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UP: नसीरपुर के जंगल में मिला सांभर हिरण का शव...सींग काट ले गए तस्कर, जांच में जुटा विभाग
Wed, 31 Dec 2025 08:05 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: अरुन पाराशर
Updated Wed, 31 Dec 2025 08:05 PM IST
सार
जंगल में वन्यजीव का शव मिलने पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। जांच में पुष्टि हुई कि यह नीलगाय नहीं, बल्कि जंगलों में पाया जाने वाला सांभर प्रजाति हिरण है। इसके सींगों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी तस्करी होती है।
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जंगल में जुटी ग्रामीणों की भीड़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
फिरोजाबाद के नसीरपुर क्षेत्र के जंगलों में लकड़ी तस्करों के बाद अब वन्यजीवों के शिकारियों ने दस्तक दे दी है। बुधवार को गांव रामनगर पटना करखा में संभार प्रजाति का हिरण एक खेत में मृत पाया। उसके सींग काटे गए थे। वन विभाग ने शव पोस्टमार्टम के लिए कब्जे में लेकर सिरसागंज के पशुचिकित्सालय भेज दिया है। शासन स्तर से मंजूरी के बाद पोस्टमार्टम के लिए तीन पशु चिकित्सकों की टीम गठित की है। बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम होगा।
घटनास्थल पर बुधवार को जब ग्रामीणों की भीड़ जुटी, तो वन विभाग को सूचना दी गई। वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए इसे नीलगाय का शव बताते रहे। लेकिन ग्रामीणों की सजगता और मृत जीव की शारीरिक बनावट के तर्कों ने विभाग को बैकफुट पर ला दिया। जांच में पुष्टि हुई कि यह नीलगाय नहीं, बल्कि जंगलों में पाया जाने वाला सांभर प्रजाति हिरण है, जिसके सींगों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी तस्करी होती है। सींगों को घरेलू साज-सज्जा के काम में इस्तेमाल किया जाता है।
इस प्रजाति के सींग ठोस और बेहद मजबूत होते हैं
सांभर हिरण को वन विभाग ने 2023 की सूची में शेड्यूल-1 में डाला है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, सांभर के सींग ठोस और बेहद मजबूत होते हैं, जिनका उपयोग सजावटी सामान, चाकू की मूठ और कथित पारंपरिक दवाओं में किया जाता है। नसीरपुर के जंगलों में सांभर की मौजूदगी इस क्षेत्र की जैव-विविधता का प्रमाण थी, लेकिन शिकारियों की नजर अब इन बेजुबानों की जान पर है।
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नसीरपुर जंगलों में ही छीनी गई थी वन कर्मियों से रायफल
यह वही इलाका है जहां कुछ महीने पहले तस्करों ने वन विभाग की टीम को घेरकर उनकी सरकारी रायफलें लूट ली थीं। उस समय हुई ढिलाई का नतीजा अब सामने है। अब तस्कर न केवल पेड़ काट रहे हैं, बल्कि वन्यजीवों का शिकार कर उनके अंग भी गायब कर रहे हैं।
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घटनास्थल पर बुधवार को जब ग्रामीणों की भीड़ जुटी, तो वन विभाग को सूचना दी गई। वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए इसे नीलगाय का शव बताते रहे। लेकिन ग्रामीणों की सजगता और मृत जीव की शारीरिक बनावट के तर्कों ने विभाग को बैकफुट पर ला दिया। जांच में पुष्टि हुई कि यह नीलगाय नहीं, बल्कि जंगलों में पाया जाने वाला सांभर प्रजाति हिरण है, जिसके सींगों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी तस्करी होती है। सींगों को घरेलू साज-सज्जा के काम में इस्तेमाल किया जाता है।
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इस प्रजाति के सींग ठोस और बेहद मजबूत होते हैं
सांभर हिरण को वन विभाग ने 2023 की सूची में शेड्यूल-1 में डाला है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, सांभर के सींग ठोस और बेहद मजबूत होते हैं, जिनका उपयोग सजावटी सामान, चाकू की मूठ और कथित पारंपरिक दवाओं में किया जाता है। नसीरपुर के जंगलों में सांभर की मौजूदगी इस क्षेत्र की जैव-विविधता का प्रमाण थी, लेकिन शिकारियों की नजर अब इन बेजुबानों की जान पर है।
