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एंबुलेंस चालकों ने किया चक्का जाम, वेतन बढ़ोत्तरी सहित यह है प्रमुख मांगें
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शिकोहाबाद रामलीला मैदान में खड़ी 102, 108 एंबुलेंस
- फोटो : FIROZABAD
शिकोहाबाद। 102 और 108 एंबुलेंस के ईएमटी और चालकों ने संचालनकर्ता कंपनी पर भ्रष्टाचार, अनियमितता, उत्पीड़न व मानदेय न देने का आरोप लगाते हुए सोमवार को सेवाएं ठप कर दीं। सुबह दस बजे से सभी चालक अपनी एंबुलेंस लेकर रामलीला मैदान में पहुंच गए और कतारबद्ध खड़ी कर दीं।
कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष शरद यादव के नेतृत्व में सभी कर्मचारियों ने सुबह से ही सेवा ठप कर दी। जिले भर की कुल 55 एंबुलेंस जिनमें 102 व 108 शामिल हैं को रामलीला मैदान में खड़ा कर दिया। जिले भर से आए कर्मचारियों ने संचालित करने वाली कंपनी जीवीके पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। कर्मचारियों ने कहा कि कंपनी उन्हें समय से वेतन नहीं दे रही है। जो वेतन दिया जाता है उसमें कटौती की जाती है। जिससे उनके परिवार का भरण पोषण भी नहीं हो पा रहा है। पांच सालों से मानदेय में एक रुपये की बढ़ोत्तरी भी नहीं की गई है। उनसे 24 घंटे काम लिया जाता है। इसके साथ ही कंपनी उन पर दबाव डालकर फर्जी केस कराकर सरकार को लाखों का चूना लगा रही है। चेतावनी दी जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होगी तब तक अनिश्चित कालीन हड़ताल रहेगी।
यह हैं प्रमुख मांगें
कंपनी पर पैसे लेकर धन उगाही करने का आरोप, बेरोजगारों का शोषण करना और पुराने कर्मचारियों को निकालकर नए कर्मचारी भर्ती करने पर रोक लगे। जीवीके ईएमआरआई उत्तर प्रदेश सरकार से फर्जी तरीके से हर माह करोड़ों रुपये की वसूली बंद हो। पायलट प्रोजेक्ट के नाम पर पुराने कर्मचारियों को बंधुआ मजदूर न समझा जाए, कंपनी के अधिकारियों पर भर्ती के नाम पर अवैध वसूली का आरोप लगाया। कर्मचारियों से श्रम कानून के विरुद्ध 12 घंटे से अधिक ड्यूटी न ली जाए। कंपनी प्रतिदिन 12 फर्जी केस का दबाव डालती है, जिसे बंद किया जाए। ईएमटी और पायलट को मिलने वाले अनुदान में बढ़ोत्तरी की जाए।
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फिरोजाबाद में 23 अप्रैल को धरना प्रदर्शन किया गया था। तब कंपनी के अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। छह जुलाई को लेबर कमिश्नर कोर्ट लखनऊ में कंपनी के खिलाफ संघ ने प्रदर्शन किया। जिसमें पुराने कर्मचारियों को निकालने का विरोध किया था। इसके साथ ही पायलट प्रोजेक्ट को बंद करने की मांग रखी गई थी। 22 जुलाई को श्रम विभाग के कमिश्नर के यहां कंपनी के पदाधिकारियों से वार्ता को बुलाया था लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
एंबुलेंस सेवाएं ठप होने से संयुक्त चिकित्सालय में सुबह से ही सन्नाटा पसरा रहा। पूरे दिन में इमरजेंसी में कोई केस नहीं पहुंचा। केवल थाना पुलिस ने चार लोगों का मेडिकल कराया है। इसके साथ ही प्राइवेट वाहनों से लोग मरीजों को लेकर आए। वहीं महिला अस्पताल में भी पूरे दिन एक भी महिला का प्रसव नहीं कराया। ईएमओ डॉ. अभिषेक ने बताया कि आज कोई मरीज नहीं आया है। पुलिस ने कुछ लोगों का मेडिकल कराया है। स्टाफ नर्स संतोष देवी ने बताया कि सोमवार को दोपहर चार बजे तक कोई भी प्रसव का केस नहीं आया है और न ही किसी जच्चा-बच्चा को घेर भेजा गया है।
