद में आ जाएंगे। उन्होंने बताया कि समाज, अपने परिवार की चिंता करते हुए उन्होंने जांच कराई।
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‘अफवाह न फैलाएं, जांच में पूरा सहयोग करें’
सुहागनगर निवासी मनोज ठाकुर बताते हैं कि मेरी बेटी हैदराबाद से पढ़कर आई थी। आते ही वह नहाई और उसे दर्द होने लगा। बेटी ने ही मुझसे कहा कि पापा जांच करा दो, मुझे दिक्कत है। मैं बेटी को मेडिकल कॉलेज लेकर गया। वहां जांच से इंकार कर दिया गया। इस पर उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह कर जांच कराई। इसके बाद चिकित्सकों ने कहा कि जांच के बाद पूरे परिवार को क्वारंटीन होना होगा। इस पर उन्होंने सहमति जताई और जांच कराई। रिपोर्ट भी नेगेटिव आ गई। लोगों से भी आग्रह है कि वह जांच कराएं। जांच कराने से कतई न छुपे। जांच में रिपोर्ट पॅाजिटिव आती तो समय से इलाज मिलता। साथ ही हमसे संपर्क में आने वाले लोग भी बचते। समाज के सहयोगी बनें, न की दुश्मन बनें।