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सफाई व्यवस्था निजी हाथों में देने की तैयारी, राह नहीं आसान
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नगर निगम के जलकल विभाग में खडे सफाई वाहन
- फोटो : FIROZABAD
शासन से शहर की सफाई व्यवस्था निजी हाथों में सौंपने की तैयारी से मंगलवार को नगर निगम में हलचल रही। शहर की सफाई व्यवस्था यूं तो पटरी से उतरी हुई है निजी हाथों में सफाई का जिम्मा देने से व्यवस्था में सुधार की कुछ उम्मीद की जा रही है। नगर निगम में 1753 सफाई कर्मचारी हैं।
वर्तमान में शहर की सफाई संसाधनों की बात की जाए तो यहां मानक के अनुरूप सफाई कर्मचारियों की तैनाती नहीं है। नगर निगम में 1753 सफाई कर्मचारी तैनात है। जबकि शहर की आबादी वर्तमान समय में करीब सात लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार शहरी क्षेत्र की आबादी छह लाख से अधिक है। ऐसी स्थिति में सफाई कर्मचारियों की संख्या भी 2100 होनी चाहिए। मानक के अनुरूप दस हजार की आबादी पर 28 कर्मचारियों को तैनात किया जाता है। स्थायी कर्मचारी इस व्यवस्था का विरोध कर सकते हैं।
वैसे नगर निगम ठेके के कर्मचारियों से भी काम ले रहा है लेकिन सफाई कितनी हो रही है इसका अंदाजा शहर में जगह-जगह लगे कूडे़ के ढेरों से लगा सकते हैं। ठेके के कर्मचारियों को लगाने में भी खेल होता है। नाला गैंग लेकर कर्मचारियों की तैनाती तक में गड़बड़ी है।
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नगर निगम में सफाई कर्मचारी - 1753
सफाई व्यवस्था के लिए कुल वाहनों की संख्या 104
सफाई व्यवस्था में लगे वाहनों की कुल संख्या 70
खराब पड़े वाहनों की संख्या 34
नगर निगम में कुल वार्ड 70
डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन वाले वार्ड - 22
शासन ने कुछ सोच कर ही सफाई व्यवस्था को निजी हाथों में देनी की तैयारी की है। पूरी योजना सामने आए तभी कहा जा सकता है कि इससे कितना सुधार होगा। पहली जरूरत तो आबादी के अनुसार सफाईकर्मी तैनात करने की है।
हरिओम वर्मा, पार्षद नगर निगम
शहर की सफाई व्यवस्था निजी कंपनी के हाथों में देने संबंधी शासन की तैयारी की जानकारी नहीं मिली है। लेकिन कुछ समय पूर्व शहर की सड़कों के बारे में जानकारी मांगी गई थी। जो भेज दी गई थी। शासन से जो आदेश आएगा उसका पालन किया जाएगा। डोर टू डोर कूडा कलेक्शन का जो प्लान तैयार किया गया था, वह सफल होता नजर आ रहा है।
विजय कुमार, नगर आयुक्त
सरकार यदि सफाई व्यवस्था को जिम्मा निजी कंपनी के हाथों में देती है। तो उत्तर प्रदेश सफाई मजदूर संघ विरोध करेगा। हम हड़ताल करने को बाध्य होंगे। किसी भी व्यवस्था का निजीकरण कर्मचारियों के हक पर कुठाराघात है।
अमित कुमार वाल्मीकि, प्रदेश महासचिव सफाई मजदूर संघ
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वर्तमान में शहर की सफाई संसाधनों की बात की जाए तो यहां मानक के अनुरूप सफाई कर्मचारियों की तैनाती नहीं है। नगर निगम में 1753 सफाई कर्मचारी तैनात है। जबकि शहर की आबादी वर्तमान समय में करीब सात लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार शहरी क्षेत्र की आबादी छह लाख से अधिक है। ऐसी स्थिति में सफाई कर्मचारियों की संख्या भी 2100 होनी चाहिए। मानक के अनुरूप दस हजार की आबादी पर 28 कर्मचारियों को तैनात किया जाता है। स्थायी कर्मचारी इस व्यवस्था का विरोध कर सकते हैं।
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वैसे नगर निगम ठेके के कर्मचारियों से भी काम ले रहा है लेकिन सफाई कितनी हो रही है इसका अंदाजा शहर में जगह-जगह लगे कूडे़ के ढेरों से लगा सकते हैं। ठेके के कर्मचारियों को लगाने में भी खेल होता है। नाला गैंग लेकर कर्मचारियों की तैनाती तक में गड़बड़ी है।
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नगर निगम में सफाई कर्मचारी - 1753
सफाई व्यवस्था के लिए कुल वाहनों की संख्या 104
सफाई व्यवस्था में लगे वाहनों की कुल संख्या 70
खराब पड़े वाहनों की संख्या 34
नगर निगम में कुल वार्ड 70
डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन वाले वार्ड - 22
शासन ने कुछ सोच कर ही सफाई व्यवस्था को निजी हाथों में देनी की तैयारी की है। पूरी योजना सामने आए तभी कहा जा सकता है कि इससे कितना सुधार होगा। पहली जरूरत तो आबादी के अनुसार सफाईकर्मी तैनात करने की है।
हरिओम वर्मा, पार्षद नगर निगम
शहर की सफाई व्यवस्था निजी कंपनी के हाथों में देने संबंधी शासन की तैयारी की जानकारी नहीं मिली है। लेकिन कुछ समय पूर्व शहर की सड़कों के बारे में जानकारी मांगी गई थी। जो भेज दी गई थी। शासन से जो आदेश आएगा उसका पालन किया जाएगा। डोर टू डोर कूडा कलेक्शन का जो प्लान तैयार किया गया था, वह सफल होता नजर आ रहा है।
विजय कुमार, नगर आयुक्त
सरकार यदि सफाई व्यवस्था को जिम्मा निजी कंपनी के हाथों में देती है। तो उत्तर प्रदेश सफाई मजदूर संघ विरोध करेगा। हम हड़ताल करने को बाध्य होंगे। किसी भी व्यवस्था का निजीकरण कर्मचारियों के हक पर कुठाराघात है।
अमित कुमार वाल्मीकि, प्रदेश महासचिव सफाई मजदूर संघ