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अधिग्रहण के विरोध से योजनाओं में गतिरोध

Tue, 24 Feb 2015 11:44 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Tue, 24 Feb 2015 11:44 PM IST
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केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण बिल का हर ओर तेजी से विरोध हो रहा है। सुहागनगरी के किसान से लेकर राजनीतिक दल तक सहमत नहीं हैं। किसानों का कहना है हमारी भूमि बिना सहमति के लेना तानाशाही होगी। राजनीतिक दलों में विरोध के स्वर काफी तेज दिखे। किसानों ने अपनी भूमि का उचित मूल्य मांगने को कोर्ट तक का दरवाजा खटखटा डाला। यही कारण है जेड़ाझाल पेयजल योजना, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे सहित अन्य कई योजनाओं पर ब्रेक लगा है।

भूमि अधिग्रहण बिल हो या सुहागनगरी की जेड़ाझाल परियोजना किसान हर तरफ विरोध कर रहे हैं। किसान पूर्व नियमावली पर ही सवाल उठा रहे हैं। जेड़ाझाल योजना के किसान भूमि की दरों से चार गुना मुआवजा देने, भूमि की पैमाइश कराने, ट्यूबवेल, मकान और अन्य कोई स्थल हो तो उसका अलग से मुआवजा देने, भूमिहीन किसानों को उसी या दूसरे गांव में पट्टा दिलाने की मांग कर रहे हैं। कई किसानों ने हाईकोर्ट तक का दरवाजा खटखटा दिया। इसके साथ नागऊ के किसानों के भूमि ट्रांसपोर्ट नगर बनाने को जबरन नाम दर्ज कर लिया। किसानों की सहमति तक नहीं ली।
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किसान परिवार के एक सदस्य को नौकरी, ट्रांसपोर्ट नगर में दुकान देने और भूमिहीनों को पट्टा देने की मांग पर अड़े हैं। ग्राम कुतुकपुर चनौरा के किसानों की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बनाए जाने को अधिकृत की गई भूमि से प्रभावित किसान चार गुना मुआवजा, बेरोजगार बेटों को नौकरी की मांग कर रहे हैं। आगरा लखनऊ ग्रीन एक्सप्रेस वे के लिए कई किसानों की भूमि का बैनामा कराया। नगला गुलाल और कई गांव के किसान सैफई के अनुरूप मुआवजे की मांग पर अड़े हैं। उनका तर्क है कि ऊसरयुक्त भूमि सवा करोड़ रुपया प्रति हेक्टेयर और हमारी तीन फसली भूमि 13 लाख यह अन्याय नहीं सहेंगे। हाईकोर्ट तक में अर्जी लगा दी। चेतावनी दी कि जबरन भूमि ली तो आत्महत्या कर लेंगे।
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राजनीतिक दलों ने रखी अपनी राय
केंद्र सरकार भूमि अधिग्रहण बिल में किसानों का ख्याल रखेगी। भाजपा किसान हित का ही सोच रही है। उनका हक नहीं मारा जाएगा। ऐसे प्रावधानों को रखने का काम हमारे प्रधानमंत्री करेंगे।
भाजपा जिलाध्यक्ष, अरविंद पचौरी  

केंद्र सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की साजिश रच रही है। बसपा भी बिल का विरोध करेगी। क्योंकि इसमें किसानों की बिना सहमति के जमीन लेने का प्रावधान है।
आगरा जोन कोआर्डिनेटर, हेमंत प्रताप

यूपीए सरकार ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जो रखी थी वही ठीक थी। मोदी सरकार तानाशाही से किसान की भूमि लेना चाहती है। किसान की सहमति, पांच साल तक उद्योग नहीं लगें तो वापस और चार गुना दर से पेमेंट मिलना चाहिए।

पूर्व प्रदेश महासचिव, धर्म सिंह

केंद्र सरकार मनमाने ढंग से भूमि अधिग्रहण बिल ला रही है। 70 प्रतिशत तक किसानों की सहमति, सिंचित भूमि को विशेष परस्थिति में लिए जाने के प्वाइंट हटाना गलत है। जमीन किसान की जाएगी इसलिए सहमति उसकी होनी चाहिए।
राष्ट्रीय किसान नौजवान संगठन जिलाध्यक्ष, रामनिवास यादव  

भूमि के अभाव में अटकी योजनाएं
- आगरा-लखनऊ ग्रीन एक्सप्रेस वे से प्रभावित होने वाले नगला गुलाल के किसान सैफई के अनुरूप मुआवजा की मांग पर अड़े। हाईकोर्ट की शरण ली।
-नागऊ में ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना का काम किसानों की सहमति के अभाव में रुका। किसानों का आरोप बिना मुआवजा के जमीन अपने नाम कर ली।
- फीरोजाबाद को पानी दिलाने को शुरू की गई जेड़ाझाल के किसान चार गुना मुआवजा की मांग को लेकर हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे।
- यमुना किनारे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण भूमि के अभाव में शुरू नहीं हो सका।
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को ग्राम कुतुकपुर चनौरा के किसानों की सहमति के अभाव में काम रुका।
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