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Firozabad News: उर्वशी तिराहा गोलीकांड में 18 साल बाद सभी 9 आरोपी बरी
Fri, 31 Oct 2025 11:42 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Fri, 31 Oct 2025 11:42 PM IST
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सांकेतिक
- फोटो : सांकेतिक
फिरोजाबाद। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी कोर्ट-2) ने शुक्रवार को 3 मई 2007 के सनसनीखेज उर्वशी तिराहा ग्रेनेड-गोलीकांड में सभी 9 जीवित आरोपियों को बरी कर दिया। एक आरोपी की विचारण के दौरान मौत हो चुकी थी। कोर्ट ने पुलिस की कहानी को संदिग्ध मानते हुए विवेचना में गंभीर खामियां पाईं।
शाम करीब 8 बजे थाना दक्षिण क्षेत्र के उर्वशी तिराहे पर दो गुट सलीम, नईम उर्फ लोटा, मुसर्रत, तस्लीम (मुस्लिमाबाद) और बबलू, मो. हनीफ, फुरकान, इमरान, रऊफ (मुहम्मदगंज), रईस (ट्रांसपोर्ट नालबंद) एक-दूसरे पर फायरिंग और हथगोले फेंक रहे थे। हेड कांस्टेबल नत्थू खां की टीम ने बीच-बचाव किया तो आरोपियों ने पुलिस पर भी हमला किया। भारी बल आने पर आरोपी फरार हो गए। मोहम्मद हनीफ घायल हुआ था, जिसकी बाद में मौत हो गई।
कोर्ट ने पकड़ी ये कमियां
जनरल डायरी गायब: पुलिस रवानगी की सत्यापित प्रति पेश नहीं कर सकी।
गवाह मुकर गए: रिजवान, मोहम्मद उस्मान, रशीद अहमद ने घटना से इन्कार किया। एक ने कहा कि वह शहर में ही नहीं था। सभी पक्षद्रोही घोषित।
फॉरेंसिक अनदेखी: खाली कारतूस और जले सुतली के टुकड़े बरामद बताए, लेकिन फॉरेंसिक जांच या कोर्ट में पेश नहीं किए।
पुलिस को चोट नहीं: कम दूरी से फायरिंग के बावजूद पुलिसकर्मियों को खरोंच तक नहीं।
हथियार बरामदगी शून्य: कोई आरोपी मौके से गिरफ्तार नहीं, कोई हथियार बरामद नहीं।
रिपोर्ट में खामियां: नत्थू खां आरोपी का हुलिया, उम्र, हथियार या हथगोले की जगह नहीं बता सके।
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शाम करीब 8 बजे थाना दक्षिण क्षेत्र के उर्वशी तिराहे पर दो गुट सलीम, नईम उर्फ लोटा, मुसर्रत, तस्लीम (मुस्लिमाबाद) और बबलू, मो. हनीफ, फुरकान, इमरान, रऊफ (मुहम्मदगंज), रईस (ट्रांसपोर्ट नालबंद) एक-दूसरे पर फायरिंग और हथगोले फेंक रहे थे। हेड कांस्टेबल नत्थू खां की टीम ने बीच-बचाव किया तो आरोपियों ने पुलिस पर भी हमला किया। भारी बल आने पर आरोपी फरार हो गए। मोहम्मद हनीफ घायल हुआ था, जिसकी बाद में मौत हो गई।
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कोर्ट ने पकड़ी ये कमियां
जनरल डायरी गायब: पुलिस रवानगी की सत्यापित प्रति पेश नहीं कर सकी।
गवाह मुकर गए: रिजवान, मोहम्मद उस्मान, रशीद अहमद ने घटना से इन्कार किया। एक ने कहा कि वह शहर में ही नहीं था। सभी पक्षद्रोही घोषित।
फॉरेंसिक अनदेखी: खाली कारतूस और जले सुतली के टुकड़े बरामद बताए, लेकिन फॉरेंसिक जांच या कोर्ट में पेश नहीं किए।
पुलिस को चोट नहीं: कम दूरी से फायरिंग के बावजूद पुलिसकर्मियों को खरोंच तक नहीं।
हथियार बरामदगी शून्य: कोई आरोपी मौके से गिरफ्तार नहीं, कोई हथियार बरामद नहीं।
रिपोर्ट में खामियां: नत्थू खां आरोपी का हुलिया, उम्र, हथियार या हथगोले की जगह नहीं बता सके।