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महंगी हुईं चूड़ियां, आर्डर का भी टोटा
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महंगी हुईं चूड़ियां, आर्डर का भी टोटा
- मांग घटने के कारण डगमगा रहा 100 वर्ष पुराना कारोबार, इसी से है जिले की पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। लगातार बढ़ रहीं कच्चे माल की दरों के कारण जिले की पहचान कहे जाने वाला चूड़ी उद्योग डगमगाने लगा है। कच्चे माल और नेचुरल गैस के दाम बढ़ने से चूड़ियों के दाम तीन गुने तक पहुंच गए हैं। लगभग दो लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मुहैया कराने वाले करीब पांच हजार करोड़ का वार्षिक कारोबार वाले चूड़ी उद्योग को अब घरेलू और दूसरे प्रांतों से आर्डरों का भी टोटा पड़ रहा है।
देश-विदेश में सुहागनगरी के नाम से प्रसिद्ध फिरोजाबाद का 100 वर्ष पुराना परंपरागत चूड़ी कारोबार विगत तीन साल से तमाम झंझावतों को झेल रहा है। वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के चलते लॉक डाउन और वैश्विक मंदी के बाद पटरी पर लौट रहा चूड़ी कारोबार अब मंहगी गैस, कच्चे माल के दामों में हुई बढ़ोतरी के कारण दोबारा संकटग्रस्त है। तीन माह में चूड़ी बनाने में प्रयुक्त सात प्रमुख केमिकल और कच्चे माल के दामों में तीन गुना एवं नेचुरल गैस के दामों में दोगुनी वृद्धि हो गई है। यही कारण है कि कारखानों में बनने वाली सादा चूड़ी के तोड़ा में 25 से 40 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। सादी चूड़ी को कटिंग,पॉलिस और मोती-नग आदि वाली फैंसी लुक वाली चूड़ी के दाम भी असमान पर हैं। महंगाई के कारण पूर्वांचल, महाराष्ट, बिहार, तमिलनाडू, आंध प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश से आने वाले एक हजार से अधिक ट्रेडिंग कारोबारी फिरोजाबाद में पर्याप्त आर्डर नहीं दे हे हैं।
औपचारिकता तक सीमित चूूड़ी की खरीद
फिरोजाबाद निर्मित चूड़ी को कलाई में सजाने के लिए देश-विदेेशों की महिलाओं में खासा चाव रहता था। महंगाई की मार ने सुहागिन महिलाओं की पसंद चूड़ी पर भी असर डाला है। हाथों में सजने वाली रंग-बिरंगी चूड़ियाें की खरीद महंगाई के कारण अब देवी पूजन, अथवा शादी-विवाह तक ही सीमित हो रही है।
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दोगुने हुए केमिकल के दाम
चूड़ी की लागत बढने के पीछे कच्चे माल सोडा-एस,सुहागा,कांच भंगार के अलावा लाल,हरी,बैंगनी और औरेंज रंग की चूड़ी बनाने में प्रयुक्त नाईट्रेट, कैडियम, कोबाल्ट,जिंक और कैल्साइट के दाम बढ़ना एक प्रमुख कारण है। इन सभी के दाम तीन माह की अवधि में दोगुना हो चुके हैं।
नेचुरल गैस के दामों में अस्थिरता ने भी बढ़ाई परेशानी
मार्च में कांच चूड़ी कारखानों में फुंकने वाली नेचुरल गैस के दाम लगभग 17.50 रुपये प्रति घनमीटर थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों व नेचुरल गैस के दाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढे़ हुए हैं। यही कारण है कि फिरोजाबाद की कांच इकाईयों को रियायती दर वाली नेचुरल गैस के दाम में भी इस समय 35.71 रुपये प्रति घनमीटर है।
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फिरोजाबाद की रीढ़ है चूड़ी कारोबार
-दो-ढाई लाख लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार देता है चूड़ी कारोबार
-70 टैंक फर्नेस और 80 पॉट फर्नेस वाले कारखानों में बनती हैं चूड़ीं
- चूड़ी कारोबार पर टिकी है 500 करोड़ रुपये वार्षिक कारोबार वाला पैकिंग इंडस्ट्रीज
- कई प्रांतों, दस से अधिक देशों में भेजी जाती है फिरोजाबाद की रंग-बिरंगी चूड़ी
रियायती दर वाली गैस का कोटा हो सुनिश्चित
- कच्चे माल की दरें नियंत्रण में आने की उम्मीद है। सर्वाधिक परेशानी नेचुरल गैस के दामों में बढ़ोतरी के कारण है।कुटीर उद्योग की भांति संचालित चूड़ी कारोबार को बचाने के लिए एकमात्र विकल्प तीन से पांच हजार घनमीटर तक गैस खपत करने वाली इकाईयों को रियायती दर वाली गैस का कोटा सुनिश्चित किया जाए।
- हनुमान प्रसाद गर्ग, डायरेक्टर द ग्लास सिंडिकेट
कच्चे माल की दरों में हुए इजाफे के कारण चूड़ी की लागत में 25 से 40 रुपये प्रति तोड़ा तक की बढ़त हुई है। लघु एवं मध्यम वर्ग की महिलाएं मंहगी चूड़ी खरीदने से कतरा रही हैं। डिमांड नहीं होने से 100 साल पुराना चूड़ी कारोबार चौपट होने के कगार पर है।