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कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष शरद यादव के नेतृत्व में सभी कर्मचारियों ने सुबह से ही सेवा ठप कर दी। जिले भर की कुल 55 एंबुलेंस जिनमें 102 व 108 शामिल हैं को रामलीला मैदान में खड़ा कर दिया। जिले भर से आए कर्मचारियों ने संचालित करने वाली कंपनी जीवीके पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। कर्मचारियों ने कहा कि कंपनी उन्हें समय से वेतन नहीं दे रही है। जो वेतन दिया जाता है उसमें कटौती की जाती है। जिससे उनके परिवार का भरण पोषण भी नहीं हो पा रहा है। पांच सालों से मानदेय में एक रुपये की बढ़ोत्तरी भी नहीं की गई है। उनसे 24 घंटे काम लिया जाता है। इसके साथ ही कंपनी उन पर दबाव डालकर फर्जी केस कराकर सरकार को लाखों का चूना लगा रही है। चेतावनी दी जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होगी तब तक अनिश्चित कालीन हड़ताल रहेगी।
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यह हैं प्रमुख मांगें
कंपनी पर पैसे लेकर धन उगाही करने का आरोप, बेरोजगारों का शोषण करना और पुराने कर्मचारियों को निकालकर नए कर्मचारी भर्ती करने पर रोक लगे। जीवीके ईएमआरआई उत्तर प्रदेश सरकार से फर्जी तरीके से हर माह करोड़ों रुपये की वसूली बंद हो। पायलट प्रोजेक्ट के नाम पर पुराने कर्मचारियों को बंधुआ मजदूर न समझा जाए, कंपनी के अधिकारियों पर भर्ती के नाम पर अवैध वसूली का आरोप लगाया। कर्मचारियों से श्रम कानून के विरुद्ध 12 घंटे से अधिक ड्यूटी न ली जाए। कंपनी प्रतिदिन 12 फर्जी केस का दबाव डालती है, जिसे बंद किया जाए। ईएमटी और पायलट को मिलने वाले अनुदान में बढ़ोत्तरी की जाए।
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फिरोजाबाद में 23 अप्रैल को धरना प्रदर्शन किया गया था। तब कंपनी के अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। छह जुलाई को लेबर कमिश्नर कोर्ट लखनऊ में कंपनी के खिलाफ संघ ने प्रदर्शन किया। जिसमें पुराने कर्मचारियों को निकालने का विरोध किया था। इसके साथ ही पायलट प्रोजेक्ट को बंद करने की मांग रखी गई थी। 22 जुलाई को श्रम विभाग के कमिश्नर के यहां कंपनी के पदाधिकारियों से वार्ता को बुलाया था लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
एंबुलेंस सेवाएं ठप होने से संयुक्त चिकित्सालय में सुबह से ही सन्नाटा पसरा रहा। पूरे दिन में इमरजेंसी में कोई केस नहीं पहुंचा। केवल थाना पुलिस ने चार लोगों का मेडिकल कराया है। इसके साथ ही प्राइवेट वाहनों से लोग मरीजों को लेकर आए। वहीं महिला अस्पताल में भी पूरे दिन एक भी महिला का प्रसव नहीं कराया। ईएमओ डॉ. अभिषेक ने बताया कि आज कोई मरीज नहीं आया है। पुलिस ने कुछ लोगों का मेडिकल कराया है। स्टाफ नर्स संतोष देवी ने बताया कि सोमवार को दोपहर चार बजे तक कोई भी प्रसव का केस नहीं आया है और न ही किसी जच्चा-बच्चा को घेर भेजा गया है।