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आश्वासनों से छले गए सरस्वती नगर के बाशिंदे
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद
Updated Fri, 10 Mar 2017 10:38 PM IST
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विभव नगर में खराब पड़ा नलकूप।
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शहर का वार्ड नंबर 18 सरस्वती नगर पॉश इलाकों में गिना जाता है। विभव नगर जैसी पॉश कालोनी भी इसी वार्ड का हिस्सा हैं। इसके बावजूद यहां अधिकांश पार्क बदहाल हैं। वार्ड की अधिकांश जनता क्षतिग्रस्त सड़कों से गुजरने को मजबूर है। कई बार शिकायत के बाद यहां की जनता को महज कोरे आश्वासन मिले।
सरस्वती नगर वार्ड से जुड़े मोहल्लों में वर्षों से समस्याएं दूर नहीं हो सकीं। वर्ष 2012 में नगर पालिका के चुनाव के हुए और क्षेत्रीय सभासद से जनता ने तमाम उम्मीदें पालीं। हालांकि सभासद जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। अगस्त-14 में नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद भी बोर्ड भी भंग हो गया। ऐसे में रही-सही उम्मीदें भी टूट गई। सरस्वती नगर वार्ड में आज भी पेयजल की गंभीर समस्या है। मोहल्ला सरस्वती नगर, पॉश कालोनी विभव नगर, मथुरा नगर सहित अन्य क्षेत्रों में आज भी पेयजल का गंभीर संकट है। क्षेत्र की जनता सरकारी और प्राइवेट सबमर्सिबल पर पानी के लिए निर्भर है। विभव नगर में पार्कों के सौंदर्यीकरण के लिए क्षेत्रीय लोगों ने काफी प्रयास किया। नगर निगम के चक्कर काटे और अफसरों से गुहार लगाई लेकिन ढाई साल में एक भी पार्क का सुंदरीकरण नहीं हो सका। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि नगर आयुक्त द्वारा पूरे दो साल तक कोरे आश्वासन दिए लेकिन आजतक एक भी पार्क के हालात नहीं सुधर सके।
वार्ड की आबादी- 24600
वार्ड में वोटर संख्या-10000
वार्ड में शामिल हैं यह मोहल्ले-सरस्वती नगर, विभव नगर, मथुरा नगर, इंद्रानगर, कौशल्या नगर, बिहारी नगर, नई आबादी।
वार्ड में यह हैं प्रमुख समस्याएं
-वार्ड की अधिकांश गलियां क्षतिग्रस्त हाल में पड़ी हैं
-नगर निगम द्वारा गली-मोहल्लों में नहीं लगवाई गईं स्ट्रीट लाइटें
-सफाई कर्मचारी की कमी के कारण रहती है गंदगी
-सड़कें तो बनीं, परंतु नाली-खरंजा न होने से परेशान रहते हैं लोग
बोली जनता
सरस्वती नगर निवासी लतेश तिवारी का कहना है कि नगर निगम द्वारा मोहल्ले में कोई व्यवस्था नहीं की गई। प्राइवेट सबमर्सिबल से पानी पी रहे हैं। खराब हो जाता है तो चंदा करके ठीक कराते हैं। मथुरा नगर निवासी डॉली कहती हैं कि क्षेत्र में सफाई कर्मचारी आते हैं लेकिन उन्हें पैसे देकर सफाई करानी पड़ती है। पैसे न देने पर कर्मचारी कोई कार्य नहीं करते। विभव नगर निवासी रामनरेश कटारा का कहना है कि विभव नगर की अधिकांश गलियां क्षतिग्रस्त हैं। जहां सड़कें बनी हैं, वहां आजतक नाली खड़ंजा नहीं बन सके। सुनील पैंगोरिया का कहना है कि मोहल्ले में पानी की गंभीर समस्या है। टंकी से आधे क्षेत्र में पानी नहीं पहुंचता है। मोहल्लेे में मात्र तीन इंच की पाइप लाइन डाली गई है, जिससे पानी का प्रेशर कम आता है।
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सभासद की सुनिए
