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शास्त्रीय संगीत के कारण्ा हिंदुस्तान में बसी कार्मिन
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Tue, 03 Nov 2015 11:23 PM IST
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कहते हैं संगीत में वो जादू है जो दर्द को भी छूमंतर कर देता है। दु:ख में भी खुशी का अहसास करा देता है। कुछ इसी प्रकार का वाकया रोमानिया देश की कार्मिन के साथ हुआ। उन्हें शास्त्रीय संगीत इतना रास आया कि आज उनका दिल हिंदुस्तानी बन चुका है। पांच साल में कार्मिन ने इतनी अच्छी तरह हिंदी बोलना और लिखना सीख लिया है, जो जन्म से हिंदुस्तान में रह रहे एक भारतीय को आता है।
सन 2008 में रोमानिया देश की कार्मिन पहली बार भारत आईं थी। उन्होंने शास्त्रीय संगीत सुना। स्वरों एवं वीणा वादन की मधुर तरंग से कार्मिन प्रभावित हुई। उन्होंने हिंदी केंद्रीय संस्थान में प्रवेश ले लिया और रोमानिया चली गई। इसके बाद उन्होंने शास्त्रीय संगीत से लगाव के कारण उन्होंने रोमानिया में बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी में आईटी में टेक्निकल सपोर्टर की जॉब तक को छोड़ दिया। सरकार से स्कॉलरशिप मिली और आगरा के हिंदी संस्थान में पुन: लौट आईं। आज रोमानिया की कार्मिन हिंदुस्तानियों की तरह हिंदी और पढ़ना लिखना जानती हैं।
अब वह दिल्ली में शास्त्री संगीत से ग्रेजुएशन कर रही है। कार्मिन ने बताया कि ग्रेजुएशन करने के बाद वह रोमानिया में संचालित स्वर अर्पण कल्चर सेंटर पर हिंदी सिखाएंगी और शास्त्रीय संगीत का प्रचार प्रसार करेंगी। उन्हें लगता है कि रोमानिया में भी हिंदी एवं शास्त्रीय संगीत को लोग बेहद पसंद करते हैं। कार्मिन फीरोजाबाद में शास्त्रीय संगीत का स्कूलों में प्रचार-प्रसार करने एवं कार्यक्रमों की प्रस्तुति देने आई हैं।
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स्कूलों में अनिवार्य करना चाहिए संगीत : महुआ मुखर्जी
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। क्लासिकल म्यूजिक का प्लेटफार्म बहुत मजबूत है। आज भी चलते-फिरते लोग क्लासिक गीत गुनगुनाते नजर आ जाते हैं। इसे सरकार को सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य कर देना चाहिए। यह बात पटियाला घराने की प्रसिद्ध गायकर महुआ मुखर्जी ने प्रेसवार्ता में कहीं।
उन्होंने कहा कि फीरोजाबाद में कई स्कूलों में प्रस्तुति के दौरान शास्त्रीय संगीत के दौरान छात्रों ने खूब तालियां बजाईं। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत में वो ताकत है कि विदेशी लोग भी इसे पसंद करते हैं। 2013 में रोमानिया में आयोजित नमस्ते इंडिया में मैं पहली ऐसी गायक थी, जिसे शास्त्रीय संगीत सुनाने का मौका मिला। हैदराबाद निजाम ने मेरा गीत सुनने से मना कर दिया था। इस पर मेरे गुरुजी के काफी प्रयासों के बाद 10 मिनट का मुझे मौका दिया लेकिन जब मैंने शास्त्रीय संगीत गाया तो 10 मिनट से ज्यादा निजाम ने गीत सुनने की सहमति जताई। स्विटजरलैंड के 20 शहरों में महुआ मुखर्जी प्रस्तुतियां दे चुकी हैं।
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सन 2008 में रोमानिया देश की कार्मिन पहली बार भारत आईं थी। उन्होंने शास्त्रीय संगीत सुना। स्वरों एवं वीणा वादन की मधुर तरंग से कार्मिन प्रभावित हुई। उन्होंने हिंदी केंद्रीय संस्थान में प्रवेश ले लिया और रोमानिया चली गई। इसके बाद उन्होंने शास्त्रीय संगीत से लगाव के कारण उन्होंने रोमानिया में बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी में आईटी में टेक्निकल सपोर्टर की जॉब तक को छोड़ दिया। सरकार से स्कॉलरशिप मिली और आगरा के हिंदी संस्थान में पुन: लौट आईं। आज रोमानिया की कार्मिन हिंदुस्तानियों की तरह हिंदी और पढ़ना लिखना जानती हैं।
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अब वह दिल्ली में शास्त्री संगीत से ग्रेजुएशन कर रही है। कार्मिन ने बताया कि ग्रेजुएशन करने के बाद वह रोमानिया में संचालित स्वर अर्पण कल्चर सेंटर पर हिंदी सिखाएंगी और शास्त्रीय संगीत का प्रचार प्रसार करेंगी। उन्हें लगता है कि रोमानिया में भी हिंदी एवं शास्त्रीय संगीत को लोग बेहद पसंद करते हैं। कार्मिन फीरोजाबाद में शास्त्रीय संगीत का स्कूलों में प्रचार-प्रसार करने एवं कार्यक्रमों की प्रस्तुति देने आई हैं।
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स्कूलों में अनिवार्य करना चाहिए संगीत : महुआ मुखर्जी
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। क्लासिकल म्यूजिक का प्लेटफार्म बहुत मजबूत है। आज भी चलते-फिरते लोग क्लासिक गीत गुनगुनाते नजर आ जाते हैं। इसे सरकार को सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य कर देना चाहिए। यह बात पटियाला घराने की प्रसिद्ध गायकर महुआ मुखर्जी ने प्रेसवार्ता में कहीं।
उन्होंने कहा कि फीरोजाबाद में कई स्कूलों में प्रस्तुति के दौरान शास्त्रीय संगीत के दौरान छात्रों ने खूब तालियां बजाईं। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत में वो ताकत है कि विदेशी लोग भी इसे पसंद करते हैं। 2013 में रोमानिया में आयोजित नमस्ते इंडिया में मैं पहली ऐसी गायक थी, जिसे शास्त्रीय संगीत सुनाने का मौका मिला। हैदराबाद निजाम ने मेरा गीत सुनने से मना कर दिया था। इस पर मेरे गुरुजी के काफी प्रयासों के बाद 10 मिनट का मुझे मौका दिया लेकिन जब मैंने शास्त्रीय संगीत गाया तो 10 मिनट से ज्यादा निजाम ने गीत सुनने की सहमति जताई। स्विटजरलैंड के 20 शहरों में महुआ मुखर्जी प्रस्तुतियां दे चुकी हैं।