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नसीरपुर जंगलों में ही छीनी गई थी वन कर्मियों से रायफल
यह वही इलाका है जहां कुछ महीने पहले तस्करों ने वन विभाग की टीम को घेरकर उनकी सरकारी रायफलें लूट ली थीं। उस समय हुई ढिलाई का नतीजा अब सामने है। अब तस्कर न केवल पेड़ काट रहे हैं, बल्कि वन्यजीवों का शिकार कर उनके अंग भी गायब कर रहे हैं।
शिकार हो या अंग-भंग, तस्करों का जेल जाना तय
नसीरपुर क्षेत्र में मिले सांभर के शव मामले में वन विभाग ने अब कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। डीएफओ भानेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया है कि विभाग ने इस प्रकरण को अपनी रेंज में दर्ज करने के साथ ही सिरसागंज थाने में भी तहरीर दी है। हालांकि, अभी यह कहना मुश्किल है कि सांभर का शिकार हुआ है या फिर उसकी स्वाभाविक मृत्यु के बाद तस्करों ने उसके सींग गायब किए हैं।
डीएफओ भानेंद्र सिंह ने बताया कि संभार हिरण के मामले में कड़ी कार्रवाई होना तय है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मृत जीव के अंगों (जैसे सींग) को निकालना और उन्हें ले जाना भी उतना ही गंभीर अपराध है जितना कि शिकार करना। अब स्थानीय पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें उन संदिग्धों की तलाश कर रही हैं, जो हाल के दिनों में जंगल और आसपास के इलाकों में सक्रिय देखे गए थे। मामले की गहनता से जांच हो रही है। पोस्टमार्टम के बाद ही मौत की असली वजह सामने आएगी, लेकिन वन्यजीवों के साथ ऐसी बर्बरता करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
दो पहलुओं पर जांच
डीएफओ भानेंद्र सिंह के अनुसार, जांच दो बिंदुओं पर टिकी है। क्या तस्करों ने सींगों के लिए सांभर को जानबूझकर मारा या फिर सांभर की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी और बाद में किसी तस्कर ने उसके कीमती सींग काट लिए। इन दोनों ही सवालों का जवाब अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट से तय होगा।
नसीरपुर क्षेत्र में मिले सांभर के शव मामले में वन विभाग ने अब कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। डीएफओ भानेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया है कि विभाग ने इस प्रकरण को अपनी रेंज में दर्ज करने के साथ ही सिरसागंज थाने में भी तहरीर दी है। हालांकि, अभी यह कहना मुश्किल है कि सांभर का शिकार हुआ है या फिर उसकी स्वाभाविक मृत्यु के बाद तस्करों ने उसके सींग गायब किए हैं।
डीएफओ भानेंद्र सिंह ने बताया कि संभार हिरण के मामले में कड़ी कार्रवाई होना तय है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मृत जीव के अंगों (जैसे सींग) को निकालना और उन्हें ले जाना भी उतना ही गंभीर अपराध है जितना कि शिकार करना। अब स्थानीय पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें उन संदिग्धों की तलाश कर रही हैं, जो हाल के दिनों में जंगल और आसपास के इलाकों में सक्रिय देखे गए थे। मामले की गहनता से जांच हो रही है। पोस्टमार्टम के बाद ही मौत की असली वजह सामने आएगी, लेकिन वन्यजीवों के साथ ऐसी बर्बरता करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
दो पहलुओं पर जांच
डीएफओ भानेंद्र सिंह के अनुसार, जांच दो बिंदुओं पर टिकी है। क्या तस्करों ने सींगों के लिए सांभर को जानबूझकर मारा या फिर सांभर की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी और बाद में किसी तस्कर ने उसके कीमती सींग काट लिए। इन दोनों ही सवालों का जवाब अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट से तय होगा।