अपने कार्यकाल में क्षेत्र में कई गलियों का निर्माण कराया है। इंद्रानगर क्षेत्र में कुछ गलियों बनने से रह गई हैं। बोर्ड भंग होने के बाद नगर निगम अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की। वार्ड में कर्मचारियों की कमी के कारण सफाई खराब है।वार्ड में मात्र कर्मचारी हैं, जबकि 40 कर्मचारियों की जरूरत है।
गिरजेश कुमार
निवर्तमान सभासद
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सरस्वती नगर वार्ड से जुड़े मोहल्लों में वर्षों से समस्याएं दूर नहीं हो सकीं। वर्ष 2012 में नगर पालिका के चुनाव के हुए और क्षेत्रीय सभासद से जनता ने तमाम उम्मीदें पालीं। हालांकि सभासद जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। अगस्त-14 में नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद भी बोर्ड भी भंग हो गया। ऐसे में रही-सही उम्मीदें भी टूट गई। सरस्वती नगर वार्ड में आज भी पेयजल की गंभीर समस्या है। मोहल्ला सरस्वती नगर, पॉश कालोनी विभव नगर, मथुरा नगर सहित अन्य क्षेत्रों में आज भी पेयजल का गंभीर संकट है। क्षेत्र की जनता सरकारी और प्राइवेट सबमर्सिबल पर पानी के लिए निर्भर है। विभव नगर में पार्कों के सौंदर्यीकरण के लिए क्षेत्रीय लोगों ने काफी प्रयास किया। नगर निगम के चक्कर काटे और अफसरों से गुहार लगाई लेकिन ढाई साल में एक भी पार्क का सुंदरीकरण नहीं हो सका। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि नगर आयुक्त द्वारा पूरे दो साल तक कोरे आश्वासन दिए लेकिन आजतक एक भी पार्क के हालात नहीं सुधर सके।
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वार्ड की आबादी- 24600
वार्ड में वोटर संख्या-10000
वार्ड में शामिल हैं यह मोहल्ले-सरस्वती नगर, विभव नगर, मथुरा नगर, इंद्रानगर, कौशल्या नगर, बिहारी नगर, नई आबादी।
वार्ड में यह हैं प्रमुख समस्याएं
-वार्ड की अधिकांश गलियां क्षतिग्रस्त हाल में पड़ी हैं
-नगर निगम द्वारा गली-मोहल्लों में नहीं लगवाई गईं स्ट्रीट लाइटें
-सफाई कर्मचारी की कमी के कारण रहती है गंदगी
-सड़कें तो बनीं, परंतु नाली-खरंजा न होने से परेशान रहते हैं लोग
बोली जनता
सरस्वती नगर निवासी लतेश तिवारी का कहना है कि नगर निगम द्वारा मोहल्ले में कोई व्यवस्था नहीं की गई। प्राइवेट सबमर्सिबल से पानी पी रहे हैं। खराब हो जाता है तो चंदा करके ठीक कराते हैं। मथुरा नगर निवासी डॉली कहती हैं कि क्षेत्र में सफाई कर्मचारी आते हैं लेकिन उन्हें पैसे देकर सफाई करानी पड़ती है। पैसे न देने पर कर्मचारी कोई कार्य नहीं करते। विभव नगर निवासी रामनरेश कटारा का कहना है कि विभव नगर की अधिकांश गलियां क्षतिग्रस्त हैं। जहां सड़कें बनी हैं, वहां आजतक नाली खड़ंजा नहीं बन सके। सुनील पैंगोरिया का कहना है कि मोहल्ले में पानी की गंभीर समस्या है। टंकी से आधे क्षेत्र में पानी नहीं पहुंचता है। मोहल्लेे में मात्र तीन इंच की पाइप लाइन डाली गई है, जिससे पानी का प्रेशर कम आता है।
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सभासद की सुनिए
अपने कार्यकाल में क्षेत्र में कई गलियों का निर्माण कराया है। इंद्रानगर क्षेत्र में कुछ गलियों बनने से रह गई हैं। बोर्ड भंग होने के बाद नगर निगम अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की। वार्ड में कर्मचारियों की कमी के कारण सफाई खराब है।वार्ड में मात्र कर्मचारी हैं, जबकि 40 कर्मचारियों की जरूरत है।
गिरजेश कुमार
निवर्तमान सभासद