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कश्तियां डूब रही हैं कोई साहिल लाओ...
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sun, 04 Sep 2016 11:58 PM IST
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मुशायरा
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मरहूम शायर पीएन चतुर्वेदी दास की याद में पालीवाल हॉल में ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। सदारत जनाव ख्वाब अहमद भाईजान ने की। इस दौरान दास द्वारा रचित गजलों के संग्रह ‘गुलदान’ का प्रकाशचंद्र चतुर्वेदी ने लोकार्पण किया।
मुशायरे का उद्घाटन जनाव शमशाद बाबा तो शमां फरोजा सूफी वसीम अहमद ने किया। माधव प्रसाद मित्तल ने पीएन चतुर्वेदी के चित्र पर माल्यार्पण किया। शेर ओ शायरी की शुरुआत अतीक सहर अलीगढ़ी नाते नवी से े की। अज्म साकरी ने पढ़ा कि ‘कितना मुश्किल है मौतवर होना, मरना पड़ता है जिंदगी के लिए’। जमुना प्रसाद राही ने कश्तियां डूब रही हैं कोई साहिल लाओ, अपनी आंखें मिरी आंखों के मुकाबिल लाओ पंक्तियां पढ़ीं।
फिल्मी शायर खालिद फरीदी ने फरमाया कि ‘मक वयक नजर जो साहब सा रुखे माहताब पर छा गया, जो हवा चली तो पता चला तेरी जुल्फ है ये घटा नहीं’। कानपुर की शिखा मिश्रा ने ‘मैं भी शोहरत की किसी राह पे चल सकती हूं, तेरे ख्वाबों को हकीकत में बदल सकती हूं’ पंक्तियां सुनाकर वाहवाही लूटी। बदायूं की खुशबू ने ’सबके दुखों के दर्द की जुबान एक है, सबकी मुसीबतों का इम्तिहान एक है’ और कानपुर की नूरी परवीन ने ‘रुखसत के वक्त एक झलक और देख लूं, महशर में फिर मुझे तेरा दीदार हो न हो’ सुनाया। जख्मी मेरठ, झांसी के सरवर कलाम और कोलकाता की निजार बानो नाज ने भी कलाम पेश किए। निजामत नदीम फर्रख ने की। मुशायरे में जनाब सूफी अमील अफगानी, डा. अपूर्व चतुर्वेदी, जहरी उद्दीन, केके चतुर्वेदी, प्रदीप गुप्ता, माजिद भाई, डा. वकार उद्दीन, अतुल चतुर्वेदी, अर्जुन सिंह चतुर्वेदी, खालिद नसीर आदि मौजूद रहे।
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मुशायरे का उद्घाटन जनाव शमशाद बाबा तो शमां फरोजा सूफी वसीम अहमद ने किया। माधव प्रसाद मित्तल ने पीएन चतुर्वेदी के चित्र पर माल्यार्पण किया। शेर ओ शायरी की शुरुआत अतीक सहर अलीगढ़ी नाते नवी से े की। अज्म साकरी ने पढ़ा कि ‘कितना मुश्किल है मौतवर होना, मरना पड़ता है जिंदगी के लिए’। जमुना प्रसाद राही ने कश्तियां डूब रही हैं कोई साहिल लाओ, अपनी आंखें मिरी आंखों के मुकाबिल लाओ पंक्तियां पढ़ीं।
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फिल्मी शायर खालिद फरीदी ने फरमाया कि ‘मक वयक नजर जो साहब सा रुखे माहताब पर छा गया, जो हवा चली तो पता चला तेरी जुल्फ है ये घटा नहीं’। कानपुर की शिखा मिश्रा ने ‘मैं भी शोहरत की किसी राह पे चल सकती हूं, तेरे ख्वाबों को हकीकत में बदल सकती हूं’ पंक्तियां सुनाकर वाहवाही लूटी। बदायूं की खुशबू ने ’सबके दुखों के दर्द की जुबान एक है, सबकी मुसीबतों का इम्तिहान एक है’ और कानपुर की नूरी परवीन ने ‘रुखसत के वक्त एक झलक और देख लूं, महशर में फिर मुझे तेरा दीदार हो न हो’ सुनाया। जख्मी मेरठ, झांसी के सरवर कलाम और कोलकाता की निजार बानो नाज ने भी कलाम पेश किए। निजामत नदीम फर्रख ने की। मुशायरे में जनाब सूफी अमील अफगानी, डा. अपूर्व चतुर्वेदी, जहरी उद्दीन, केके चतुर्वेदी, प्रदीप गुप्ता, माजिद भाई, डा. वकार उद्दीन, अतुल चतुर्वेदी, अर्जुन सिंह चतुर्वेदी, खालिद नसीर आदि मौजूद रहे।
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