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बजट में बढ़ाया जाए टैक्स स्लैब का दायरा
अमर उजाला ब्यूूराे, फीराेजाबाद
Updated Mon, 30 Jan 2017 11:17 PM IST
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Budget
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केंद्र सरकार के 2017-18 के आम बजट से सीए और अधिवक्ताओं को भी खासी उम्मीदें हैं। उनका कहना है कि बजट में टैक्स स्लैब का दायरा बढ़ाना चाहिए। इससे अधिक से अधिक लोग टैक्स जमा करने के लिए आगे आएंगे।
सीए पवन अग्रवाल का कहना है कि केंद्र सरकार को आम बजट में टैक्स स्लैब का दायरा बढ़ाना होगा। इसके बाद ही अधिक से अधिक लोग टैक्स जमा करने के लिए आगे आएंगे। केंद्र सरकार को हाउसिंग लोन में अधिक छूट देनी चाहिए और ब्याज दरें कम करनी चाहिए। सीए विपुल बंसल का कहना है कि सभी को उम्मीद है कि केंद्र सरकार अच्छा बजट लाएगी। केंद्र सरकार को करदाताओं को छूट देनी चाहिए, जिससे लोग स्वत: रिटर्न फाइल करने के लिए आगे आएं। डिजिटल सिस्टम लागू होने से लोगों को इनकम छिपाना मुश्किल होगा। इससे टैक्स जमा करने में पारदर्शिता आएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेशचंद्र जैन कहते हैं कि आयकरदाताओं को आम बजट से उम्मीदें हैं। व्यापारी वर्ग, करदाता सोचता है कि बजट में छूट मिले तो कठिनाई से मुक्ति मिले। प्रापर्टी के रजिस्ट्रेशन में कैश पैमेंट की बंदिश को वापस लिया जाना चाहिए। अधिवक्ता निखिल मित्तल कहते हैं कि नोटबंदी के बाद पूरे देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। ऐसे में केंद्र सरकार को अर्थव्यवस्था पटरी पर लाने वाला बजट लाना चाहिए। इनकम टैक्स में छूट बढ़ानी चाहिए। बैंक से निकासी सीमा समाप्त करनी चाहिए।
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सीए पवन अग्रवाल का कहना है कि केंद्र सरकार को आम बजट में टैक्स स्लैब का दायरा बढ़ाना होगा। इसके बाद ही अधिक से अधिक लोग टैक्स जमा करने के लिए आगे आएंगे। केंद्र सरकार को हाउसिंग लोन में अधिक छूट देनी चाहिए और ब्याज दरें कम करनी चाहिए। सीए विपुल बंसल का कहना है कि सभी को उम्मीद है कि केंद्र सरकार अच्छा बजट लाएगी। केंद्र सरकार को करदाताओं को छूट देनी चाहिए, जिससे लोग स्वत: रिटर्न फाइल करने के लिए आगे आएं। डिजिटल सिस्टम लागू होने से लोगों को इनकम छिपाना मुश्किल होगा। इससे टैक्स जमा करने में पारदर्शिता आएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेशचंद्र जैन कहते हैं कि आयकरदाताओं को आम बजट से उम्मीदें हैं। व्यापारी वर्ग, करदाता सोचता है कि बजट में छूट मिले तो कठिनाई से मुक्ति मिले। प्रापर्टी के रजिस्ट्रेशन में कैश पैमेंट की बंदिश को वापस लिया जाना चाहिए। अधिवक्ता निखिल मित्तल कहते हैं कि नोटबंदी के बाद पूरे देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। ऐसे में केंद्र सरकार को अर्थव्यवस्था पटरी पर लाने वाला बजट लाना चाहिए। इनकम टैक्स में छूट बढ़ानी चाहिए। बैंक से निकासी सीमा समाप्त करनी चाहिए।
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