- बिन्नी मित्तल, अध्यक्ष, द इंडस्ट्रियल कोआपरेटिव सोसायटी
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- मांग घटने के कारण डगमगा रहा 100 वर्ष पुराना कारोबार, इसी से है जिले की पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। लगातार बढ़ रहीं कच्चे माल की दरों के कारण जिले की पहचान कहे जाने वाला चूड़ी उद्योग डगमगाने लगा है। कच्चे माल और नेचुरल गैस के दाम बढ़ने से चूड़ियों के दाम तीन गुने तक पहुंच गए हैं। लगभग दो लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मुहैया कराने वाले करीब पांच हजार करोड़ का वार्षिक कारोबार वाले चूड़ी उद्योग को अब घरेलू और दूसरे प्रांतों से आर्डरों का भी टोटा पड़ रहा है।
देश-विदेश में सुहागनगरी के नाम से प्रसिद्ध फिरोजाबाद का 100 वर्ष पुराना परंपरागत चूड़ी कारोबार विगत तीन साल से तमाम झंझावतों को झेल रहा है। वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के चलते लॉक डाउन और वैश्विक मंदी के बाद पटरी पर लौट रहा चूड़ी कारोबार अब मंहगी गैस, कच्चे माल के दामों में हुई बढ़ोतरी के कारण दोबारा संकटग्रस्त है। तीन माह में चूड़ी बनाने में प्रयुक्त सात प्रमुख केमिकल और कच्चे माल के दामों में तीन गुना एवं नेचुरल गैस के दामों में दोगुनी वृद्धि हो गई है। यही कारण है कि कारखानों में बनने वाली सादा चूड़ी के तोड़ा में 25 से 40 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। सादी चूड़ी को कटिंग,पॉलिस और मोती-नग आदि वाली फैंसी लुक वाली चूड़ी के दाम भी असमान पर हैं। महंगाई के कारण पूर्वांचल, महाराष्ट, बिहार, तमिलनाडू, आंध प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश से आने वाले एक हजार से अधिक ट्रेडिंग कारोबारी फिरोजाबाद में पर्याप्त आर्डर नहीं दे हे हैं।
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फिरोजाबाद निर्मित चूड़ी को कलाई में सजाने के लिए देश-विदेेशों की महिलाओं में खासा चाव रहता था। महंगाई की मार ने सुहागिन महिलाओं की पसंद चूड़ी पर भी असर डाला है। हाथों में सजने वाली रंग-बिरंगी चूड़ियाें की खरीद महंगाई के कारण अब देवी पूजन, अथवा शादी-विवाह तक ही सीमित हो रही है।
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दोगुने हुए केमिकल के दाम
चूड़ी की लागत बढने के पीछे कच्चे माल सोडा-एस,सुहागा,कांच भंगार के अलावा लाल,हरी,बैंगनी और औरेंज रंग की चूड़ी बनाने में प्रयुक्त नाईट्रेट, कैडियम, कोबाल्ट,जिंक और कैल्साइट के दाम बढ़ना एक प्रमुख कारण है। इन सभी के दाम तीन माह की अवधि में दोगुना हो चुके हैं।
नेचुरल गैस के दामों में अस्थिरता ने भी बढ़ाई परेशानी
मार्च में कांच चूड़ी कारखानों में फुंकने वाली नेचुरल गैस के दाम लगभग 17.50 रुपये प्रति घनमीटर थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों व नेचुरल गैस के दाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढे़ हुए हैं। यही कारण है कि फिरोजाबाद की कांच इकाईयों को रियायती दर वाली नेचुरल गैस के दाम में भी इस समय 35.71 रुपये प्रति घनमीटर है।
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फिरोजाबाद की रीढ़ है चूड़ी कारोबार
-दो-ढाई लाख लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार देता है चूड़ी कारोबार
-70 टैंक फर्नेस और 80 पॉट फर्नेस वाले कारखानों में बनती हैं चूड़ीं
- चूड़ी कारोबार पर टिकी है 500 करोड़ रुपये वार्षिक कारोबार वाला पैकिंग इंडस्ट्रीज
- कई प्रांतों, दस से अधिक देशों में भेजी जाती है फिरोजाबाद की रंग-बिरंगी चूड़ी
रियायती दर वाली गैस का कोटा हो सुनिश्चित
- कच्चे माल की दरें नियंत्रण में आने की उम्मीद है। सर्वाधिक परेशानी नेचुरल गैस के दामों में बढ़ोतरी के कारण है।कुटीर उद्योग की भांति संचालित चूड़ी कारोबार को बचाने के लिए एकमात्र विकल्प तीन से पांच हजार घनमीटर तक गैस खपत करने वाली इकाईयों को रियायती दर वाली गैस का कोटा सुनिश्चित किया जाए।
- हनुमान प्रसाद गर्ग, डायरेक्टर द ग्लास सिंडिकेट
कच्चे माल की दरों में हुए इजाफे के कारण चूड़ी की लागत में 25 से 40 रुपये प्रति तोड़ा तक की बढ़त हुई है। लघु एवं मध्यम वर्ग की महिलाएं मंहगी चूड़ी खरीदने से कतरा रही हैं। डिमांड नहीं होने से 100 साल पुराना चूड़ी कारोबार चौपट होने के कगार पर है।
- बिन्नी मित्तल, अध्यक्ष, द इंडस्ट्रियल कोआपरेटिव सोसायटी