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UP: ननिहाल पहुंचे CEC ज्ञानेश कुमार...बचपन किया याद, इसलिए पढ़ने नहीं गए अमेरिका; माता-पिता की आंखें हुईं नम
Sun, 09 Mar 2025 08:36 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 09 Mar 2025 08:36 PM IST
सार
मुख्य चुनाव आयुक्त सिरसागंज में पहुंचे तो उन्होंने बचपन के किस्से सुनाए। उस मैदान के बारे में बताया जहां खेला करते थे। बचपन में हुई शिक्षा के बारे में बताया। पढ़ाई के लिए जब उन्होंने अमेरिका न जाने पाने का जिक्र किया तो उनके माता-पिता की आंखें नम हो गईं।
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार रविवार को सिरसागंज में जब अपनी ननिहाल में पहुंचे तो मानो बचपन की सभी यादें ताजा हो गईं। अपने लोगों के बीच हो रहा कार्यक्रम पारिवारिक आयोजन जैसा दिखाई दिया। बचपन की शरारतों के बारे में मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया तो उनके माता-पिता की आंखें भर आईं।
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रविवार दोपहर को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सिरसागंज नगर के गांधी मंडी स्थित अपनी ननिहाल पीली कोठी पहुंचे। उनके साथ पिता डॉ. सुबोध गुप्ता, मां सत्यवती देवी और पत्नी अनुराधा थीं। उनके मामा सुरेंद्र मैरोठिया ने परिवार के साथ बैंडबाजे के साथ पुष्पवर्षा करके स्वागत किया।
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माथुर वैश्य महिला मंडल की सदस्यों ने ईश वंदना की प्रस्तुति की तो माथुर वैश्य महासभा के सदस्यों में देवेंद्र गुप्ता, अजय गुप्ता, वासुदेव गुप्ता, राजीव दौनेरिया, श्याम गुप्ता, सुरेंद्र गुप्ता, डॉ. सुधीर गुप्ता ने माला और पीत पट्टिका पहनाकर सभी का स्वागत किया। नगर के समाजसेवी डॉ. गुरूदत्त सिंह, अंशुल खंडेलवाल, देवशरन आर्य ने प्रतीक चिंह भेंट किया।
पतंग कटी तो घर के सभी बल्ब उतारकर मांझा बना लिया
मुख्य चुनाव आयुक्त सिरसागंज में पहुंचे तो उन्होंने कहा कि इसी मैदान में खेलते हुए उनकी बचपन की बहुत सारी यादें छिपी हुई हैं। उन्होंने बताया इस मैदान में उन्होंने अपने मामा के साथ खूब कुश्ती लड़ी थी और अक्सर वे हार जाते थे। उन्होंने बताया पतंग उड़ाने के दौरान उनकी पतंग कट जाती थी। एक दिन उन्होंने घर के सारे बल्ब निकाल लिए और उनको पीस कर मांझा बना लिया था। जिसके बाद घर के लोगों ने उनको डांट लगाई, लेकिन नाना ने बचा लिया। साथ ही उन्होंने बताया कि टेसू के विवाह के बाद उनके विसर्जन के लिए सिरसा नदी पर जाया करते थे। वापस लौटने के दौरान खेतों से तरबूज और ककड़ी तोड़कर लाया करते थे। जब खेत स्वामी देखते थे, तो वहां से दौड़ लगाया करते थे।
पतंग कटी तो घर के सभी बल्ब उतारकर मांझा बना लिया
मुख्य चुनाव आयुक्त सिरसागंज में पहुंचे तो उन्होंने कहा कि इसी मैदान में खेलते हुए उनकी बचपन की बहुत सारी यादें छिपी हुई हैं। उन्होंने बताया इस मैदान में उन्होंने अपने मामा के साथ खूब कुश्ती लड़ी थी और अक्सर वे हार जाते थे। उन्होंने बताया पतंग उड़ाने के दौरान उनकी पतंग कट जाती थी। एक दिन उन्होंने घर के सारे बल्ब निकाल लिए और उनको पीस कर मांझा बना लिया था। जिसके बाद घर के लोगों ने उनको डांट लगाई, लेकिन नाना ने बचा लिया। साथ ही उन्होंने बताया कि टेसू के विवाह के बाद उनके विसर्जन के लिए सिरसा नदी पर जाया करते थे। वापस लौटने के दौरान खेतों से तरबूज और ककड़ी तोड़कर लाया करते थे। जब खेत स्वामी देखते थे, तो वहां से दौड़ लगाया करते थे।
माता-पिता के खातिर पढ़ने अमेरिका नहीं गए
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि वो चाहते थे कि उनकी पढ़ाई सिरसागंज से हो, लेकिन पिता की नौकरी के कारण वे लखनऊ पहुंच गए। हाईस्कूल और इंटर में यूपी टॉपर होने के बाद उन्हे आईआईटी कानपुर में दाखिला मिला। अमेरिका में पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति मिली तो घरवालों के मन को देखकर उन्होंने अमेरिका जाने का विचार त्याग दिया। आईएएस बनने के बाद उन्होंने पहली पोस्टिंग केरल में ली और वहां 14 वर्ष सेवा देने के पश्चात उनका तबादला दिल्ली हो गया। मुख्य चुनाव आयुक्त जब अपने अमेरिका न जाने का किस्सा सुना रहे थे तो उनके माता-पिता की आंखें नम हो गई।
देश का सबसे बड़ी सरकारी मशीनरी है भारत का चुनाव आयोग
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग देश की सबसे बड़ी सरकारी मशीनरी है। इसमें 50 लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। चुनाव को संपन्न कराने के बाद सभी अतिरिक्त लोग मूल विभागों में वापस लौट जाते हैं।
युवा वोटर बनें, मतदान करें
मुख्य चुनाव आयुक्त ने सिरसागंज भ्रमण के दौरान युवाओं से अपना मतदाता पहचान पत्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने 18 वर्ष से अधिक आयु वाले युवाओं से आह्वान किया कि वह अपने वोट अवश्य बनवाएं। मतदान वाले दिन बूथ पर वोट डालने अवश्य जाएं।
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि वो चाहते थे कि उनकी पढ़ाई सिरसागंज से हो, लेकिन पिता की नौकरी के कारण वे लखनऊ पहुंच गए। हाईस्कूल और इंटर में यूपी टॉपर होने के बाद उन्हे आईआईटी कानपुर में दाखिला मिला। अमेरिका में पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति मिली तो घरवालों के मन को देखकर उन्होंने अमेरिका जाने का विचार त्याग दिया। आईएएस बनने के बाद उन्होंने पहली पोस्टिंग केरल में ली और वहां 14 वर्ष सेवा देने के पश्चात उनका तबादला दिल्ली हो गया। मुख्य चुनाव आयुक्त जब अपने अमेरिका न जाने का किस्सा सुना रहे थे तो उनके माता-पिता की आंखें नम हो गई।
देश का सबसे बड़ी सरकारी मशीनरी है भारत का चुनाव आयोग
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग देश की सबसे बड़ी सरकारी मशीनरी है। इसमें 50 लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। चुनाव को संपन्न कराने के बाद सभी अतिरिक्त लोग मूल विभागों में वापस लौट जाते हैं।
युवा वोटर बनें, मतदान करें
मुख्य चुनाव आयुक्त ने सिरसागंज भ्रमण के दौरान युवाओं से अपना मतदाता पहचान पत्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने 18 वर्ष से अधिक आयु वाले युवाओं से आह्वान किया कि वह अपने वोट अवश्य बनवाएं। मतदान वाले दिन बूथ पर वोट डालने अवश्य जाएं।