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Firozabad News: सत्संग में मरने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का शव घर पहुंचा
Thu, 04 Jul 2024 12:05 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Thu, 04 Jul 2024 12:05 AM IST
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सिरसागंज (फिरोजाबाद)। थाना क्षेत्र के गांव शेखूपुर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रामा देवी की हाथरस के सिकंदराराऊ में साकार विश्वहरि के सत्संग में भगदड़ के दौरान दबने से मौत हो गई। महिला का शव बुधवार को सुबह घर पहुंचा तो परिवार में चीख पुकार मच गई। परिजन ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। हाथरस के सिकंदराराऊ में होने वाले सत्संग की जानकारी सिरसागंज में रहने वाले के भक्तों को हुई तो कई लोग वहां जाने को तैयार हो गए। सिरसागंज के कुंजपुर में रहने वाले वीर सिंह अपनी गाड़ी लेकर जा रहे थे तो गांव शेखूपुर की रामा देवी (56), भगवान देवी और मंशा देवी एवं बहादुरपुर की निवासी गुड्डी देवी, कमला देवी व कुंजपुर निवासी उर्मिला देवी को मौजिक से हाथरस लेकर गए थे। भगवान देवी ने बताया सत्संग चल रहा था और भीड़ बहुत हो चुकी थी। जैसे ही बाबा उठकर खड़े हुए भीड़ ने उनकी रज लेने को उनके पीछे भागना शुरू कर दिया था। इसी दौरान रामा देवी और मनसा देवी दोनों भीड़ में दब गई थीं। एक सेवादार ने किसी तरह से मनसा देवी को तो उठा लिया, लेकिन रामा देवी के जमीन पर गिरने के बाद कई लोग उनके ऊपर से निकल गए। इस कारण उनकी मौत हो गई थी। रामा देवी शेरपुर ग्राम पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र पर तैनात थीं।
भगदड़ की खबर से परिजन थे चिंतित
रामा देवी के पुत्र महेश और नरेश को जैसे ही पता चला कि हाथरस में चल रहे सत्संग में भगदड़ मच गई है और सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है तो पूरे गांव में लोग जानकारी करने लगे कि कौन कौन गया था। वहीं रामा देवी के बेटे तुरंत ही हाथरस के लिए रवाना हो गए थे। देर रात वह हाथरस पहुंचे तो वहां जाकर उन्हें पता चला कि उनकी मां की मौत हो गई है।
जिंदगी में नहीं देखा ऐसा भयानक मंजरसिरसागंज। शेखूपुर निवासी मनसा देवी ने बताया भोले बाबा के ऊठने के साथ ही भीड़ इतनी तेजी से उनकी ओर दौड़ी की अफरा-तफरी मच गई। महिलाएं आगे थीं वह गिरती चली गईं और पीछे की भीड़ उनके ऊपर से निकलते हुए आगे बढ़ती चली गई। जो नीचे दब गया उसे उठने का मौका नहीं मिला। कुछ समझदार सत्संगी भाइयों ने हम जैसों की जान बचा ली। लेकिन अधिकांश की जान चली गई। क्यों कि उनको उठने का मौका ही नहीं मिल सका। थोड़ी देर के बाद चहुंओर रोते बिलखते हुए सत्संगी दिखाई दे रहे थे। वहां का नजारा देखकर कलेजा फटा जा रहा था। कोई घायल होने के कारण तड़प रहा था तो किसी की सांसें चल रही थीं। सत्संग स्थल पर हर कोई इधर से उधर भाग रहा था। वहां लोग अपनों को खोजते दिखाई दिए। क्योंकि चहुंओर मृत सत्संगियों के शव ही शव दिखाई दे रहे थे। इसमें हमारी साथ गिरी रामा देवी की भी जान चली गई। उसे सत्संग की जानकारी मिली तभी वह गई थीं। संवाद
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पैर में चोट होने के कारण बच गईं
सिरसागंज। नगला हरवंश निवासी शशि देवी राजपूत कहती हैं कि मेरे तो पैर में चोट लगी थी। इसके कारण भोले बाबा का आदेश था कि दूर से ही सत्संग सुनें। हम गए जरूर थे, लेकिन भीड़ का रेला चलता उससे पहले ही बाहर आकर बस में बैठ गए थे। इस कारण बच गए। शायद ठीक होते तो हम भी हादसे का शिकार हो जाते। संवाद
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भगदड़ की खबर से परिजन थे चिंतित
रामा देवी के पुत्र महेश और नरेश को जैसे ही पता चला कि हाथरस में चल रहे सत्संग में भगदड़ मच गई है और सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है तो पूरे गांव में लोग जानकारी करने लगे कि कौन कौन गया था। वहीं रामा देवी के बेटे तुरंत ही हाथरस के लिए रवाना हो गए थे। देर रात वह हाथरस पहुंचे तो वहां जाकर उन्हें पता चला कि उनकी मां की मौत हो गई है।
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जिंदगी में नहीं देखा ऐसा भयानक मंजरसिरसागंज। शेखूपुर निवासी मनसा देवी ने बताया भोले बाबा के ऊठने के साथ ही भीड़ इतनी तेजी से उनकी ओर दौड़ी की अफरा-तफरी मच गई। महिलाएं आगे थीं वह गिरती चली गईं और पीछे की भीड़ उनके ऊपर से निकलते हुए आगे बढ़ती चली गई। जो नीचे दब गया उसे उठने का मौका नहीं मिला। कुछ समझदार सत्संगी भाइयों ने हम जैसों की जान बचा ली। लेकिन अधिकांश की जान चली गई। क्यों कि उनको उठने का मौका ही नहीं मिल सका। थोड़ी देर के बाद चहुंओर रोते बिलखते हुए सत्संगी दिखाई दे रहे थे। वहां का नजारा देखकर कलेजा फटा जा रहा था। कोई घायल होने के कारण तड़प रहा था तो किसी की सांसें चल रही थीं। सत्संग स्थल पर हर कोई इधर से उधर भाग रहा था। वहां लोग अपनों को खोजते दिखाई दिए। क्योंकि चहुंओर मृत सत्संगियों के शव ही शव दिखाई दे रहे थे। इसमें हमारी साथ गिरी रामा देवी की भी जान चली गई। उसे सत्संग की जानकारी मिली तभी वह गई थीं। संवाद
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पैर में चोट होने के कारण बच गईं
सिरसागंज। नगला हरवंश निवासी शशि देवी राजपूत कहती हैं कि मेरे तो पैर में चोट लगी थी। इसके कारण भोले बाबा का आदेश था कि दूर से ही सत्संग सुनें। हम गए जरूर थे, लेकिन भीड़ का रेला चलता उससे पहले ही बाहर आकर बस में बैठ गए थे। इस कारण बच गए। शायद ठीक होते तो हम भी हादसे का शिकार हो जाते। संवाद