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Firozabad News: फर्जी टीईटी प्रमाणपत्र से नौकरी कर रही कंपोजिट विद्यालय सुनारी की शिक्षिका के खिलाफ केस दर्ज

Mon, 24 Nov 2025 11:48 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Mon, 24 Nov 2025 11:48 PM IST
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Case filed against a teacher of Sunari Composite School for working with a fake TET certificate
सांकेतिक  - फोटो : सांकेतिक
- खंड शिक्षाधिकारी ने शिक्षिका सरिता के खिलाफ थाना एका में केस दर्ज कराया
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संवाद न्यूज एजेंसी

फिरोजाबाद। एका ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय सुनारी में तैनात सहायक अध्यापिका सरिता कुमारी के खिलाफ गलत प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर नौकरी प्राप्त करने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। उनका टीईटी 2013 का प्रमाणपत्र कूटरचित (जाली) पाए जाने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने उनकी सेवाएं पहले ही समाप्त कर दी थीं और अब खंड शिक्षाधिकारी (एबीएसए) ने उनके खिलाफ थाना एका में केस दर्ज कराया है।
शिक्षिका सरिता कुमारी की नियुक्ति वर्ष 2015 में हुई थी। नौकरी के तुरंत बाद कराए गए सत्यापन रिपोर्ट को शुरुआत में सही पाया गया था। एक शिकायत के आधार पर, शिक्षिका के प्रमाणपत्र और अंकतालिका का दोबारा सत्यापन कराने में पाया कि उनका टीईटी अंकतालिका और प्रमाणपत्र फर्जी थे। बेसिक शिक्षा विभाग ने 5 जून 2025 को शिक्षिका की सेवाएं समाप्त कर दी थीं।
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सोमवार को इस मामले में आगे कानूनी कार्रवाई करते हुए, एबीएसए श्रीकांत पटेल ने संबंधित शिक्षिका के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। बताया कि शिक्षिका का नियुक्ति के लिए प्रस्तुत टीईटी प्रमाणपत्र अवैध पाया गया। विभागीय नियमों के तहत सेवा समाप्ति और प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
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फेल शिक्षिका ने 85 अंक दिखाकर ली नौकरी

फिरोजाबाद। सहायक अध्यापिका सरिता कुमारी ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) में फेल होने के बावजूद जाली दस्तावेज तैयार कराए थे। जांच में सामने आया कि शिक्षिका सरिता कुमारी ने उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी परीक्षा दी थी, जिसमें उन्हें 150 में से मात्र 61 अंक प्राप्त हुए थे, यानी वह परीक्षा में फेल थीं। इसके बावजूद नौकरी पाने के लिए टीईटी की फर्जी अंकतालिका तैयार करा लिया और उसमें अंक बढ़ाकर 85 अंक करा लिए। संवाद


वेतन रिकवरी का मामला अटका
शिक्षिका ने अपनी नियुक्ति के बाद करीब साढ़े नौ साल तक वेतन प्राप्त किया। हालांकि, विभाग ने सेवा समाप्ति किए जाने के पांच माह बीत जाने के बाद भी, वेतन की रिकवरी (वसूली) करने में लेखा विभाग की ओर से उदासीनता बरती जा रही है। अभी तक कोई रिकवरी नहीं की गई है।


सिस्टम में सेंध: टीईटी फर्जीवाड़ा रैकेट की आशंका, जिम्मेदार कौन?
यह मामला बेसिक शिक्षा विभाग के सत्यापन और नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह सिस्टम में सेंधमारी और भ्रष्टाचारी रैकेट की ओर इशारा है। इस तरह के सटीक फर्जी दस्तावेज बनाने का काम किसी पेशेवर प्रिंटिंग या एडिटिंग गिरोह का है। इस काम में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) / परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) के दस्तावेजों की संरचना, फॉन्ट और सुरक्षा मानकों की गहरी समझ रखने वाले लोग शामिल रहे होंगे। विभाग के ही लोगों का कहना है कि अक्सर ऐसे मामलों में, नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार और जाली दस्तावेज बनाने वाले गिरोह के बीच कोई मध्यस्थ या दलाल कार्य करता है।




पहले सत्यापन में क्यों बरती गई लापरवाही?
यह सबसे बड़ा सवाल है कि जब सरिता कुमारी की नियुक्ति 2015 में हुई थी, तो उस समय कराए गए सत्यापन में उनका प्रमाणपत्र सही कैसे आ गया। आशंका जताई जा रही है कि उस समय सत्यापन अधिकारी या कर्मचारियों ने जानबूझकर लापरवाही बरती या सांठगांठ करके प्रमाण पत्र को सही मान लिया।
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